*कब तक आत्मसम्मान खोकर जियोगी* – तोषिका

सुबह सुबह ये क्या हो गया? प्रीति ने अपने माथे पर हाथ मारते हुए बोला। तभी वहां उसकी बेटी रैना आई, उसने चिंतित होते हुए पूछा “क्या हुआ मां, ये कौन सी आवाज आई। प्रीति बोली “कुछ नहीं बेटा, तुम्हारे लिए दूध डाल रही थी कि अचानक से हाथ से पतीला गिर गया और सारा … Read more

आत्मसम्मान – खुशी

रितु एक सीधी साधी लड़की थी।घर में पिताजी श्याम मां सुनीता थे।पिता जी की इच्छा सुपुत्र की थी परंतु वो नहीं हो पाया ।मां सुनीता रितु के बाद दो बार गर्भवती रही पर दोनों बार लड़कियां होने के कारण दादी ने गर्भपात करवा दिया।फिर चौथी बार बेटा था परंतु सातवें महीने में सीढ़ियों से गिरने … Read more

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