काँच के रिश्ते

“अंजलि, जो तुमने नीचे देखा, वो बहुत दुखद था, लेकिन तुम्हें एक बात समझनी होगी। जब दो अलग-अलग इंसान, जिनकी सोच अलग है, परवरिश अलग है, एक ही छत के नीचे पूरी जिंदगी बिताने का फैसला करते हैं, तो उनके बीच वैचारिक मतभेद होना एक बेहद स्वाभाविक सी बात है। जहां गहरा प्यार होता है, … Read more

निस्वार्थ भावना

मुझे उस पांच सौ के नोट को देखकर हंसी आ गई। मैंने मन ही मन सोचा, ‘माँ भी किस दुनिया में जी रही हैं। आजकल इतने पैसों में तो बड़े अस्पतालों के पार्किंग और पर्चे का खर्च भी पूरा नहीं होता।’ कार में बैठते ही दादा जी, जो पीछे की सीट पर दर्द से कराह … Read more

ममता की छाँव

विदाई की शहनाइयाँ बज रही थीं। मीरा की बुआ ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा था, “तू तो बहुत किस्मत वाली है री मीरा। ससुराल में कोई सास-ससुर का झंझट नहीं। सास तो है नहीं, बस ससुर जी हैं, वो क्या ही कहेंगे। अब तो पूरे घर की मालकिन तू ही है। आराम से … Read more

गुरू दक्षिणा – डॉ बीना कुण्डलिया

अरे बहु देखना जरा जाकर कामिनी आ गई लगता है,बाहर गाड़ी रूकने की आवाज आई उत्साहित ममता जी ने बहु नंदनी को आवाज लगाई। फिर खुद से ही बड़बड़ाई ये बेटियां भी फंक्शन त्यौहारों में जब तक घर में न आ जाये आँगन में रौनक ही नहीं आती ।  कामिनी रसोईघर में व्यस्त सभी काम … Read more

असली चरित्र

ट्रेन के पहियों की एक लयबद्ध खट-खट और खिड़की से पीछे छूटते हुए पेड़ों के दृश्य मुझे हमेशा सुकून देते थे, लेकिन आज यह सफर मुझे अंदर ही अंदर एक अजीब सी बेचैनी दे रहा था। मेरे सामने वाली सीट पर मेरी पत्नी, सुमेधा बैठी थी, और उसकी त्योरियां इस बात का सुबूत थीं कि … Read more

यादगार यात्रा

गोमती एक्सप्रेस आज अपने तय समय से चार घंटे की देरी से चल रही थी। कादंबरी खिड़की से माथा टिकाए बाहर के धुंधले नज़ारों को देख रही थी। ज़िंदगी भी तो इसी बारिश के धुंधले शीशे जैसी हो गई थी, जहाँ बाहर बहुत कुछ था मगर अंदर से सब धुंधला ही नज़र आता था। घर … Read more

तीसरा हिस्सा

शहर के सबसे पॉश इलाके में बना ‘आशीर्वाद’ भवन बाहर से जितना आलीशान और शांत दिखता था, अंदर से उसमें उतनी ही अशांति और कलह मची रहती थी। सेठ रामनारायण जी के देहांत को अभी मुश्किल से दो साल ही बीते थे, लेकिन इस छोटे से अंतराल में ही उस घर की पूरी तस्वीर बदल … Read more

रिश्तों के आसमान

दोपहर की चिलचिलाती धूप में रसोई का काम समेटते हुए कविता के हाथ अचानक ठिठक गए। फोन की स्क्रीन पर स्कूल की प्रिंसिपल का नंबर चमक रहा था। फोन उठाते ही दूसरी तरफ से आई घबराई हुई आवाज ने कविता के पैरों तले से जमीन खिसका दी। “कविता जी, तुरंत सिटी अस्पताल पहुँचिए, आपकी बेटी … Read more

शान

“नसीब आपने लिखा था उसका, भगवान नहीं!” श्रुति ने भी उसी तेज़ आवाज़ में जवाब दिया। “लेकिन मैं अपना नसीब आपको नहीं लिखने दूंगी। मैं आज अपना इंटरव्यू देकर आ रही हूँ। मुझे नौकरी मिल गई है। कल से मैं अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जिऊंगी। अगर इस घर में मुझे मेरी शर्तों पर, एक … Read more

वो बंधन सिर्फ कच्चे धागों का नहीं है – डॉ आभा माहेश्वरी

रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला था। पूरे गाँव में उत्साह का माहौल था। बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सजा हुआ था। हर बहन अपने भाई के लिए सबसे सुंदर राखी चुन रही थी। लेकिन गाँव के किनारे रहने वाली बारह वर्ष की अनन्या के चेहरे पर उदासी थी। उसका बड़ा भाई अर्जुन पिछले दो वर्षों से … Read more

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