रेशम की खुशबू – लक्ष्मी कानोडिया

अलमारी का सबसे ऊपर वाला खाना खोलते ही मीरा के हाथ ठिठक गए। सामने हल्के आसमानी रंग की बनारसी सिल्क साड़ी बड़े करीने से रखी थी। उसने साड़ी को धीरे से बाहर निकाला और हथेलियों पर फैला लिया। रेशम की मुलायम चमक जैसे वर्षों पुरानी यादों को फिर से जीवंत कर गई। “मम्मी, आप फिर … Read more

 रिश्ते चलते हैं बराबरी से

मीरा के हाथों में वह कागज का टुकड़ा बुरी तरह से कांप रहा था। वह कोई मामूली कागज नहीं था, बल्कि समीर की कंपनी से आया हुआ ‘रिलीविंग लेटर’ था। कमरे में पसरा सन्नाटा इतना गहरा था कि मीरा को अपनी ही धड़कनें सुनाई दे रही थीं। सामने पलंग पर बैठा समीर नजरें झुकाए अपने … Read more

सिल्क की साड़ी – डॉ बीना कुण्डलिया

अनु ओ अनु अरे कहां है बिटिया अनु की दादी माँ लगातार पुकारे जा रहीं थीं और अनु का कहीं अता-पता नहीं, तभी उसके दादाजी आवाज सुनकर कमरे में प्रवेश करते हुए कहते हैं अरी भाग्यवती “क्यों चिल्ला रही बच्ची पर “? चैन से रहने दे उसे पल दो पल । दादी बोलीं चिल्ला नहीं … Read more

रिश्ते पैसे से नहीं संस्कार से निभते है – मंजू ओमर

रश्मि यह लो ₹10000 रूपये  कल तुम्हारी एनिवर्सरी है ना जो  चाहे खरीद लो और जहां चाहे पार्टी करना अपनी सहेलियों के साथ खूब मस्ती करना और इंजॉय करना विनय बोला। रूपये रश्मि के हाथ में रखता हुआ। , और तुम तुम नहीं इंजॉय करोगे तुम्हारी भी तो मैरिज एनिवर्सरी है मेरी अकेली की तो … Read more

अजनबी

रोहन जैसे ही थका-हारा दफ्तर से घर लौटा, सोफे पर बैठी उसकी पत्नी रिया का पारा सातवें आसमान पर था। रोहन ने अभी अपने जूतों के फीते खोले ही थे कि रिया की तीखी आवाज पूरे ड्रॉइंग रूम में गूंज उठी, “मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती रोहन! तुम्हारी माँ से एक छोटा सा … Read more

पिता की सीख

“पापा, बस बहुत हो गया! मैं अब इस घर में एक पल भी और नहीं रह सकती। रोहन और उसके परिवार की पिछड़ी हुई सोच के साथ मेरा दम घुटता है। अगर आप कल सुबह तक यहाँ नहीं आए, तो मैं अकेले ही डिवोर्स के पेपर फाइल कर दूँगी।” काव्या ने बिना कोई जवाब सुने … Read more

पराए की पहचान

कौशल्या देवी अपने बहुमंजिला इमारत की बालकनी में बैठी शून्य में ताक रही थीं। सामने शहर की चमचमाती रोशनियां थीं, लेकिन उनके भीतर एक अजीब सा अंधेरा पसरा हुआ था। उनके हाथ में फोन था, जिस पर अभी-अभी उनकी बेटी रितु का कॉल कटा था। रितु की बातें उनके कानों में किसी विषैले बाण की … Read more

संस्कारों की कद्र

“सुषमा जी, देखिए हमारे पंडित जी ने कहा है कि अगले महीने की पंद्रह तारीख का मुहूर्त सबसे उत्तम है। इसके बाद तो सीधा छह महीने तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। हम चाहते हैं कि शादी इसी मुहूर्त में हो जाए। आखिर हमें भी तो अपने रिश्तेदारों को जवाब देना होता है।” फोन के … Read more

*कब तक आत्मसम्मान खोकर जियोगी* – तोषिका

सुबह सुबह ये क्या हो गया? प्रीति ने अपने माथे पर हाथ मारते हुए बोला। तभी वहां उसकी बेटी रैना आई, उसने चिंतित होते हुए पूछा “क्या हुआ मां, ये कौन सी आवाज आई। प्रीति बोली “कुछ नहीं बेटा, तुम्हारे लिए दूध डाल रही थी कि अचानक से हाथ से पतीला गिर गया और सारा … Read more

आत्मसम्मान – खुशी

रितु एक सीधी साधी लड़की थी।घर में पिताजी श्याम मां सुनीता थे।पिता जी की इच्छा सुपुत्र की थी परंतु वो नहीं हो पाया ।मां सुनीता रितु के बाद दो बार गर्भवती रही पर दोनों बार लड़कियां होने के कारण दादी ने गर्भपात करवा दिया।फिर चौथी बार बेटा था परंतु सातवें महीने में सीढ़ियों से गिरने … Read more

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