कुछ बंधन तोड़ देना ही अच्छा होता है – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका’
सुबह के सात बज रहे थे। रसोई में चाय की खुशबू फैल रही थी और खिड़की के बाहर अमलतास के पीले फूल हवा के साथ झूम रहे थे। मीरा ने चाय का कप ट्रे में रखा और हमेशा की तरह पहले सास-ससुर के कमरे की ओर बढ़ी। “माँजी, चाय रख दूँ?” अंदर से आवाज आई, … Read more