साँसों से भारी ज़िम्मेदारियाँ
सुधा की उम्र यही कोई पैंतालीस के आस-पास रही होगी। वह उन आम भारतीय महिलाओं में से एक थी, जिनके दिन की शुरुआत घर के सबसे छोटे सदस्य के जागने से पहले होती थी और रात तब होती थी जब घर का आखिरी बल्ब बुझ जाता था। सुधा का परिवार एक टिपिकल मध्यमवर्गीय परिवार था। … Read more