*भगवान के घर देर है पर अंधेर नही* – तोषिका

“क्या हुआ बेटा, ऐसे रो क्यों रहा है?” सुनीता ने अपने बेटे अंश से पूछा। अंश ने बोला “कुछ नहीं मा, बस ऐसा लग रहा है कि जिंदगी साथ नहीं दे रही है।” “ऑफिस में कुछ ठीक नहीं चल रहा है क्या?” उसकी मां ने अंश के सिर पर हाथ फेरते हुए बोला। नहीं मा … Read more

भगवान के घर देर है अंधेर नहीं | – सुदर्शन सचदेवा

अभी अंश 11वीं कक्षा का छात्र है। उसके मन में एक बड़ा सपना है—मुझे अभी से JEE की तैयारी करनी है और अपने माता-पिता का नाम रोशन करना है। लेकिन उसके मन में एक सवाल भी रहता है—”अगर भगवान हैं, तो मेरी मेहनत का फल अभी क्यों नहीं मिलता? क्या सचमुच भगवान मेरी सुनते हैं?” … Read more

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