ऐसी भाभी सबको मिले – सीमा सिंघी 

जब से देवकी का विवाह बासु के साथ तय हुआ। तब से ही देवकी खुश तो थी मगर..एक अनजाना डर उसके अंदर समाए जा रहा था । वह अक्सर सोचती रहती थी कि… जब ब्याह कर वह उस घर में जाएगी तो… वहां उसे भाभी के साथ साथ मां का भी फर्ज निभाना होगा । … Read more

षड्यंत्र – गरिमा जैन

भाभी मेरे लिए चाय बना दीजिए और साथ में पकोड़े भी अच्छा छोटी आप चलिए मैं अभी बनाती हूं  अरे यह आपके चेहरे को क्या हो गया ? दिखाइए जरा । कुछ नहीं ,कुछ नहीं ! यह कैसा निशान है चेहरे पर? कुछ नहीं मैं फिसल कर गिर गई थी  भाभी मैं छोटी बच्ची नहीं … Read more

छठी का उपहार – अर्चना सिंह

घर के हर कोने में पकवानों की खुशबू बिखरी हुई थी । चारु घर के अंदर घुसते ही अपनी माँ सुधा जी को मिठाई के डिब्बे पकड़ाते हुए बोली…”लो माँ ! अभी इसको सम्भाल कर रखो जब अपनी भतीजी का मुँह देखूँगी तब तुमसे ले लूंगी। सुधा जी ने सवालिया निगाहों से चारु को देखते … Read more

भाभी हो तो ऐसी – मधु वशिष्ठ

“अरे! तूने बताया ही नहीं कि मिनी का एक्सीडेंट हो गया और उसके पैरों में भी प्लास्टर चढ़ा हुआ है? यह तो मैं अपने बैंक की मेरठ वाली ब्रांच में आया तो सोचा चल तेरे से भी मिलता हुआ चलूं, वरना तू तो बताती भी नहीं।” दर्द से कराहते हुए भी मामा को देखकर मिनी … Read more

मैली चादर का उजास

 आईने के सामने खड़ी मंदाकिनी अपनी कजरारी आँखों में सलीके से सुरमा लगा रही थी। उसके अधरों पर एक सहज और सच्ची मुस्कान थिरक रही थी, जो शायद उसने कई बरसों से खुद के चेहरे पर नहीं देखी थी। उसने गहरे हरे रंग की रेशमी साड़ी पहनी थी, जिसके किनारों पर सुनहरी गोटेदार किनारी लगी … Read more

संस्कारों की बेड़ियाँ

 अवंतिका ने अपने पिता के आँसू पोंछते हुए बहुत ही सौम्यता से कहा, “बाबूजी, आपको माफी मांगने की ज़रूरत नहीं है। आपने मुझे जो संस्कार दिए थे, मैं उनके खिलाफ कभी नहीं थी। लेकिन मुझे यह समझ आ गया कि त्याग का अर्थ खुद को मिटा देना नहीं होता। अगर कोई स्त्री अपने हिस्से का … Read more

मैली चादर 

महेंद्र भी आगे बढ़े, उनकी आंखें भी नम थीं। उन्होंने अनुष्का के सिर पर हाथ रखा और भरे गले से कहा, “बेटा, आज तन्वी ने हमारी आंखों से लालच की पट्टी उतार दी है। कल सुबह ही हम वकील को बुलाएंगे। तुम्हारे पिता का जो भी था—दुकान, मकान और बैंक बैलेंस—वह सब तुम्हारे नाम किया … Read more

विश्वास का सिंदूर

 कबीर की बात सुनकर आंगन में खड़ी सभी स्त्रियों की आँखें भर आईं। कल्याणी जी आगे बढ़ीं और उन्होंने अवनी के सिर पर हाथ रखते हुए कहा कि बहू, कबीर सच कह रहा है। शास्त्रों में ‘आपद्धर्म’ का विधान है। जब शरीर साथ न दे, तो भावना ही सबसे बड़ी पूजा बन जाती है। तूने … Read more

निश्छल प्रेम

रोहन के इन शब्दों में इतनी सच्चाई और दृढ़ता थी कि सुनयना की आंखों में खुशी और अविश्वास के आंसू छलक आए। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि शहर का इतना पढ़ा-लिखा और अमीर लड़का उसे इस कदर मान देगा। वह बिना कुछ कहे रोहन के सामने हाथ जोड़कर वहां से चली … Read more

खंडहरों से आसमां तक

वैदेही की आँखों से आंसू बह निकले। उसने कांपती आवाज में चिन्मय से कहा, “चिन्मय… जिस समंदर को मैं अपनी जिंदगी समझती थी, उसने आज हमसे हमारी छत ही छीन ली। देखो न, आज हमारे सिर पर वही खुला आसमान है, वही तारे हैं जिन्हें हम ढूंढते थे… लेकिन आज मुझे इनसे नफरत हो रही … Read more

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