दौलत का अंधापन
इस विचार मात्र से ही प्रकाश की रूह काँप उठी। उसे अपने बाबूजी के वो आखिरी शब्द याद आने लगे—’जब ठोकर लगेगी तब समझ आएगा’। आज उसे वो ठोकर लग चुकी थी। उसे समझ आ गया था कि जिस पेड़ से टूटकर वह खुद को आज़ाद समझ रहा था, असल में वह सूख रहा था। … Read more