सिल्क की साड़ी – डॉ बीना कुण्डलिया

अनु ओ अनु अरे कहां है बिटिया अनु की दादी माँ लगातार पुकारे जा रहीं थीं और अनु का कहीं अता-पता नहीं, तभी उसके दादाजी आवाज सुनकर कमरे में प्रवेश करते हुए कहते हैं अरी भाग्यवती “क्यों चिल्ला रही बच्ची पर “? चैन से रहने दे उसे पल दो पल । दादी बोलीं चिल्ला नहीं … Read more

जली हुई सिल्क की साड़ी

 हंसता खेलता एक खुशहाल परिवार। परिवार में अर्जुन की मां देविका जी, अर्जुन उसकी पत्नी आरती, 10 वर्षीय बेटा कबीर और 8 वर्षीय बेटी अक्षरा थे। अर्जुन की बहन तपस्या की शादी हो चुकी थी। वह अर्जुन से कुछ साल बड़ी थी।  परिवार में सभी एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। छोटी-छोटी खुशियों को  … Read more

सिल्क की साड़ी – सुदर्शन सचदेवा

दुकान में रंग-बिरंगी सिल्क की साड़ियाँ रोशनी में ऐसी दमक रही थीं, मानो इंद्रधनुष धरती पर उतर आया हो। कहीं आसमानी रंग था, कहीं पिस्ता हरा, कहीं बैंगनी, कहीं सुनहरी कढ़ाई वाली रेशमी साड़ी। हर साड़ी अपनी ओर बुला रही थी। दुकानदार ने मुस्कुराकर पूछा, “मैडम, कौन-सा रंग दिखाऊँ?” मैंने बिना एक पल गँवाए कहा, … Read more

सिल्क की साड़ी – मधु वशिष्ठ

मां को सिल्क की साड़ियां पहनने का बहुत शौक था और 2 अक्टूबर से पहले कनॉट प्लेस के खादी     ग्रामोद्योग भवन में खादी की सेल से वह बहुत साड़ियां लाती थी। मुझे आज भी याद है 2 अक्टूबर के आसपास  दिल्ली के कनॉट प्लेस के सिनेमा हॉल रीगल पर पिक्चर देखना और उधर … Read more

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