सच्चाई का स्पर्श

मैंने बहुत कम उम्र में ही दुनिया का असली चेहरा देख लिया था। मैंने अपने हक के लिए लड़ना सीखा है। अगर कोई मुझसे तेज आवाज में बात करता है, तो मैं चुप होकर रोने वाली लड़की नहीं हूं, मैं पलटकर जवाब देती हूं। मेरे व्यवहार में एक तरह का कड़कपन है, जो असल में … Read more

ममता की बगावत

“अब यह मेरे साथ रहेगा!” मीरा ने कबीर को गोदी में उठाते हुए एक सख्त आवाज में कहा। “तू इसे कहीं नहीं ले जा सकती! मैं पुलिस बुला लूंगा! तुझे जेल भिजवा दूंगा, चरित्रहीन औरत!” राहुल ने चिल्लाते हुए मीरा का हाथ पकड़ने की कोशिश की। मीरा ने राहुल का हाथ झटक दिया और उसकी … Read more

विश्वास घात – लक्ष्मी कनोडिया ‘अनिका’

दिल्ली की भीड़भरी गलियों में रहने वाली बाईस वर्ष की नंदिनी अपने घर की सबसे छोटी बेटी थी। घर में सबसे छोटी होने के कारण उसे हमेशा बहुत लाड़-प्यार मिला था। माता-पिता और बड़े भाई-बहनों ने कभी उस पर घर की बड़ी जिम्मेदारियाँ नहीं डालीं। उसका जीवन पढ़ाई, खेल-कूद, सहेलियों और अपनी छोटी-सी दुनिया में … Read more

परछाईयों की तलाश – अनीता रवि

ऐसे लगता है जैसे सारी मनौतियाँ पूरी करने कर के गंगा नहा आई हूँ या हज से लौटी हूँ या पवित्र रोमनगरी से हो आई हूँ  । शब्‍दों के धागे जैसे मन की भावनाओं को गूँथ ही नहीं पा रहे । बस महक रही हूँ मैं अखंड तृप्ति के फूलों की सुगंध से । विश्‍वास … Read more

विश्वासघात – मधु वशिष्ठ

तनु धीरे-धीरे थाने के अंदर  गई और वहां बैठे पुलिसकर्मी से अपनी एफआईआर लिखने के लिए कहा। थाने में उसकी अतिरिक्त बहुत से लोग बैठे थे तभी वहां पर घूमती एक महिला पुलिसकर्मी  ने कहा आप अपनी  रिपोर्ट पीछे वाली टेबल पर बैठी महिला पुलिसकर्मी को लिखवाइए। तनु वहां पर गई , उसकी आंखें आंसुओं … Read more

कच्चे धागे – एम. पी. सिंह

पूनम की डोली ससुराल पहुची, वो बहुत खुश थी। परिवार में ननद और ससुर के अलावा कोई नहीं था। पति अंगद की अच्छी नोकरी थी। सब ठीक चल रहा था, ओर जल्दी ही वो पति औऱ ससुर की चहेती बन गई। परंतु पूनम की ननद बिमला ज्यादा घुल मिल नहीं रही थीं।  उसे भाभी की … Read more

बहू की विदाई – शुभ्रा बैनर्जी

बचपन से जानती थी सुषमा मधु को।मधु ,सुषमा की सहेली की इकलौती बेटी थी।सुषमा और सविता(मधु की मां)का मायका एक ही कस्बे में था।दोनों ने बारहवीं कक्षा तक साथ में ही पढ़ाई की थी।सुषमा का ब्याह कॉलेज पूरा होते ही शहर में रहने वाले सरकारी नौकरी में कार्यरत एक क्लर्क से हो गई।सविता ज्यादा पढ़ … Read more

त्याग की मूरत और स्वार्थ का आईना

शहर की चकाचौंध और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच, माधव अपनी पत्नी कामिनी और सात साल की बेटी रिया के साथ एक आलीशान फ्लैट में रहता था। माधव ने अपने जीवन में बहुत तरक्की की थी। एक साधारण से घर से निकलकर उसने अपनी एक अच्छी खासी कंस्ट्रक्शन कंपनी खड़ी कर ली थी। इस सफलता … Read more

ससुराल की देहरी और मायके का आँगन: एक अनकही सच्चाई

अलार्म की तीखी आवाज़ ने काव्या की नींद तोड़ दी। उसने फोन की स्क्रीन पर समय देखा—सुबह के साढ़े पाँच बज रहे थे। नवंबर की हल्की ठंड में रजाई से बाहर निकलने का बिल्कुल मन नहीं था, लेकिन रसोई की जिम्मेदारियां उसे पुकार रही थीं। काव्या की शादी को अभी महज़ आठ महीने ही हुए … Read more

ज़िंदा लाश: एक बहन का खौफ़नाक इंसाफ़

अदालत के उस विशाल और शांत कमरे में आज एक अजीब सा सन्नाटा पसरा था। यह सन्नाटा किसी डर का नहीं, बल्कि एक स्तब्ध कर देने वाले सच का था। कटघरे में अट्ठाईस वर्षीय देविका खड़ी थी। उसके चेहरे पर न तो कोई पछतावा था, न कोई खौफ और न ही किसी तरह की घबराहट। … Read more

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