भरोसा – मंजू ओमर

ये क्या दीदी ये कैसा व्यवहार करते है आप लोग ज्योति के साथ। मैंने तो आपको और आपके व्यवहार को देखकर आपके बेटे पंकज के लिए ज्योति का रिश्ता दिया था। मुझे नहीं पता था आप मेरे भरोसे को इस तरह तोड देंगी। वो तो मै न आती आपके घर तो मुझे पता ही न … Read more

बेटी यह तुम्हारे संस्कारों की परिक्षा है। – परमा दत्त झा

मां जीजाजी,-इससे आगे ट्विंकल बोल नहीं पाई और रोने लगी। क्या हुआ क्या किया रोहित ने?-मां ने आशंकित होकर पूछा। वे मेरे साथ अजीब व्यवहार करते हैं,माना कि मैं उनकी साली हूं मगर इसका क्या मतलब?-वह अपनी बात मां के सामने रखी। अच्छा,ऐसी बात है मां सब बातें समझ गयी।यह समस्या सुलझाना जरूरी है। मां … Read more

नई सोच – रश्मि वैभव गर्ग

सुम्मी …बुलाते थे सब उसको प्यार से। सुषमा नाम तो सिर्फ़ स्कूल में ही सुनती थी वह। अपने बहिन ,भाइयों में सबसे बड़ी होने की वजह से बचपन से ही ज़िम्मेदारी लेना उसके स्वभाव में ही आ गया था। पिता के यहाँ छोटा ही परिवार था  ,लेकिन उसको पारिवारिक तालीम अच्छी तरह से मिली थी।जैसे … Read more

“नहले पे दहला ” – कमलेश आहूजा

रमा बहुत क्रोधी और झगड़ालू स्वभाव की महिला थी।हर समय अपनी बहु से झगड़ा करती रहती थी,कभी काम को लेकर तो कभी दहेज को लेकर ताने देती रहती।बहु बेचारी बहुत सीधी थी कुछ नहीं बोलती और चुपचाप अपना काम करती रहती।रमा के पति रमेश जी बहुत सज्जन इंसान थे उन्हें रमा का इस तरह से … Read more

*एक बहु की समझदारी* – तोषिका

बधाई हो रमा जी, बधाई हो। ये रिश्ता पक्का हुआ, गले लगते हुए मीनू बोली। जी आपको भी बधाई हो , रमा बोली। मीनू का बेटा रमन उधर दूर खड़ा था। मीनू ने उसको बुलाया और कहा कि, “बेटा आकर अपनी होने वाली सास के पैर छू।” रमन का थोड़ा मुंह बना पर वो आ … Read more

बहू की समझदारी – अरुणा गर्ग

सुनैना का तीन महीने पहले ही विवाह हुआ था।वह एक सामान्य किन्तु खुली विचारों वाले परिवार की बेटी थी। उसने अपने मायके में अपनी मां को हमेशा परिवार में रहकर भी अपनी अलग पहचान बनाते देखा। वहीं पिता भी बहू बेटी को समान मानते।वह उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वह अपने ससुराल में भी सबके … Read more

समझदारी – करुणा मलिक

चाँदनी ! इस तरह रोज बहसबाजी करके बैग उठाकर चले आने का क्या तुक है?  मैंने तो पहले ही कहा था कि मुझसे किसी की हाँ में हाँ नहीं मिलाई जाएगी पर आपको तो मेरी शादी की जल्दी पड़ी थी।  बेटा, हाँ में हाँ मिलाने की क्या बात है….. अमन ने कौन सी गलत बात … Read more

बेटी यह तुम्हारे संस्कारों की परीक्षा है। – मधु वशिष्ठ

गॉलब्लैडर के स्टोन का ऑपरेशन करने के लिए प्रिया की सास हॉस्पिटल में एडमिट थी| प्रिया की शादी हुए अभी 8 महीने भी नहीं हुए हैं और शादी के बाद प्रिया 8 दिन भी रहने के लिए नहीं आई यूं मिलने के लिए तो है जब मर्जी आ जाती थी। प्रिया की शादी के बाद … Read more

एक बहू की समझदारी – निभा राजीव “निर्वी”

सौम्या ने फोन पर नर्म स्वर में अपनी ननद वर्षा को समझाने का प्रयास कर रही थी,”- देखो वर्षा, पति-पत्नी में तो ऐसे छोटे-छोटे नोक झोक होते ही रहते हैं लेकिन बात को इतना बढ़ाना नहीं चाहिए। शांति दिमाग से चीजों को सोचो समझो और उन्हें सुलझाने का प्रयास करो। उसकी बात पर उधर से … Read more

“आधुनिक दुनिया में संस्कार” – तृप्ति देव

नेहा एक मध्यमवर्गीय परिवार की समझदार और संस्कारी लड़की थी। उसके घर में बचपन से ही अच्छे संस्कारों का वातावरण था। दादी हमेशा उसे समझाती थीं—  “बेटी, जिंदगी में कितनी भी आधुनिक बन जाना, लेकिन अपनी मर्यादा और आत्मसम्मान कभी मत खोना।” और अपने संस्कार बहुत मूल्यवान होते हैं जहां अच्छे संस्कार होते वहां पर … Read more

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