अफसोस नहीं …. – आराधना श्रीवास्तव

कितना सुंदर ,मासूम सा चेहरा ,,,,मदमस्त काया,, गोरी सुंदर ,,,”नैना,”,,, मात्र अठारह वर्ष की थी l गांव में अपनी सहेलियों के साथ निश्चल हंसी  ठिठोली करते हुये कब वह बड़ी हो गई उसे खुद भी पता नहीं चला ।  उसका चंदन सा महकता बदन ,,,चंचल चितवन,, और उस पर से उसका खिलखिला कर हंसना उसके … Read more

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