रिश्ते अधिकार से नहीं करूणा से निभते हैं। – परमा दत्त झा
नहीं चाचाजी हमारे साथ रहेंगे -यह करूणा थी जो अपने पति से लड़-झगड़कर उन्हें रखना चाहती थी जबकि उसका पति करूणेश उन्हें गांव भेजना चाहता था। ठीक है कहकर करूणेश अपने माता-पिता को लेकर गांव चला गया जबकि विजयी भाव से करूणा अपने पापा को फोन करने लगी। अरे यह क्या किया?-उस बूढे को क्यों … Read more