ममता की कोई सीमा नहीं। – मधु वशिष्ठ

जबसे नीता की शादी तय हुई है तब से उसके तो रंग ढंग ही बदल गए हैं।कभी बहुत खुश ,कभी उदास।  मन में 100 तरह के विचार उथल-पुथल मचाते रहते थे क्योंकि पति का घर सुदूर प्रदेश में था, इसलिए एक बार के बाद दूसरी बार मिलना तो ना हुआ और कभी बातें भी नहीं … Read more

बहु की समझदारी – खुशी

कमला एक घर में रहने वाली महिला थी जिसने घर में कुछ जोड़ना नहीं सीखा था।खाना घूमना नए कपड़े या फिर हर साल 3 महीने के लिए मायके जाना यही उसका शगल था।बहने समझाती भी दीदी जीजाजी की इतनी कमाई नहीं है थोड़ा बचाओ पर कमला चीड़ जाती इसलिए बहने भी कुछ नहीं कहती।पहले कमला … Read more

बेटी! ये तुम्हारे संस्कारों की परीक्षा है – सुदर्शन सचदेवा

“मम्मी, मैं ऑफिस के लिए लेट हो रही हूं… प्लीज़ आज आप पापा को दवाई दे देना,” रिया ने जल्दी-जल्दी बैग उठाते हुए कहा। “बेटा, मैं भी मंदिर जा रही हूं,” सासू माँ सावित्री जी ने शांत स्वर में जवाब दिया। रिया कुछ पल रुकी, फिर बिना कुछ बोले खुद ही पानी और दवाई लेकर … Read more

एक बहु की समझदारी – सुदर्शन सचदेवा

जयपुर के एक बड़े लेकिन शांत घर में सावित्री देवी अपने बेटे रोहन और बहु प्रिया के साथ रहती थीं। घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी, लेकिन सावित्री देवी के मन में एक डर हमेशा रहता था— “आजकल की बहुएं कहाँ बुज़ुर्गों को समझती हैं…” प्रिया शादी के बाद जब इस घर में … Read more

“ममता की कोई कीमत नहीं – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा

हम लोग दूसरे जगह शिफ्ट हो रहे थे l सारा सामान पैक हो चुका था….कुछ हो रहा था….गाड़ी दरवाजे पर लगी थी ताकि हमलोगों को जाने में देरी ना हो जाए l.   मैं बार -बार ताई को आवाज दे रहीं थी कि वो जल्दी से बिट्टू को दूध पीला दे…मुझसे वह ढंग से नहीं पी … Read more

बहु की समझदारी – मधु वशिष्ठ

पब्लिक डीलिंग वाले सरकारीऑफिस में  नीता ,शशि और मैं  एक कमरे में ही बैठते थे लेकिन फुर्सत के क्षण सिर्फ लंच ब्रेक में ही मिलते थे। कमरा बड़ा होने के कारण और सहकर्मी भी हमारे ही कमरे में लंच करने के लिए आते थे। मोहन जी और नितिन जी के सहकर्मी भी उसी कमरे में … Read more

बहू की समझदारी – रंजना गुप्ता

यह कहानी है एक ऐसे परिवार की, जहाँ संपत्ति और संपन्नता तो थी, लेकिन आपसी तालमेल और समझदारी की कमी थी। इस कहानी के केंद्र में है एक बहू, जिसने अपनी सूझबूझ, धैर्य और बुद्धिमत्ता से न केवल बिखरते हुए परिवार को संभाला, बल्कि सबको यह सिखाया कि असली समझदारी क्या होती है। ​सुंदरपुर गाँव … Read more

मां की ममता – खुशी

मां की ममता की कोई कीमत नहीं होती दीदी आपने मेरे बच्चों को सगी मां से बढ़कर प्यार दिया।ये तो बड़ी मामा करते नहीं थकते फिर आज ये बेरुखी क्यों ।भाभी मैं मानती हूं मेरी गलती है पर आपके प्रथम की शादी आपके बिना नहीं ही सकती आप नहीं आई तो ये रिश्ता टूट जाएगा।प्रथम … Read more

जीना सीखे – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू

आज ब्रेकरी की दुकान पर अचानक की मुलाकात ने रोमा का भ्रम दूर कर दिया ।रेखा की बातें सुनकर लगा कि इंसान की हिम्मत,साहस और धैर्य उसके जीवन को बदल सकता है ।उसका सोचना गलत था कि हम सफ़र के गुजरने के बाद उम्र बोझ लगने लगती है सब कुछ होने के बावजूद भी जिंदगी … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – मंजू ओमर

पापा आप तो आप खाली हो नौकरी से रिटायर हो चुके हो फिर क्यों सुबह-सुबह नहा धोकर तैयार होकर बैठ गए हो। आराम से उठिए इतनी जल्दी उठ कर सबको परेशान करने की क्या जरूरत है। आपके साथ-साथ मम्मी को भी सुबह उठना पड़ता है। हां बेटा सही कह रहा है लेकिन 40 साल नौकरी … Read more

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