घर की असली लक्ष्मी

देवांश के हर एक शब्द ने मालती आंटी के अहंकार पर करारा प्रहार किया था। उनके चेहरे का रंग उड़ गया था। पहली बार उन्हें आईना दिखाया गया था, और वह आईना किसी गैर ने नहीं, बल्कि उनके अपने बेटे ने दिखाया था जिसे वे अपनी सबसे बड़ी जागीर समझती थीं। हरिशंकर जी भी आगे … Read more

तकदीर की देहरी पर ठहरी मोहब्बत

“तुमने ऐसा क्यों किया देवांग? तुमने मुझे इतना कमजोर, इतना स्वार्थी समझ लिया?” नैना ने रोते हुए उसके सीने पर अपनी हथेलियों से मारा, “क्या मेरा प्यार सिर्फ तुम्हारी अच्छी सेहत, तुम्हारी दो सीधी टांगों से था? अगर आज मेरी जगह तुम्हारे साथ यह हादसा हुआ होता, तो क्या तुम मुझे छोड़कर चले जाते? बोलो!” … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी

सुमित्रा जी की आँखों में भी नमी उतर आई। उन्होंने कृतिका के सिर पर ममता से हाथ फेरते हुए कहा, “पगली बच्ची, इसमें माफ़ी कैसी? गलती तुम्हारी नहीं है। हमारे समाज में टीवी सीरियलों ने, पुरानी दकियानूसी कहानियों ने और कुछ कड़वे अनुभवों ने सास-बहू के रिश्ते को एक जंग का मैदान बना दिया है। … Read more

आसमान की दो उड़ानें

गजेंद्र ने भरी सभा में देविका को वे कानूनी कागज थमा दिए और धमकी दी कि अगर उन्होंने शांति से हवेली नहीं छोड़ी, तो वह पुलिस और अदालत का सहारा लेकर उन्हें बेइज्जत करके बाहर निकालेंगे। देविका यह सुनकर टूट गईं। एक तरफ बेटी की शादी सर पर थी, अगर यह विवाद बाहर जाता तो … Read more

देहरी के पार का आसमान

 कौशल्या जी की आंखों से खुशी और आत्मग्लानि के मिले-जुले आंसू बह निकले, “मैंने अपनी झूठी जिद और उस निर्जीव ईंट-पत्थर की हवेली के मोह में अपनी जिंदगी के सात सबसे खूबसूरत साल अकेले घुट-घुट कर गंवा दिए। जिस सुख, शांति और स्वर्ग को मैं वहां ढूंढ रही थी, वह तो यहां तुम बच्चों की … Read more

प्रेम की परिपक्वता

 मानसी ने चाय का एक कप अर्णव को थमाया और दूसरा कप कल्याणी जी के हाथों में देते हुए बोली, “माँ जी, आज आपकी मालिश अर्णव नहीं, मैं करूँगी। यह दिन भर के थके हुए हैं, इन्हें तो मालिश करना भी ठीक से नहीं आता होगा। अर्णव, आप जाकर गर्म पानी से नहाइए और फ्रेश … Read more

रिश्तों की धूप-छांव  

 मिहिर थोड़ा रुका, उसने माँ के हाथ को अपने गाल से लगाया और आगे बोला, “और रही बात सौम्या की, माँ… तो सौम्या तो मेरी आत्मा है, मेरी अर्धांगिनी है। उसके साथ तो मुझे अपना पूरा जीवन बिताना है। अगर मैं पहले आपके पास आ गया, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मेरा … Read more

रिश्तों की अधूरी पहेली  

यह सुनकर मेरे पैरों तले से जमीन खिसक गई। मेरे दिल में जो पच्चीस सालों से एक शिकायत थी कि इन्होंने मुझे क्यों ठुकराया, वह शिकायत एक ही पल में कपूर की तरह उड़ गई और उसकी जगह एक अथाह करुणा और पश्चाताप ने ले ली। जिन बुजुर्गों को मैं कठोर और बेपरवाह समझ रहा … Read more

 प्रीत का नया रंग

 प्रज्ञा ने जो रूप धरा था, उसे देखकर आंगन में बैठी हर औरत दंग रह गई। प्रज्ञा ने कोई नई भारी भरकम लाल साड़ी नहीं पहनी थी। उसने वही गहरे लाल और सुनहरे गोटे वाली पुरानी बनारसी साड़ी पहन रखी थी, जो पैंतीस साल पहले विश्वंभर जी ने उर्मिला को उनकी पहली करवाचौथ पर दी … Read more

गर्दिश के सितारे  

मैंने जब उसके सिर पर हाथ रखा, तो मुझे लगा कि आज मेरी तीस साल पुरानी तपस्या का फल मुझे मिल गया है। जिस बेटे को कभी मैले कपड़ों में देखकर जमाना ताने मारता था, आज वही बेटा देश के सबसे बड़े महकमे में एक जिम्मेदार पद पर बैठकर देश की सेवा कर रहा था। … Read more

error: Content is protected !!