समझौता – सीमा सिंघी
आंगन में धूप खिलाई थी। ऐसे भी जाड़े की धूप बड़ी भली लगती है इसीलिए ललिता जी अपने हाथों में एक प्याली चाय की लेकर बाहर खुले आंगन में लगी हुई सोफा पर आकर बैठ गई और इत्मीनान से पीने लगी। अब धीरे धीरे बालों की सफेदी ने भी उनसे थोड़ा बहुत आंख मिचौली का … Read more