आशीर्वाद

अंजलि अपना सूटकेस पैक कर रही थी। शादी के बाद यह उसका पहला सावन था और मायके जाने की खुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी। पूरे एक महीने के लिए वह अपने बचपन की सखियों, माँ के हाथ के खाने और उस पुराने झूले के पास जाने वाली थी, जहाँ उसने अपनी ज़िंदगी … Read more

सच्चा प्यार और साथ

दीपावली के दीयों की तरह ही उस दिन घर का कोना-कोना जगमगा रहा था, जब विशाखा पहली बार नई नवेली दुल्हन बनकर इस घर की दहलीज पार कर रही थी। विशाखा और सुशांत का विवाह दो परिवारों का ही नहीं, बल्कि दो जिम्मेदार और परिपक्व इंसानों का मिलन था। सुशांत का परिवार काफी बड़ा था। … Read more

सच्ची मां

“अंजलि बेटा, जरा बाहर आना।” सुमित्रा जी ने अपनी अलमारी को ताला लगाते हुए अपनी नई नवेली बहू अंजलि को आवाज दी। अगले ही पल अंजलि रसोई से अपने हाथ पोंछती हुई बाहर आ गई। उसकी आंखें थोड़ी सूजी हुई थीं और चेहरा उतरा हुआ था। सुमित्रा जी ने अंजलि को हिदायत देते हुए कहा, … Read more

संदूक में रखा सपना सिल्क की प्लेन बॉर्डर वाली साड़ी… – लतिका श्रीवास्तव

मां कहां हो जोर से आवाज लगाती नंदिनी बैठक से होते हुए अंदर वाले कमरे तक पहुंच गई… लेकिन मां के कमरे के दरवाजे पर ही ठिठक गई उसने देखा मां अपना संदूक खोले बैठी है उसकी तरफ मां की पीठ थी नंदिनी की समझ में नहीं आया कि मां इस समय यहां बैठ कर … Read more

भगवान के घर देर है अंधेर नहीं | – सुदर्शन सचदेवा

अभी अंश 11वीं कक्षा का छात्र है। उसके मन में एक बड़ा सपना है—मुझे अभी से JEE की तैयारी करनी है और अपने माता-पिता का नाम रोशन करना है। लेकिन उसके मन में एक सवाल भी रहता है—”अगर भगवान हैं, तो मेरी मेहनत का फल अभी क्यों नहीं मिलता? क्या सचमुच भगवान मेरी सुनते हैं?” … Read more

दादी की जूठन

मैंने बिना एक पल गँवाए, बिना कोई तर्क किए, अपना मुँह खोल दिया। दादी ने अपने कांपते हाथों से वो खीर मेरे मुँह में रख दी। वो साबूदाने की खीर, जो शायद थोड़ी ठंडी हो चुकी थी, मुझे दुनिया का सबसे स्वादिष्ट व्यंजन लगी। उसे निगलते हुए मेरी आँखों से आंसुओं की एक धार बह … Read more

खोई हुई ममता वापस मिल गई

रमा दरवाजे के पास खड़ी सब सुन रही थी। एक माँ के इस दर्द ने उसके दिल को चीर कर रख दिया। उसी पल रमा ने एक ऐसा फैसला लिया जो कोई सगा भी शायद ही लेता। उसने तय किया कि जब तक ‘माजी’ (सावित्री देवी) ठीक नहीं हो जातीं, वह उन्हें छोड़कर कहीं नहीं … Read more

तोहफे की कीमत…

सुबह की भागदौड़ के बीच, जब घर में नाश्ते की खुशबू और कुकर की सीटियों का शोर गूंज रहा था, तभी दरवाजे से बाहर निकलते हुए समीर ने अपनी पत्नी काव्या को आवाज लगाई। “काव्या, सुनो! आज शाम को जल्दी तैयार हो जाना। तुम्हें याद है न, हमारे पुराने पड़ोसी माथुर अंकल की बेटी की … Read more

अनकही शांति

रात के करीब दस बज रहे थे। नवंबर की हल्की ठंड ने दस्तक दे दी थी। समीर अपने ऑफिस का लैपटॉप बंद करके जब अपने बेडरूम में दाखिल हुआ, तो सामने का नज़ारा देखकर उसके कदम ठिठक गए। उसकी पत्नी, राधिका, उनके डबल बेड के ठीक बगल में ज़मीन पर एक मोटा गद्दा बिछा रही … Read more

अटूट प्रेम

सुमित्रा देवी दौड़कर कमरे में आईं और अपनी बहू के कदमों के पास बैठकर उसे गले से लगा लिया। “मुझे माफ़ कर दे मेरी बच्ची। तूने आज साबित कर दिया कि माँ की ममता और एक औरत का विश्वास किसी भी विज्ञान की मोहताज नहीं होती। अब से तू नहीं, मैं तेरा पूरा ध्यान रखूंगी।” … Read more

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