अपनो का साथ – मंजू ओमर

तुम रो क्यों रही हो मुक्ता क्या हुआ है ,और यह किससे बातें कर रही थी अभी फोन पर । वह पापा से बात कर रही थी मैं ,,तो क्या हुआ पापा से बात कर रही थी तो रोने की क्या बात है मयंक बोला । वह मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है यूटरस का … Read more

“अपनों का साथ ” – कमलेश आहूजा

संडे का दिन था,बेटों के ऑफ़िस की छुट्टी थी रमा ने सोचा था आज थोड़ा आराम से ऊठूँगी…किंतु सुबह से ही किसी कौवे की लगातार काँव-काँव की आवाज आ रही थी..जिससे उसकी नींद जल्दी ही खुल गई।आवाज बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी…उसने खिड़की का पर्दा हटाकर बाहर देखा,तो..सामने के पेड़ पर … Read more

*अपनों का साथ* – तोषिका

“जीवन में कभी कोई भी कठिनाई आए तो याद रखना हम तुम्हारे साथ है ऐसा हमेशा मेरे दादा जी कहते है” कमलेश ने अपने पोते अनंत को बोला। अनंत जो अभी मात्र ९ वर्ष का था, अपनी मासूम भरी आंखों से अपने दादाजी की बात ऐसे सुन रहा था जैसे ये सुनहरे अक्षर उसने पहली … Read more

अपनों का साथ – संयुक्त परिवार की सबसे बड़ी दौलत – सुदर्शन सचदेवा

कहते हैं, बड़ा घर ईंटों और सीमेंट से नहीं बनता, बल्कि उसमें रहने वाले अपनों के प्रेम, विश्वास और अपनापन से बनता है। संयुक्त परिवार भी ऐसा ही एक आँगन है, जहाँ हर रिश्ता अपने रंग से जीवन को सुंदर बना देता है। यहाँ किसी एक की खुशी, सबकी खुशी बन जाती है और किसी … Read more

अपनों का साथ – मधु वशिष्ठ

मां की मृत्यु का समाचार सुनकर जब उसके दोनों बेटे विदेश से आए तो वह यह देखकर हैरान थे उनकी अकेली रहने वाली माता जी के पास कितने लोग थे।  पूरा कमरा औरतों से भरा हुआ था आने जाने वाले कम ही नहीं हो रहे थे। लोग आकर ऐसे रो रहे थे कि मानो उन्होंने … Read more

अपनों का साथ – खुशी

गायत्री जी एक सुलझी महिला थी।उनके पति किशन जी की दुकान थी बड़े बाजार में किराने की दुकान थी जो बहुत बढ़िया चलती थी।उनके दो बेटे थे रितेश और राहुल दोनों भाइयों की एक दूसरे में जान बसती थी।पूरा परिवार एक दूसरे को समर्पित था।बच्चों ने भी अपनी शिक्षा पूरी कर कर पिता के कारोबार … Read more

अपनों का साथ

संडे का दिन था,बेटों के ऑफ़िस की छुट्टी थी रमा ने सोचा था आज थोड़ा आराम से ऊठूँगी…किंतु सुबह से ही किसी कौवे की लगातार काँव-काँव की आवाज आ रही थी..जिससे उसकी नींद जल्दी ही खुल गई।आवाज बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी…उसने खिड़की का पर्दा हटाकर बाहर देखा,तो..सामने के पेड़ पर … Read more

अपनों का साथ! – डाॅ संजु झा

आशा जी  एक आम गृहिणी की भाॅंति अपने गाॅंव के बड़े मकान में सुकून के साथ रहतीं थीं।बच्चे,पति , परिवार,समाज ही उनकी दुनियाॅं थी। अपनों के साथ समय कैसे बीत जाता था, उन्हें  पता ही नहीं चलता।कहावत है परिवर्त्तन समय का नियम है।समय के साथ बच्चे बड़े होकर शहर की राह पकड़ चुके थे। साल … Read more

“अपनों  का साथ ” – उमा वर्मा

सुमित्रा चार महीने से बिस्तर पर पड़ी हुई है ।बस लेटे रहना और खाना यही दिन चर्या बन गई है।अपने से कुछ कर नहीं सकती है ।बहु और बेटी सेवा में लगी रहती है ।व्हील चेयर पर बिठा कर बाथरूम ले जाना, नहलाना,सफाई सबकुछ के लिये दूसरे पर आश्रित हो गई है।बहुत तकलीफ होती है … Read more

अपनों का साथ और प्यार – गीता वाधवानी

 आकाश और आशना की आंखों में खुशी के आंसू थे। उनकी बेटी काम्या ने समाजसेविका बनकर उनका नाम रोशन किया था।आज उसके अच्छे कामों के लिए उसे अवार्ड दिया जा रहा था।   पूरा हॉल तालियों  की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हर व्यक्ति की जुबान पर बस काम्या का ही नाम था। सब यही कह रहे … Read more

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