टूटे धागे, मजबूत इरादे

नौ साल एक लंबा अरसा होता है, इतना लंबा कि किसी गहरे घाव पर वक्त की चमड़ी चढ़ जाए, पर अंदर की कसक पूरी तरह कभी खत्म नहीं होती। जब अवंतिका की गाड़ी “शांति कुंज” के बड़े से लोहे के फाटक के सामने रुकी, तो उसके हाथ खुद-ब-खुद स्टीयरिंग व्हील पर कस गए। पतझड़ के … Read more

ममता की धूप और भोर की नई किरण

 आज राघव के बत्तीसवें जन्मदिन पर जब वे लड्डू बाँट रही थीं, तभी आश्रम के बाहर एक चमचमाती बड़ी गाड़ी आकर रुकी। गाड़ी का दरवाजा खुला और उसमें से राघव उतरा। उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ रही थीं, कपड़े अस्त-व्यस्त थे और आँखों में गहरा पछतावा था। आश्रम के लोगों में कानाफूसी शुरू हो गई। … Read more

स्वाभिमान की दहलीज

वंदना ने आगे बढ़कर तुरंत अपने पिता के कंधे थामे और उन्हें जबरन सीधा खड़ा किया। उसके चेहरे पर गुस्से की जगह एक असीम गरिमा और दृढ़ता थी। उसने अपने आंचल से पिता के आंसू पोंछे और कहा, “पिताजी, जिन पैरों ने मुझे सीधे खड़े होकर सच की राह पर चलना सिखाया, वे पैर आज … Read more

बस बहुत हो गया – सीमा सिंघी

सुबह के दस बज चुके थे राजी के कॉलेज का वक्त हो चला था मगर फिर भी राजी घर पर ही थी। उसे कॉलेज नहीं जाते देखकर रोहिणी जी पूछ बैठी । अरे राजी बिटिया….  आज कॉलेज नहीं जाना?? क्या कोई छुट्टी है??  राजी अपनी मां की बात सुनकर अनमने मन से बोल बैठी। मम्मी … Read more

वक्त का पहिया – सीमा सिंघी

घड़ी का कांटा नौ पर पहुंच चुका था। रागिनी अपने काम जल्दी-जल्दी निपटाने में लगी हुई थी इसीलिए राज को और दोनों बच्चों को टिफिन देकर विदा किया और खुद भी नाश्ता लेकर बैठ गई और फिर नाश्ते के बर्तन सिंक में डाले और जल्दी-जल्दी हाथ चलाने लगी । रसोई का काम निपटाकर रागिनी ऑफिस … Read more

“फर्स्ट रैंक”- श्वेता अग्रवाल

छवि जैसे ही स्कूल के लिए निकलने लगी, उसकी माँ ने उसे रोकते हुए कहा, “छवि टिफिन तो लेकर जा। इतनी बड़ी हो गई लेकिन ध्यान ही नहीं रहता।” ये सुनकर छवि हँसते हुए उनके गले में झूल गई, “मम्मा, ध्यान मुझे नहीं बल्कि आपको नहीं रहता।” “क्या मतलब?” “मतलब ये भाग्यवान कि तुम भूल … Read more

जलन – खुशी

निशा और सिया दो चचेरी-तहेरी बहनें थीं। दोनों बचपन से ही साथ पली-बढ़ी थीं, लेकिन दोनों के स्वभाव और गुणों में बहुत अंतर था। निशा साँवली-सलोनी, समझदार, मेहनती और गुणी लड़की थी। पढ़ाई में वह बहुत तेज थी और हमेशा अच्छे अंक प्राप्त करती थी। घर के कामों में उसकी बहुत अधिक रुचि नहीं थी, … Read more

जेठानी – निभा राजीव “निर्वी”

जैसे ही नववधू अंकिता ने मीनल के पैर छुए उसने पुलकित होकर उसे खींचकर हृदय से लगा लिया। वह बेहद प्रसन्न थी आज! और होती भी क्यों नहीं, नववधू के पदार्पण के साथ ही उसे जेठानी की पदवी जो प्राप्त हो गई थी। उसने मुंह दिखाई में सुंदर से कान के बुंदे देवरानी के हाथों … Read more

जलनखोर – गीता वाधवानी

” आज चलो ना अविनाश मम्मी पापा से मिलने” श्रुति ने प्यार से मनुहार करते हुए अविनाश से कहा।   अविनाश-” आज नहीं, कल आऊंगा और वो भी अपने मम्मी पापा को साथ लेकर कल ठीक रहेगा क्योंकि कल रविवार है। ”   श्रुति-” सच्ची, सच कह रहे हो ना तुम? ”   अविनाश-” हां बाबा बिल्कुल सच्ची, … Read more

ये न कहना – डॉ. कविता विकास

काम रोज़ की तरह चल रहे थे लेकिन मन में उत्साह नहीं था। मेहमानों से भरे – पूरे घर में भी एक ख़ालीपन धर गया था। मैं भिंडी काट रही थी कि लगा कोई पीछे से कह रहा है,”फिर आज इतनी देर लगा दी,सब्ज़ी बनी नहीं अभी तक,मैं क्या खा कर जाऊँगी?कॉलेज का समय हो … Read more

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