अल्हड़ गौरैया का नया घोंसला

“सुमित्रा! तुमने वो बेबी लोशन और थर्मामीटर रखा या नहीं? और वो जो छोटी-छोटी सूती की टोपियां मैंने कल बाज़ार से लाकर दी थीं, वो बैग में हैं या तुमने बाहर ही छोड़ दीं?” कमरे में चारों तरफ फैले सामान के बीच खड़े होकर रघुनाथ जी बड़ी बेचैनी से सूटकेस की चेन बंद करने की … Read more

अपनी पहचान का आसमान

सावित्री देवी के चेहरे पर एक व्यंग्यात्मक और कुटिल मुस्कान तैर गई थी। वह अपने आलीशान सोफे पर विराजमान थीं, हाथ में चाय का प्याला था और उनकी नज़रें अपनी बहू मेघा पर गड़ी थीं, जो अभी-अभी बाहर से आई थी। मेघा उनके इस खामोश कटाक्ष और उस कुटिल मुस्कराहट का राज बहुत अच्छी तरह … Read more

सिंदूरी रवायतें और एक नई सुबह

 लेकिन नंदिनी कहाँ मानने वाली थी। उसने दृढ़ निश्चय के साथ सुमित्रा देवी का हाथ कसकर पकड़ लिया और बोली, “रवायतें इंसानों के लिए होती हैं माँ, इंसान रवायतों के लिए नहीं। अगर कोई रिवाज एक माँ को उसके बेटे की खुशी से दूर करता है, तो मैं ऐसे किसी रिवाज को नहीं मानती। आप … Read more

खामोश इंतज़ार की चुभन

 बस, वही एक पल था जिसने दोनों के बीच जमी बरसों की बर्फ को पिघला दिया। उस दिन के बाद से उनका मेल-मिलाप शुरू हो गया। कल्याणी का नर्म दिल अविनाश के उस शालीन और अनवरत समर्पण के आगे हार गया था। धीरे-धीरे वह भी अविनाश को चाहने लगी। दोनों एक-दूसरे पर अपनी जान छिड़कने … Read more

मोहभंग: वो आखिरी कदम

 “जाओ काव्या, लौट जाओ अपने घर,” कबीर ने गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए कहा। “यह तुम्हारे लिए एक सबक है। भगवान का शुक्र मनाओ कि मैं कोई बुरा इंसान नहीं था, वरना रात के इस अंधेरे में तुम्हारा क्या अंजाम होता, तुम सोच भी नहीं सकती। मैंने तुम्हें सिर्फ यह एहसास दिलाने के लिए यहाँ … Read more

अनकहे शब्दों की चुभन

मैंने आगे कहा, “नए रिश्तों की ज़मीन बहुत नाज़ुक होती है सुमित्रा। इसमें मज़ाक का भारी हल नहीं चलाया जाता, बल्कि प्यार और समझदारी का बीज बहुत नरमी से बोना पड़ता है। तुम्हारी और निशांत की जान-पहचान पुरानी हो सकती है, लेकिन श्रुति के लिए तुम अभी भी ‘सास’ हो, ‘मां’ नहीं बनी हो। मां … Read more

रक्त की रोटी और नियति का क्रूर खेल

चिंटू अपनी पूरी ताकत लगाकर अपनी मां की छाती से चिपका हुआ था। वह बार-बार अपना छोटा सा मुंह अपनी मां के स्तनों पर मार रहा था, इस उम्मीद में कि शायद उसकी क्षुधा शांत करने के लिए वहां से दूध की कोई बूंद छलक पड़े। लेकिन एक मां, जिसके अपने ही पेट में पिछले … Read more

अनदेखी बेड़ियाँ: ‘चार लोगों’ का खौफ

विदाई की रुलाई और सफर की थकान से राधिका का पोर-पोर दर्द कर रहा था। भारी लहंगे और गहनों के बोझ से उसका शरीर जैसे सुन्न पड़ गया था। ससुराल की दहलीज पार करने के बाद उसने सोचा कि अब वह अपने कमरे में जाकर थोड़ी देर आँखें मूंद लेगी। लेकिन अभी वह बिस्तर के … Read more

भ्रम का आईना

नीता मेरी कॉलेज के दिनों की सबसे करीब सहेली थी। हम दोनों ने साथ में पढ़ाई की, साथ में सपने देखे थे, लेकिन शादी के बाद नीता की दुनिया पूरी तरह से बदल गई। उसकी शादी एक बहुत ही अच्छे परिवार में हुई थी। उसके पति, राघव, एक मल्टीनेशनल कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट थे और … Read more

रिश्तों का बाज़ार और एक बेटी का स्वाभिमान

रमाकांत जी भारी मन और झुके हुए कंधों के साथ घर लौटे। सुमित्रा ने जब उनका उतरा हुआ चेहरा देखा, तो वह तुरंत समझ गईं कि कुछ गड़बड़ है। रात के अंधेरे में दोनों पति-पत्नी अपने कमरे में बैठकर इस नई मुसीबत पर चर्चा करने लगे। “सुमित्रा, उन्होंने इतनी बड़ी मांग रख दी है कि … Read more

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