समझदारी – करुणा मलिक

चाँदनी ! इस तरह रोज बहसबाजी करके बैग उठाकर चले आने का क्या तुक है? 

मैंने तो पहले ही कहा था कि मुझसे किसी की हाँ में हाँ नहीं मिलाई जाएगी पर आपको तो मेरी शादी की जल्दी पड़ी थी। 

बेटा, हाँ में हाँ मिलाने की क्या बात है….. अमन ने कौन सी गलत बात कह दी, यही तो कह रहा है कि सुबह उठने के बाद दादी के कमरे में जाकर नमस्ते बोल दिया कर….. 

ना मम्मी,  नियम – कानून में मुझसे नहीं बंधा जाएगा । कल को कहेंगे कि पाँच बजे उठकर नहा लो फिर कहेंगे कि दादी के पैर दबाकर  सोया करो….. और मैं बेचारी बनकर हाँ में हाँ मिलाती जाऊँ….. सारी जिंदगी, उफ्फ्फ….. वैसे आपने इस परिवार में कौन सी खूबी देखी, शादी के लिए पीछे पड़ गए थे। 

चाँदनी! देखा भाला लड़का है तुम्हारे फूफाजी का, बड़ा बिजनेस है, खानदानी लोग हैं, बहू- बेटियों का सम्मान करते हैं और क्या चाहिए । तुम्हें अंदाजा नहीं कि आजकल अच्छे लड़के मिलना कितना मुश्किल है। 

पूनम अपनी बेटी चाँदनी को समझाती रह गई और वह अपने पैर घसीटते हुए अपने कमरे की तरफ चली गई। 

चाँदनी की शादी को मुश्किल से दो महीने हुए थे और वह तीसरी बार अपने पति अमन से बहस करके अपने मायके आई थी। 

शादी का पहला महीना तो घूमने-फिरने और रस्मों- रिवाजों को निभाने में ही निकल गया था, दूसरे महीने में तीसरी दफा लड़की आई है। पूनम मन ही मन चिंतित थी कि अगर ननदोई जी का फोन आ गया तो कैसे सामना करुँगी…. वो तो अच्छा है कि बेटे की शादी के बाद अमन के माता-पिता अपनी बेटी के साथ कुछ दिनों के लिए आस्ट्रेलिया चले गए, बड़े जेठ-जेठानी अहमदाबाद के बिजनेस को सँभालने के लिए वहीं रहते हैं और छोटा देवर अभी लंदन में पढ़ रहा है वरना सारी रिश्तेदारी में बात फैल जाती। घर में बेहद समझदार और सुलझी हुई दादी सास थी, जो चलने फिरने में असमर्थ थी। 

सास-ससुर क्या गए, चाँदनी तो पूरी आजाद हो गई। वह ना तो रसोई में जाकर झाँकती, ना दादी के पास….. दादी नौकरों के हाथ दस संदेशे भेजती…. इंटरकाम पर काल करती, तब चाँदनी बड़ी मुश्किल से चेहरा दिखाती। 

पूनम को समझ नहीं आ रहा था कि बेटी को कैसे समझाए। वह विचारों की उधेड़बुन में फँसी थी तभी मोबाइल की आवाज से उसका ध्यान भंग हुआ, अमन की दादी का फोन था —

हाँ,  पूनम बेटा…. कैसी हो? वो पता चला कि चाँदनी तुम्हारी तरफ गई है…. ठीक है ना सब? 

जी… जी माँ जी, सब ठीक है। दरसल चाँदनी की एक बचपन की सहेली उसकी शादी में नहीं आ पाई थी…. बस उसी से मिलने……. 

पूनम ने बड़ी सफाई से झूठ बोलकर बात सँभालने की कोशिश की। 

मैं अक्सर नाश्ते के बाद दवाई खाकर सो जाती हूँ, अमन फोन नहीं उठा रहा और घर के नौकरों से चाँदनी के बारे में पूछना ठीक नहीं लगता….. 

आप चिंता ना करें, वो शाम तक आपके पास आ जाएगी। 

इधरउधर की बात करने के बाद पूनम ने फोन रख दिया। काफी देर सोच विचार करने के बाद उन्होंने चाँदनी से बात करके उसे समझाने का प्रयास किया पर चाँदनी इसी बात पर अटकी रही कि अमन बेहद पुराने ख्यालों का है, उसके साथ गुजारा नहीं हो सकता।

जैसे-जैसे शाम हो रही थी, पूनम की धड़कन तेज  हो रही थी, माँ जी को कह तो दिया था कि शाम को चाँदनी पहुँच जाएगी पर यह तो मानने को तैयार नहीं। पूनम का दिल किया कि माँ जी को फोन करके कहें कि अमन को भेज दें पर नई-नई रिश्तेदारी थी इसलिए संकोच के मारे वह फोन नहीं कर पाई। 

अगले दिन दोपहर को अमन की दादी का फोन आया तो पूनम ने सिर्फ यही कहा कि चाँदनी दो- चार दिन रहना चाहती है ……

हाँ…तो बेटा, कोई बात नहीं….भेज देना दो- चार दिन बाद…बाकी कोई परेशानी तो नहीं है चाँदनी को यहाँ?

