बधाई हो रमा जी, बधाई हो। ये रिश्ता पक्का हुआ, गले लगते हुए मीनू बोली। जी आपको भी बधाई हो , रमा बोली।
मीनू का बेटा रमन उधर दूर खड़ा था। मीनू ने उसको बुलाया और कहा कि, “बेटा आकर अपनी होने वाली सास के पैर छू।” रमन का थोड़ा मुंह बना पर वो आ गया, उधर दूसरी तरफ रमा के बिना कहे ही उनकी बेटी कियारा आशीर्वाद लेने आई।
*३ महीने बाद*
रिश्ते की मिठास पहले से ही कम थी और अब तो पूरी फीकी हो चली थी। रमन, कियारा से बात तो करता था पर अपने से दूर भी रखता था। साथ ही में अपनी मां से तो बात ही नहीं करता था। शुरू शुरू में कियारा को बस ये एक छोटी सी अनबन लगती थी। एक दिन कियारा ने कुछ ऐसा सुना, जिससे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
एक रात कियारा की आँख खुली और उसको अपनी सास मीनू के कमरे से रमन की चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी। उसने रमन को कहते सुना “आपने मेरी तो जो जिंदगी बर्बाद की थी वो अलग, साथ में आपने कियारा की भी ज़िंदगी बर्बाद कर दी। सब कुछ जानते हुए भी आपने ऐसा किया। मुझे आप पर अब जरा सा भी भरोसा नहीं है।”
तभी मीनू अपनी स्थिर आवाज में बोली “मैने जो भी किया, तुम्हारे भले के लिए ही किया है। तुम अभी समझ नहीं पा रहे हो, पर मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हे अपनी गलती का एहसास होगा।”
इससे पहले कोई देखे, कियारा अपने कमरे जा कर लेट गई, और ये विचार करने लग गई कि ऐसी कौन सी बात है जिसके चलते मां और बेटे के बीच लड़ाई हो रही है। एक समझदार बहु की तरह उसने खुद ही इन रिश्तों की उलझी गांठों को सुलझाने की ठानी।
पर उसको समझ नहीं आ रहा थी कि वो इस गांठ को खोलना कहा से शुरू करे।
पहले वो मीनू के पास गई और बोली “मां, आप ठीक है? थोड़ी परेशान सी लग रही है आप।”
मीनू बोली “हां बेटा सब ठीक है, ज़रा स सर में दर्द है, मेरे लिये एक अदरक वाली चाय बना दो।”
जी मां अभी लाई, कहकर कियारा रसोई में चली गई।
कुछ देर बाद को चाय का कप लेकर आई और वो ही बैठ गई, मीनू के सिर की मालिश करने के लिए।
उसने ऐसे ही बातों बातों में पूछा “माँ सब ठीक है ना? आज आप और रमन दोनों परेशान लग रहे थे। हां सब ठीक है।
मीनू कुछ देर ऐसे ही सोच विचार के रही थी कि उसने कियारा को सब कुछ बताने का सोचा।
उसने गहरी सांस ली और बोला “कियारा बेटा, मुझे तुम्हे कुछ बताना है, तुम समझदार हो, मैं ये बात जानती हू।”
कियारा बोली “मां आप बेझिझक बोलिये, मैं सुन रही हू”।
मीनू बोली “बेटा दरअसल बात ये है कि रमन एक लड़की से बहुत प्यार करता था और दोनों काफी समय से साथ भी थे, जब रमन ने मुझे उस लड़की से मिलवाया तो ना जाने मेरा मन बेचैन सा होने लग गया था, पर इधर रमन की आंखों पर प्यार की पट्टी बंधी हुई थी, इसीलिए उसको कुछ नहीं दिख रहा था। वो बस यही रट लगाए बैठा था कि शादी करेगा तो उसी से करेगा वरना भाग जाएगा। अब अपने बेटे के लिए मां का मन कैसे ना पिघलता पर मेरा दिमाग अभी भी उनके रिश्ते को स्वीकार नहीं कर रहा था। अपने दिमाग की तसल्ली के लिए मैने उस लड़की की सारी जानकारी निकलवाई।”
कियारा ने पूछा “फिर क्या हुआ मां? आपको जिसका डर था वो ही हुआ?”
मीनू बोली “हां, वो बस ऐसे ही एक जालसाज थी, जो मेरे बेटे को पैसों के लिए फसा रही थी। मेरा बेटा कोई गलती ना कर बैठे, इसीलिए उसकी मैने जबरदस्ती शादी कराई ये कह कर कि वो उसे छोड़ कर चली गई है, बल्कि सचाई ये थी कि मैने उसका सच पुलिस को दिखा कर गिरफ्तार करवा दिया था, पर चाहकर भी मैं ये सच अपने बेटे को ना बता सकी, क्योंकि मैं उसका दिल नहीं तोड़ना चाहती थी।
फिर मुझे तुम मिली, और मुझे लगा मेरे बेटे के लिए तुम सबसे सही हो, बेटा मुझे माफ करदो”
कियारा ने कुछ देर सोचा और बोली “मां मैं समझ सकती हू, एक मां अपने बेटे को बचाने के लिए कुछ भी कर सकती है। मैं आपकी मदद करूंगी।”
अगले दिन कियारा ने सारे सबूत रमन की दफ्तर वाली फाइल में डाल दिए ताकि उसको सच्चाई पता चल जाए। रमन ने जब वो देखा तो उसके पैरों तले जमीन ही खिसक गई। वो फौरन घर आया और अपनी मां को वहां सोफा पर बैठा देख बोला “मां, मुझे माफ करदो, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। कियारा, प्लीज तुम भी मुझे माफ करदो।”
ये बोलते ही उसने दोनों को गले लगा लिया और उधर मीनू अपने मन में भगवान को धन्यवाद करते हुए बोली “*एक बहु की समझदारी*” ने मेरा घर और विश्वास दोनों ही टूटने से बचा लिए।
लेखिका
तोषिका