सुबह सुबह ये क्या हो गया? प्रीति ने अपने माथे पर हाथ मारते हुए बोला। तभी वहां उसकी बेटी रैना आई, उसने चिंतित होते हुए पूछा “क्या हुआ मां, ये कौन सी आवाज आई।
प्रीति बोली “कुछ नहीं बेटा, तुम्हारे लिए दूध डाल रही थी कि अचानक से हाथ से पतीला गिर गया और सारा दूध भी।”
रैना ने बोला “कोई नहीं मा, ये दूध साफ हो जाएगा और दूध आ जाएगा।”
इतने में रैना, प्रीति से बात ही कर रही थी कि पीछे से उसका पति आया और गुस्से में बोला “सुबह सुबह किस चीज की आवाज थी, तुम थोड़ा काम ध्यान से नहीं कर सकती थी?
जब उसकी पूरी आंख खुली उसने देखा कि दूध भी गिर रखा है। ये देख कर वो पूरा आग बबूला हो गया और एक दम से प्रीति को बोला “पैसे पेड़ पर से आते है क्या? सुबह सुबह इतना नुकसान कर दिया।”
“मुझे माफ कर दीजिए, वो एक दम से गैस पर हाथ पड़ा तो छूट गया।” प्रीति ने सिर झुकाते हुए बोला।
जब उसका पति वहां से गया तो रैना ने अपनी मां को बोला “मां तुम ये सब क्यों सहती रहती हो, *कब तक आत्मसम्मान खोकर जियोगी*?”
प्रीति अपनी बेटी के गालों पर हाथ रखते हुए बोली “मेरी फिक्र मत कर, बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। घर का सब मैं देख लूंगी।”
ऐसा घर में कई बार हुआ था, पर जैसे जैसे रैना बड़ी हो रही थी, उसको सब समझ आने लग गया था।
लेकिन इस बार अपनी आँखें के सामने अपनी मां की बेज़त्ती पहली बार देखी थी और वो दृश्य उसकी आँखें के सामने बार बार आ रहा था।
सारा दिन सोचने एक बाद उसने अपनी मां की एक खुद पहचान बनवाने का सोचा जिस से उनका खोया हुआ आत्मसम्मान वापस आ जाए।
उसको याद था कि उसकी मां एक नृत्य कलाकार थी और शादी के बाद उनको अपना सपना और हुनर सब पीछे छोड़ना पड़ गया था।
उसने अपनी मां को बोला कि वो बच्चों को नृत्य कराना दुबारा शुरू करे पर प्रीति ने मना कर दिया, उसको डर था कि कही रैना के पापा फिर से कुछ ना बोले, लेकिन रैना की इच्छा के आगे और उसकी मिन्नतों के आगे वो पिघल गई और उसने चुपके चुपके अपना नृत्य करना दुबारा शुरू किया और अपना सोशल मीडिया पर अकाउंट भी बनाया और वो नृत्य एक काली परछाई की तरह करती थी ताकि उसका चेहरा कही ना दिखे।
देखते ही देखते कुछ महीनों में उसके काफी फॉलोअर्स हो गए थे और होंगे भी क्यों नहीं, प्रीति का नृत्य था ही इतना आकर्षित की किसी को भी अपने वश में कर ले।
लेकिन उसको जिसका डर था वो ही हुआ, एक दिन प्रीति के पति को पता चल गया कि वो ऐसे नृत्य के रही है और वो एकदम से घर आते ही भड़का और बोला “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई, लोगो के सामने नाचने की, तुम मेरी बीवी हो और एक मां भी, तुम्हे शर्म नहीं आई ये सब करते हुए?” और गुस्से में उसने प्रीति के घुंघरू भी तोड़ दिए।
उस दिन प्रीति बहुत रोई, जब रैना स्कूल से आई और उसको पता चला ये सब हुआ है तो उस से रहा नहीं गया और उसने अपने पापा के आगे हिम्मत कर के आवाज उठाई, लेकिन उसने रैना को थप्पड़ मार दिया। बस तब प्रीति से नहीं रहा गया, उसने कहा “जब तक बात मेरी थी मैं सह रही थी लेकिन अब और नहीं आज बाद मेरी नहीं मेरी बेटी की है, आपको हमारे होने या होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है ना, ठीक है हम यहां से चले जाएंगे।”
उसने रैना को चुप कराया और अपना और उसका बैग पैक किया और वो उस घर से उसी वक्त वहां से चले गए।
*कुछ महीनों बाद*
प्रीति के पास बहुत बड़ा मौका आया नृत्य करने का और सीखने का और उधर रैना भी अपनी पढ़ाई के साथ अपनी मां की मदद करती थी और प्रीति ने अब अपने पंख फैलाकर जीना शुरू किया क्योंकि अब वो किसी भी पत्नी वृत्ता बंधन में नहीं बंधी थी।
लेखिका
तोषिका