नहीं माँजी, इतने अच्छे परिवार में भला क्या परेशानी हो सकती है….

फोन रखने के बाद पूनम सोचने लगी कि कैसे बताऊँ….मेरी यह नालायक लड़की आपको सबसे बड़ी परेशानी मान रही है।

उसके बाद दो महीने गुजर गए पर चाँदनी ने जाने का नाम ही नहीं लिया। दादी के कई फोन आए पर पूनम ने उनके सामने यही कहा कि पता नहीं, चाँदनी और अमन के बीच क्या हुआ….

चाँदनी को मायके में डटा देख लोग भी बात करने लगे–

शादी हमेशा बराबर वालों में करनी चाहिए, बेचारी चाँदनी, तालमेल नहीं बिठा पाई….. माँ  की गलती है , बड़ी पार्टी देखकर लालच में आ गई । 

क्या पता, लडके में कोई खोट हो वरना चाँदनी जैसी साधारण लड़की से भला कैसे शादी करते? 

अमन के माता-पिता भी अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर देश लौट आए। पूनम के ननद -ननदोई भी खफ़ा थे —

हद हो गई… जो इतने भले लोगो ं के साथ भी नहीं निभा सकती तो कहीं गुजारा नहीं हो सकता इस लड़की का, वो तो भाग्य ने जोर मारा था जो रिश्ते की बात हुई थी वहाँ….. वरना हमारे जैसों की क्या औकात भला….. 

पूनम सबकी बातें सुनती…. कहे भी तो क्या, गलती तो सारी चाँदनी की थी जिसने छोटी सी बात का हव्वा बना दिया था। 

आज पूनम को अपने दिवंगत पति से ज्यादा बेटे चिराग की याद आ रही थी। पूरे छह साल हो चुके थे… चिराग को देखे, अगर उसने अपने दोस्त की विधवा बहन और एक बच्ची की माँ से शादी ना की होती तो आज हम सब साथ होते…. और शायद चाँदनी को माँ से अधिक बड़ा भाई समझा पाता…… वैसे चिराग ने तो कई बार कोशिश की घर आने की, बात करने की…. पर उसने कोमल को स्वीकार न करने की कसम खा ली थी और कुछ महीनों बाद चिराग कोमल को लेकर कनाडा चला गया था। उसने तो चाँदनी के विवाह की खबर भी नहीं दी थी। 

ख्यालों में खोई पूनम की आँखों से आँसू बह निकले, ना बेटे का सुख नसीब हुआ, ना बेटी का। मैं तो इन्हें जन्म देकर पालने पोसने के लिए ही आई थी दुनिया में……. तभी पूनम की नजर अपने बजते मोबाइल पर पड़ी…. एक अनजान नंबर था। उसका बिलकुल भी मन नहीं था किसी से बात करने का….. पर फोन था कि चुप होने का नाम ही नहीं ले रहा था। चार-पाँच बार बजने के बाद दो मिनट के अंतर पर फोन फिर बजने लगा….. अब पूनम को लगा कि शायद किसी को कोई खास काम है, तभी तो बार-बार काॅल कर रहा है। फोन उठाते ही आवाज़ खनकी–

मम्मी जी, प्लीज फोन मत काटना, मैं कोम…… 

और इतना सुनते ही पूनम ने फोन काट दिया। फोन दुबारा बजने लगा….. अब पूनम को लगा कि कहीं मेरे चिराग को तो कुछ नहीं हो गया, क्यों यह लड़की बार-बार फोन कर रही है। 

चिराग कैसा है….. कैसा है मेरा बेटा…… 

मम्मी जी, चिराग एकदम ठीक है हम कल रात ही आपके पोते के बाल कटवाने के लिए इंडिया आए हैं…..  अभी यहाँ रेलवे के गेस्टहाउस में रुके हैं….. मुझे पता है कि गाँव के आश्रम में दादी की गोद में बिठाकर पोते के पहले बाल कटवाने की प्रथा है। मुझे पूरा विश्वास है कि आप अपने चिराग के बेटे को उसके हक से वंचित नहीं करेंगी। हम कल शाम तक रेलवे स्टेशन पर आपका इंतज़ार करेंगे वरना कल रात मुंबई चले जाएँगे, वहाँ चिराग की एक कानफ्रैंस है और उसके बाद कनाडा, आगे आपकी मरजी। 

