Betiyan Team
ज़िंदगी की एक छोटी सी हार
“अरे मीना बहू, क्या बात है? आज हमारे घर का चिराग सुबह से दिखाई नहीं दिया, कहीं सूरज पश्चिम से तो नहीं निकल आया?” पचहत्तर वर्षीय रिटायर कर्नल शमशेर सिंह ने अपनी छड़ी को ज़मीन पर टिकाते हुए अपने पड़ोस में रहने वाले आयुष के घर के बरामदे में कदम रखा। उनकी भारी और रौबदार … Read more
दोहरे चेहरे – विनीता सिंह
राघवेंद्र जी को पूरा शहर ‘सज्जन पुरुष’ कहता था। उनके चेहरे पर हमेशा एक सौम्य मुस्कान तैरती रहती थी। शहर के हर बड़े सामाजिक कार्यक्रम, अनाथालयों के दान समारोहों और धार्मिक आयोजनों में वे अग्रिम पंक्ति में बैठे नजर आते थे। सफेद कड़क कुर्ता-पायजामा, माथे पर चंदन का तिलक और वाणी में ऐसी मधुरता कि … Read more
*वो मुझसे ज़्यादा मेरी भाभी की माँ है* – तोषिका
“माँ अब तो आप भी सास बन जाओगे, अब बस आप आराम करना और सारा काम भाभी पर छोड़ देना। घर में मेहमान बड़ था है तो उसका कुछ फायदा भी तो होना चाहिए।” फोन पर अपनी माँ नीलू से बात करती हुई उनकी बेटी रिया ने बोला। “अरे बेटा ऐसे नहीं बोलते, वो पहली … Read more
दोहरे चेहरे – मधु वशिष्ठ
डोर बेल बजने पर दरवाजा खुला तो सामने मिसेस भसीन को मुस्कुराते हुए खड़ा पाया। उन्हें अंदर आने को कहा तो झट से बोली ,नहीं बहन जी ,आप तो हमारे घर आती नहीं ,मैं भी आपके घर नहीं आऊंगी। मैं अक्सर ऐसा ही करती थी। अरे भाई ,अगर नहीं आना था तो डोर बैल क्यों … Read more
सोने का पिंजरा
काव्या की गोरी कलाई और कोहनी के बीच का हिस्सा नीले, काले और हरे पड़े निशानों से भरा हुआ था। वे निशान नए नहीं थे, कुछ पुराने थे जो पीले पड़ रहे थे और कुछ बिल्कुल ताज़े थे, जिनमें खून जम गया था। हीरों के उस भारी ब्रेसलेट के ठीक ऊपर, किसी सिगरेट से जलाए … Read more
कर्मा लौटता है
अगर तुम चाहो, तो अम्मा हमारे साथ, हमारे घर में रह सकती हैं। बच्चों को इनसे बेहतर और सुरक्षित हाथ नहीं मिल सकते, और अम्मा को भी उनका खोया हुआ परिवार और बच्चों का साथ वापस मिल जाएगा।” मीरा ने बिना एक पल गँवाए आगे बढ़कर मालती देवी के हाथ पकड़ लिए। “क्या आप सच … Read more
खोखले हो चुके रिश्ते – गरिमा चौधरी
“अरे कोई है इस घर में या सब बहरे हो गए हैं? मीना… ओ मीना! कहां मर गई?” ड्राइंग रूम में फाइलों का पुलिंदा बिखेरते हुए राजेंद्र बाबू का पारा सातवें आसमान पर था। उनकी गरजती आवाज से खिड़कियों के कांच भी मानो थर्रा गए हों। रसोई में सुबह के नाश्ते की तैयारी में जुटी … Read more
दोहरे चेहरे – डॉ आभा माहेश्वरी
राघव अपने शहर का एक प्रतिष्ठित समाजसेवी माना जाता था। अखबारों में उसकी तस्वीरें छपती थीं, मंचों पर उसका सम्मान होता था और लोग उसे “गरीबों का मसीहा” कहकर पुकारते थे। वह हर समारोह में बड़ी-बड़ी बातें करता—”इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं”, “हर व्यक्ति को सम्मान मिलना चाहिए।” उसकी मधुर वाणी और सादा पहनावा … Read more