रेशमी पिंजरा और खुली उड़ान
उमेश जी ने अपनी बहन की तरफ देखा, जिनकी आंखों में अपनी गलती का जरा भी पछतावा नहीं था, बल्कि सिर्फ अपनी झूठी प्रतिष्ठा की चिंता थी। उमेश जी ने हाथ जोड़कर अत्यंत कठोर शब्दों में कहा, “दीदी, आपने अपने स्वार्थ और रिश्तेदारी चमकाने के लिए मेरी फूल सी बच्ची को उस दलदल में धकेल … Read more