रिश्तों की वसीयत

कृतिका अचानक सास को वहां देखकर हक्की-बक्की रह गई। वह लड़खड़ाती जुबान से बोली, “मां… मां जी, मेरा वो मतलब नहीं था। मैं तो बस यह कह रही थी कि दीदी का फायदा हो गया। आखिर उन्होंने दो साल आपकी सेवा जो की है, उसका फल तो उन्हें मिलना ही था।” “सेवा का फल?” कावेरी … Read more

समझौते की आखिरी सीमा – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका‘

सुबह के सात बज रहे थे। रसोई में चाय की महक के साथ प्रेशर कुकर की सीटी घर के सन्नाटे को तोड़ रही थी। रिया जल्दी-जल्दी नाश्ता तैयार कर रही थी। सामने रखे मोबाइल पर ऑफिस से लगातार संदेश आ रहे थे। आज उसकी जिंदगी का एक बड़ा दिन था। पिछले छह महीने से जिस … Read more

तकदीर का पन्ना

मीरा अपनी बेटी का दुख समझ रही थी, लेकिन वह बेबस थी। उसने अपने आंसुओं को छिपाते हुए मीना  को गले लगाया और कहा, “नहीं बेटा, ऐसा बिल्कुल नहीं है। दादी तुमसे भी बहुत प्यार करती हैं। लेकिन सार्थक अभी बहुत छोटा है ना, इसलिए उसका ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। तुम तो मेरी समझदार … Read more

समझौता – डॉ. हिमानी बंसल

निहारिका अपने मायके में माँ-बाप की लाडली और भाई-बहनों की प्यारी थी। माता-पिता ने उसे फूलों की तरह संभालकर रखा था। उसके जीवन में दुख की छाया तक नहीं पड़ी थी। दादाजी तो उसे अपनी आँखों का तारा मानते थे। जब उसके विवाह की बात चली तो दादाजी ने रायपुर के एक बड़े और प्रतिष्ठित … Read more

अनकहे रिश्ते

देवकी जी की आँखें शून्य में ठहर गईं। जो दर्द उन्होंने सालों से अपने सीने में दबा रखा था, वह अब बाहर आने के लिए तड़प रहा था। उन्होंने गहरी सांस ली और कहा, “हाँ बेटा, तूने मुझे फिर से जीना सिखाया है। मेरा सिद्धार्थ… वह मेरा सब कुछ था। मैं तुझे सब बताऊँगी।” कबीर … Read more

प्रतीक्षा के वो सात समंदर

 खैर, आज का दिन बहुत खास है। आज मेरी वही पोती, जो कल तक मेरे कंधों पर बैठकर बनारस के घाट घूमा करती थी, खुद चलकर इस आंगन में आ रही है। लड़कियाँ जब मायके आती हैं, तो घर की दीवारें भी जैसे मुस्कुराने लगती हैं। उनकी हंसी की खनक से पूरे घर का सन्नाटा … Read more

सात समंदर पार का सन्नाटा

 रोहन की बात सुनकर देवकी के पास कहने को कुछ नहीं बचा था। रोहन ने कुछ गलत नहीं कहा था। उसने वही किया जो उसकी माँ ने उसे सिखाया था। देवकी ने ही उनके कोमल मनों में यह बात डाली थी कि विदेशी सरजमीं ही सफलता का आखिरी मुकाम है। उसने बच्चों को उड़ना सिखाया, … Read more

परंपरा और आधुनिकता की पहेली

अनन्या अवाक रह गई। वह कुछ बोल ही नहीं पा रही थी। आधुनिकता की तमाम दलीलें देने वाली अनन्या को अचानक अपनी ही भारतीय जड़ों का एहसास होने लगा। उसका दिमाग तेज़ी से दौड़ने लगा। ‘होने वाले सास-ससुर के सामने मैं एक ही कमरे में रोहन के साथ कैसे रहूँगी? मैं उनके सामने सुबह-सुबह बिना … Read more

सुकून का नया पता

 सुमित्रा जी मुस्कुराते हुए बोलीं, “नहीं मालती, बच्चों ने कभी हमसे एक पैसा नहीं मांगा। बल्कि वे तो हर महीने हमें पैसे भेजना चाहते हैं। सच तो यह है कि उस बड़े घर में हम थक चुके थे। रोज सुबह उठकर कामवाली का इंतजार करना, कभी प्लंबर को बुलाना, कभी बिजली वाले के पीछे भागना। … Read more

मखमली पर्दे

स्मिता ने अपना रेशमी पल्लू सँभालते हुए कहा। “ये जो लड़का है ना सूरज, इसका बाप एक नंबर का जुआरी और शराबी था। सिर पर लाखों का कर्ज़ा छोड़कर लिवर खराब होने से मर गया। इसकी माँ, कमला, मेरे पैरों में गिरकर रोने लगी। मेरे पति राकेश जी का दिल बहुत बड़ा है। उन्होंने कमला … Read more

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