पूनम मन ही मन अपने पोते की खबर सुनकर खुश हो उठी । उनका दिल कर रहा था कि चिराग को खूब डाँटे…. अपने ही शहर में आकर गेस्टहाउस में रुका है, पर मन के किसी कोने से सच्चाई भी सुनाई दे रही थी….. मन कह रहा था कि अभी अपने बच्चों को फोन करके बुला लें पर अहम बीच में आ रहा था। पूनम ने चाँदनी से जिक्र किया पर उसकी तरफ से ठंडा सा जवाब आया–

छोड़ो मम्मी, पहले ही क्या…. कुछ कम परेशानी हैं जो दूसरी परेशानियों को पकड़ लें। अब हम अपनी जिंदगी में खुश है और वे अपनी….. 

आखिर उन्होंने अपने दिल की आवाज सुनी और उसी नंबर पर फोन करके कहा—

मेरे बेटे से बात करवाओ…….

मम्मी जी, चिराग तो कुछ खाने-पीने का सामान खरीदने शहर की तरफ गए हैं और भारती…. आइ मीन आपकी पोती के लिए कुछ मेडिसिन लेनी थी, उसे रास्ते में बुखार हो गया था….. मैं चिराग के आते ही बात करवा दूँगी….. अच्छा दो सेकेंड,  मैंने उसका नंबर भेज दिया है अगर चाहे तो बात कर सकती हैं। 

अपने फोन पर बेटे का नंबर देखकर पूनम के मन में एक हूक सी उठी और उसने तुरंत काॅल कर दी —

मम्मी….. 

बरसों बाद बेटे की आवाज सुनकर पूनम का गला भर आया। अपनी आवाज न निकलती देख पूनम ने रोते हुए वायस रिकॉर्ड किया—

बे…टा.. चिराग, बच्चों को लेकर अभी घर आओ। 

इतना कहकर उसने फोन रख दिया और तुरंत रसोई में जाकर मटर मेथी की सूखी सब्जी तथा कढ़ी-चावल बनाने की तैयारी करने लगी। रेलवे स्टेशन से कम से कम घर पहुँचने में एक- डेढ़ घंटा तो लगेगा ही…. तब तक खाना बन जाएगा। 

चाँदनी…. ओ चाँदनी, चिराग बच्चों और बहू को लेकर घर आ रहा है, उसका कमरा देख ले जरा…. और हाँ, बेटा आरती की थाली भी तैयार कर देना। मेरे चिराग की फैमिली पहली बार आ रही है। 

आप ठीक है ना मम्मी….. आप तो कहती थी कि आपके जीते जी भैया इस घर में नहीं आएँगे…. 

जब भी मुँह खोलेगी कुछ न कुछ उलटा ही बोलेगी…. सालों बाद भाई के आने की खुशी नहीं हुई, मुझसे बहस कर रही है…. जो काम कहा है… जल्दी कर….बहस कर करके अपना तो घर बिगाड़ बैठी है….

बस मम्मी…. इस बात का जिक्र करने की जरूरत नहीं…. खास तौर पर अपनी प्यारी बहू के सामने…. 

मन की उड़ान के साथ पूनम के हाथों में भी गजब की फुरती आ गई थी। उसने पूरे एक घंटे में सारा खाना तैयार कर दिया । बार-बार फोन उठाकर चेक करती कि कहीं कोई काॅल तो मिस नहीं कर दी या कोई मैसेज तो नहीं आया। 

तकरीबन दो – ढाई घंटे के इंतज़ार के बाद टैक्सी के रुकने की आवाज आई और पूनम का दिल धड़कने लगा। 

मम्मी… भैया आ गए हैं…. 

और हमेशा की तरह चिराग ने पूनम को दोनों हाथों से उठाकर घुमा दिया–

आपने वजन बढ़ा लिया…. मम्मी। 

उतार मुझे…. इतना बड़ा हो गया पर बचपना नहीं गया। 

पूनम ने आँखों में आए आँसुओं को पोंछते हुए कहा और कोमल तथा उसकी बेटी के सिर पर हाथ रखकर अपने पोते को गले से लगा लिया, खूब प्यार किया।। 

दो दिन में ही पूरा घर बच्चों की किलकारियों से गूंज उठा पर इस बीच चाँदनी खुद को अलग-थलग महसूस कर रही थी। वह देख रही थी कि कोमल ने दो ही दिन में मम्मी के दिल में काफी जगह बना ली थी। कोमल का सुबह उठते ही मम्मी के पैर छूना, भारती का दादी-दादी और बुआ-बुआ कहते हुए पीछे-पीछे घूमना, मम्मी को  एक- एक गरम रोटी खिलाना…….. चाँदनी को सब दिखावा लग रहा था। एक दिन सुबह मम्मी के सिर में तेल लगाती कोमल को देखकर चाँदनी कह बैठी —

बस भी करो…. बटरिंग की भी हद होती है…. 

