खुली हवा – श्रीप्रकाश श्रीवास्तव

शर्मा जी के घर के सामने अच्छी खासी भीड जमा थी। उनके बीच खुसर फुसर जारी थी। एक पचीस वर्षीया शादीशुदा महिला फाटक पास बैठी थी। अंदर से फाटक बंद था। भीड ज्यादातर उन लेागो की थी जिनकी कोई केा सामाजिक हैसियत नहीं थी। किसी का आदमी ठेला चलता था तेा कोई बर्तन मांझने का … Read more

तालमेल

शादी को छह महीने बीत चुके थे, लेकिन नेहा के हिस्से में अब तक सिर्फ जिम्मेदारियां ही आई थीं। रसोई, पूजा-पाठ, रिश्तेदारों का आना-जाना और घर की अनगिनत उलझनों के बीच वह जैसे अपनी नई-नवेली शादीशुदा जिंदगी के वो सुनहरे पल जीना ही भूल गई थी, जिनके सपने उसने मायके में बुने थे। आज सुबह-सुबह … Read more

भाभी माँ

आज जब मैं घर में घुसा, तो मैंने देखा कि बाहर बरामदे में ताई जी के परिवार की गाड़ियां खड़ी थीं, जो शायद अभी-अभी निकले थे। मुझे समझते देर नहीं लगी कि घर में मेहमान आए थे। और मुझे यह भी पता है कि जब घर में मेहमान आते हैं, तो आप किस तरह उनकी … Read more

सच्चा जीवनसाथी 

माधव रुंधे हुए गले से बोला, “मुझे छोड़ दो राधिका… तुम अब एक बहुत बड़ी अधिकारी हो। यहाँ सारे लोग तुम्हें देख रहे हैं। मेरे जैसे एक मामूली मजदूर का तुम्हारे साथ होना तुम्हारी इज्जत खराब कर देगा।” राधिका ने आँसू पोंछते हुए कहा, “कौन सी इज्जत? यह पद, यह रुतबा, यह गाड़ी, यह सब … Read more

दुनिया की सबसे बड़ी दौलत

अपनी सगी माँ की सूरत रोहन को ठीक से याद भी नहीं थी। जब वह महज छह साल का था, तभी एक गंभीर बीमारी ने उसकी माँ को उससे छीन लिया था। घर में वैसे तो पिता दिनेश थे, लेकिन रोहन की परवरिश का पूरा जिम्मा उसकी विधवा बुआ, कमला पर आ गया था। बुआ … Read more

पिता को अंतिम विदाई

शहर के प्रतिष्ठित रिटायर्ड हेडमास्टर, पंडित दीनानाथ जी की अंतिम यात्रा उनके पुश्तैनी घर के आंगन से निकल रही थी। दीनानाथ जी ने अपने जीवन में हजारों छात्रों का भविष्य संवारा था, इसलिए आज उनके अंतिम दर्शन के लिए पूरा शहर उमड़ पड़ा था। अर्थी के आगे-आगे नंगे पैर, सिर मुंडाए और हाथ में सुलगता … Read more

वैराग्य

“स्वामी जी, प्रणाम,” कल्याणी ने अत्यंत श्रद्धा के साथ अपनी थाली एक ओर रखी और नित्यानंद के चरणों में झुक कर उन्हें प्रणाम किया। जब वह झुकी, तो उसके माथे की लाल बिंदी और उसकी सूती साड़ी के आंचल से छलकती एक असीम ममता और नारीत्व की उस नैसर्गिक सुंदरता ने नित्यानंद की आँखों को … Read more

बुढ़ापे में माता-पिता लाचार हो जाते हैं

“पापा, मम्मी, आप दोनों जल्दी से अपना सामान समेट लीजिए। तीन बजे तक निकलना सही रहेगा। अगर और देर हुई तो एक्सप्रेसवे के ट्रैफिक में बुरी तरह फंस जाएंगे और रात हो जाएगी,” विकास ने अपनी कलाई घड़ी देखते हुए एक व्यापारिक लहजे में कहा। विकास की इस बात को सुनकर दीनानाथ जी का चेहरा … Read more

घर-घर की कहानी

सुनीता देवी अपनी इकलौती बेटी काव्या को लेकर पारिवारिक न्यायालय के बाहर बने काउंसलिंग सेंटर में बैठी थीं। उनके चेहरे पर गुस्सा, चिंता और एक अजीब सी जिद साफ झलक रही थी। उनके ठीक सामने वाली कुर्सी पर उनका दामाद रोहन और उसके माता-पिता खामोश बैठे थे। काव्या की आँखें सूजी हुई थीं, जैसे वह … Read more

सौतन

मान्या  पिछले कई दिनों से एक अजीब सी बेचैनी से गुजर रही थी। आठ साल की शादीशुदा जिंदगी में उसने कभी रोहन पर शक करने का कोई कारण नहीं पाया था। रोहन एक जिम्मेदार पति और उनके पांच साल के बेटे, आरव का बहुत प्यारा पिता था। दोनों की जिंदगी एक शांत नदी की तरह … Read more

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