आँगन की नई धूप
सुमित्रा जी के हाथों में चाय की दो प्यालियां थीं, जिनसे उठती भाप सुबह की शांति में घुल रही थी। आज रविवार था, छुट्टी का दिन। सुमित्रा जी के कदमों की आहट बहुत धीमी थी, मानो वो इस शांत सुबह की लय को तोड़ना नहीं चाहती थीं। उनके चेहरे पर एक गहरी, अर्थपूर्ण मुस्कान थी, … Read more