प्रेम की छाँव

घर में भले ही फैसले रोहन और मीरा लेते थे, लेकिन उन पर आखिरी मुहर हमेशा सावित्री देवी की ही होती थी। ये एक कड़वा सच है कि बेटा चाहे अपनी माँ को कितनी भी कड़वी बात कह दे, माँ उसे भूल जाती है। लेकिन अगर बहू ज़रा सी भी ऊँची आवाज़ में बात कर … Read more

बोया पेड़ बबूल का

पूर्वी का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने अपना पूरा गुस्सा अपने भाई पर उतार दिया। “अनिकेत भैया, आपको शर्म नहीं आती? पापा ने हमें पालने के लिए अपनी पूरी ज़िंदगी लगा दी और आप उन्हें यहाँ छोड़ने आ गए? और सिमरन भाभी कहाँ हैं? मुझे पता है, ये सब उसी का किया धरा होगा। … Read more

विश्वास की कसौटी

रेवती जी ने श्रुति के आँसू पोंछे और रोहन की तरफ पलटकर बोलीं, “सुन ले रोहन, शादी का रिश्ता कोई शक की ज़मीन पर खड़ी इमारत नहीं होती। ये विश्वास की वो डोर है जो एक बार टूट जाए तो लाख कोशिशों के बाद भी उसमें गाँठ रह ही जाती है। मंडप में जलाई गई … Read more

असली श्रृंगार

“मैं सच कह रहा हूँ माँ,” आदित्य ने दृढ़ता से कहा। “मुझे ऐसी जीवनसाथी की ही तलाश थी जो सिर्फ हां में हां मिलाने वाली न हो, बल्कि जिसकी अपनी एक स्वतंत्र सोच हो। जो मुश्किल वक्त में मेरे बैंक बैलेंस की मोहताज न हो, बल्कि अपने संस्कारों और आत्मविश्वास से मेरा साथ दे सके। … Read more

असली हीरा है मेरी बहू

सावित्री देवी के घर में आज कोहराम मचा हुआ था। शहर की प्रतिष्ठित ‘महिला समिति’ की मासिक बैठक आज उन्हीं के घर पर थी। यह सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि सावित्री देवी के लिए अपनी नाक का सवाल था। शहर की मेयर की पत्नी और कई बड़े अधिकारियों की पत्नियां आने वाली थीं। सावित्री देवी … Read more

रिश्तों की अनकही डायरी

आज मैंने बहुत बड़ा पाप किया है। मैंने  दीक्षा  पर हाथ उठाया। मुझे खुद से घिन आ रही है। मैं जानता हूँ कि वो इस शादी से खुश नहीं है, किसी और को चाहती है। मैं ये भी जानता हूँ कि वो रोज़ दोपहर को उससे मिलने जाती है। लेकिन वो भी क्या करे, उसके … Read more

रिश्तों की कीमत – एम पी सिंह

नीलम शादी करके ससुराल पहुची, वो बहुत खुश थी। परिवार में पति और ससुर के अलावा कोई नहीं था। पति आनंद की अच्छा पड़ा लिखा, सरकारी नौकरी मैं था. सब ठीक चल रहा था, ओर जल्दी ही वो पति औऱ ससुर की चहेती बन गई। नीलम से ससुर एक सेवानिवृत सरकारी अधिकारी थे. अच्छी सोसाइटी … Read more

रिश्तों का सूती धागा

 उस दिन मीरा ने चाय की ट्रे जैसे-तैसे मेज पर रखी और बिना कुछ कहे वहां से अपने कमरे में चली गई। उसके दिल में एक अजीब सी खटास पैदा हो गई थी। जिस सास के साथ वह अपने दिल की हर बात साझा करती थी, अचानक वह उसे एक अजनबी और स्वार्थी औरत लगने … Read more

नयी सुबह की मीठी धूप और एक अनकही रीत

 “अरे मीरा बेटा, तुम इतनी जल्दी क्यों उठ गईं? अभी तो छह भी नहीं बजे हैं। आज तो रविवार है, तुम्हें आराम करना चाहिए था,” निर्मला देवी ने बहुत ही स्नेह से कहा। मीरा हड़बड़ा गई। उसे लगा कि शायद उसने कोई बहुत बड़ी गलती कर दी है या फिर उसकी सास उसे ताना मार … Read more

खोखली दीवारें

 अविनाश और सौरभ, जो लाखों रुपये महीने कमाते थे, जो बड़े-बड़े मैनेजमेंट के गुरु थे, आज एक अनपढ़ कामवाली के सामने बौने नज़र आ रहे थे। बाहर बरामदे में बैठे दीनानाथ जी ने कमला ताई की एक-एक बात सुनी थी। उनके कांपते होठों पर एक फीकी सी हंसी तैर गई। उन्होंने एक गहरी सांस ली … Read more

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