घर ईंटों से नहीं दिलों से बनता है -प्रतिमा श्रीवास्तव
कमरें में धीमी रौशनी जल रही थी। सन्नाटा चारों ओर पसरा हुआ था, सांसो की आवाजाही भी कानों में साफ – साफ सुनाई दे रही। बिस्तर पर लेटी करुणा जी छत को अपलक निहार रहीं थीं, जैसे कुछ प्रश्नों के जबाब को तलाश रहीं हों। अतीत की यादों ने उन्हें झकझोर दिया था और आंखों … Read more