आपकी दोनों बहुएँ एकदम लक्ष्मी हैं – पुष्पा जोशी 

 मोहनलाल जी का पुराना सा मकान शहर के बीचों-बीच था, पर उसमें जितना प्यार था, उतनी ही रौनक भी। नीचे की मंज़िल पर वो अपनी पत्नी शारदा के साथ रहते थे, और ऊपर की मंज़िल दो हिस्सों में बँटी थी – एक तरफ़ बड़े बेटे प्रदीप का कमरा, दूसरी तरफ़ छोटे बेटे सागर का। प्रदीप … Read more

घर बंटने से पहले दिल बंटता है – रश्मि प्रकाश 

  सरोजा देवी का छोटा बेटा विवेक, जो दो महीने पहले ही शादी करके आया था, आज सुबह से नज़रें चुराता घूम रहा था। सरोजा देवी मंदिर की घंटी बजाकर बाहर आईं तो देखा कि विवेक बैठक में खड़ा कुछ सोच रहा है।उनके पूछने से पहले ही विवेक ने गहरी सांस ली—“माँ, मुझे आपसे कुछ कहना … Read more

शक से सिर्फ रिश्ते टूटते हैं – हेमलता गुप्ता 

अनन्या को पिछले कुछ दिनों से एक अजीब-सी बेचैनी महसूस हो रही थी।अर्जुन—उसका पति—आम दिनों में शांत, गंभीर और थोड़ा रिज़र्व स्वभाव का इंसान था।लेकिन पिछले पंद्रह-बीस दिनों से वह किसी अनदेखी खुशी से भरा हुआ घूम रहा था। ऑफिस जाने से पहले गुनगुनाना,देर रात तक मोबाइल पर मुस्कुराते रहना,और अक्सर अचानक कहीं बाहर निकल … Read more

फैसला – एम पी सिंह

अशोक अपने बेटे और माँ के साथ दिल्ली मैं रहता था और प्राइवेट बैंक मैं क्लर्क था. अशोक कि शादी 6 साल पहले कमला से हुई थी, शुरू के 2 साल तक सब कुछ ठीक था. फिर कमला के पॉव भारी हुए और घर मैं खुशियों का माहौल बन गया. धीरे धीरे समय बीतता गया … Read more

भाग्य – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू

किराये के मकान और विषम यानि (आर्थिक) परिस्थितियों से जूझते जूझते रेखा की बेटियां कब जवान हो गईं उसे पता न चला, एक रोज रीना की मम्मी (पड़ोस वाली भाभी) ने ऐसे ही बातों बातों में पूछ ली अरे भाई शहनाई कब बज रही  आपके घर ईश्वर की कृपया से बच्चियों की पढ़ाई भी  पूरी  … Read more

घाव हरा करना – लक्ष्मी त्यागी

शहर के कोने में बने एक पुराने से घर के बरामदे में, एक बूढ़ा व्यक्ति लकड़ी की पुराने डिजाइन की कुर्सी पर बैठा हुआ था। उसके चेहरे की झुर्रियों की गहराई में बीते हुए सालों का दर्द साफ झलक रहा था।उस व्यक्ति का नाम — ‘रामनारायण मिश्रा’था। ये घर कभी हंसी-खुशी से गूंजता था, मगर … Read more

अंतहीन यात्रा – संजय मृदुल

मालगाड़ी आवाज़ करती हुई रुकी। सुबह का धुंधलका छंटने लगा है, पूरब से हल्की लालिमा बिखर रही है। खुशनुमा दिन की शुरुआत हो रही है और राहुल का मन खाली है। धीरे से उसने बाहर झांक कर देखा। चारों ओर खेत और उनमें लगे पेड़ दिखाई दे रहे हैं। खेतों से पीछे दूर चिमनियों से … Read more

बुढ़ी आंखें सब पहचानती है !! – स्वाती जैन

अर्जुन ,  कुछ सीखो तुम्हारे दोनों बड़े भाईय़ों से, राजीव पढ़- लिखकर नौकरी पर लग गया और आनंद की भी बस पढ़ाई पुरी होने को हैं और एक तुम हो जिसे बस एक्टिंग का भूत सवार हैं , गुस्से में बोले हरिशंकर जी !! अर्जुन बोला- पापा, पढ़ाई में मन नहीं लगता हैं मेरा, मैं … Read more

भागी भगोड़ी बेटी – डॉ बीना कुण्डलिया 

बारह बर्ष पहले घर छोड़कर चली गई नमिता, आज घर लौट कर आ रही है । जिन्दगी की भागदौड़ से थककर सुकून की तलाश करती उसकी वापसी हुई। उसने देखा कितना कुछ बदल गया। उसका वो छोटा सा कस्बा कच्ची पगडंडियों की जगह सड़क बन गई। जगह जगह बस स्टॉप बन गये । पहले जब … Read more

अंतिम निर्णय – दिक्षा_बागदरे

मधुर और राइमा लगभग 25 सालों का दांपत्य जीवन साथ बिता चुके थे। मगर पिछले कुछ समय से दोनों के बीच एक शीत युद्ध  चल रहा है।  ऐसा नहीं था कि उनके बीच कभी कोई वाद-विवाद ना हुए हो। वाद-विवाद तो हर पति-पत्नी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।  यह कहानी घर-घर की … Read more

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