वो बरगद की छांव और बाबूजी की निशानी
मालती देवी के कांपते होंठों पर कई दिनों बाद एक हल्की, सुकून भरी मुस्कान खिल उठी। उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपना हाथ उठाकर अंकित के सिर पर रख दिया। उनके स्पर्श में वही पुरानी ममता, वही आशीष लौट आया था। मालती ने कमजोर आवाज में कहा, “जीते रहो मेरे बच्चे… तुमने आज अपने दादाजी की … Read more