एक नई शुरुआत
“मैं वहां खड़ा रहा, बुत बनकर,” अमन ने अपने आंसू पोंछते हुए कहा। “मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था। एक तरफ वो लोग थे जो बिना सोचे-समझे खाना फेंक रहे थे, और दूसरी तरफ वो मासूम जो उसी जूठन को अपनी ज़िंदगी मानकर खा रहे थे। ये कैसी दुनिया है नेहा? एक ही शहर … Read more