चाँदनी, ये किस तरह अपनी बड़ी भाभी से बात कर रही हो… चाहे तुम मुझे पुराने जमाने की कहो या नए की…. पर बड़ों की इज़्ज़त का ख्याल रखना। 

और इन तीन-चार दिनों में पूनम और कोमल में इतनी निकटता हो गई थी कि दोनों ने अपने अच्छे-बुरे अनुभवों को एक- दूसरे के साथ साझा कर लिया था। चाँदनी चुपचाप देख रही थी कि कनाडा में रहने के बावजूद भी कोमल हर रिश्ते को कितने दिल से निभाती है। आज न जाने क्यों…… चाँदनी को अमन और अपने घर की याद आ रही थी, वह खुद से बहुत कुछ छिपाने का प्रयास कर रही थी। 

चिराग ने अपने जाने की डेट भी चेंज करवा ली थी। अब वे पूनम को साथ ले जाने की प्लानिंग कर रहे थे। इसी बीच पूनम ने बच्चों के आने की खुशी में हवन करवाने की सोची —

चिराग! इस बहाने सबसे मिलना भी हो जाएगा और पोते के होने की खुशी में थोड़ा नेग का लेन-देन भी कर लूँगी…. ये मेहमानों की लिस्ट देख लो….. 

मम्मी, चाँदनी के ससुराल वालों का नाम तो सबसे ऊपर होना चाहिए था…. 

किस मुँह से बुलाऊँ….. चाँदनी के बिना उनसे कैसा रिश्ता… 

नहीं मम्मी जी, मैं और चिराग खुद उनसे मिलकर कार्ड देकर आएँगे…. क्या पता? आमने- सामने होने पर चाँदनी अपनी गलती स्वीकार कर ले…. 

चिराग, एक बार उससे बात कर ले कहीं ऐसा ना हो कि चाँदनी को ठीक ना लगे…. 

मौका देखकर अगले दिन चिराग ने चाँदनी से अमन के परिवार को हवन के लिए बुलाने की बात कही पर चाँदनी ने ना तो विरोध किया और ना ही सहमति दी। 

पूनम चाँदनी की चुप्पी को महसूस कर रही थी, वह देख रही थी कि कोमल के स्वभाव ने कहीं न कहीं चाँदनी पर प्रभाव डाला है। 

 हवन के दिन चाँदनी ने खूब अच्छे से श्रृंगार किया। बार-बार दरवाजे पर जाकर बाहर की तरफ देखना और मोबाइल चैक करना….. सब शुभता की तरह इशारा कर रहे थे। जब अमन के माता-पिता के आने पर चाँदनी ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया तो पूनम की खुशी का ठिकाना न रहा। सबकी नजर बचाकर कोमल ने अमन की दादी को फोन मिलाया —

माँ जी, आज और अभी किसी भी तरह अमन को यहाँ भेज दीजिए, बड़ी शुभ घड़ी है… कहीं टल ना जाए। 

चिंता मत कर बेटा…. अमन थोड़ी देर में तुम्हारे पास होगा। 

सचमुच कुछ देर बाद अमन को अचानक देखकर सबकी खुशी का ठिकाना न रहा। 

और जब भोजन इत्यादि के बाद मेहमानों के जाने की बारी आई …. तो चाँदनी ने अचानक कोमल का हाथ पकड़ कर कहा—

भाभी, मैं भी अमन के साथ जाना चाहती हूँ, क्या आप हेल्प कर देंगी….. 

चाँदनी, आज तुम्हें खुद की हेल्प करने की जरूरत है और अपनी गलती मानना छोटे होने की निशानी नहीं है। 

तभी चाँदनी कमरे में बैठे अपने सास-ससुर, अमन,माँ तथा भाई के पास गई–

आइ एम साॅरी अमन, मैं अपनी सारी गलतियों के लिए माफी माँगती हूँ, क्या तुम मुझे मेरे बचपने के लिए माफ कर दोगे? 

अरे… बेटा, क्यों माफ नहीं करेगा….. कुछ गलती मेरी भी है। मुझे तुम्हें अकेली छोड़ कर नहीं जाना चाहिए था, नए घर के तौर तरीके सिखाना मेरी जिम्मेदारी थी। 

रात को कमरे में बैठी पूनम के लिए कोमल दूध देने आई तो उसने कोमल को अपने पास बैठाते हुए कहा—

बेटा, मुझे भी माफ कर दो…. इतने सालों तक तुम मेरे कारण अपने घर से दूर रही, पर तुमने साबित कर दिया कि # एक बहू की समझदारी से किस तरह मुरझाए फूलों की बगिया खिल उठती है। 

करुणा मलिक 

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