रिश्तों की कीमत
कार्तिक मास की हल्की-हल्की ठंड ने दस्तक दे दी थी। सुबह का धुंधलका अभी पूरी तरह छँटा भी नहीं था, लेकिन मीरा की रसोई में बर्तनों की खनक और मसालों की सोंधी महक ने पूरे घर को जगा दिया था। आज भाई दूज का पवित्र त्योहार था। वैसे तो घर में काम करने वाली बाई … Read more