एक बेटे का एहसास

रमाकांत जी का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उन्हें लगा जैसे किसी ने उन्हें सरेआम नंगा कर दिया हो। उनका सिर झुक गया और आँखों से आंसू बहने लगे। “बेटा… वो… समाज की रस्में… हमारी इज्जत…” उनके मुंह से शब्द नहीं फूट रहे थे। विक्रम आगे बढ़ा और उसने रमाकांत जी के दोनों हाथ … Read more

” मैं से हम तक ” – कमलेश आहूजा

शाम का समय था।रिया और रोहित ने जैसे ही घर में प्रवेश किया,सुषमा की आँखों में चमक आ गई।आज उनकी शादी की पहली सालगिरह थी।दोनों ने मुस्कुराते हुए आगे बढ़कर सुषमा के चरण स्पर्श किए।सुषमा ने दोनों को गले से लगा लिया और स्नेह से कहा, “बहुत खुश रहो बच्चों,हमेशा एक-दूसरे का हाथ थामे रखना … Read more

रिश्तों की संजीवनी

 सावित्री देवी खुलकर हंस पड़ीं। यह वही हँसी थी जिसे सुनने के लिए समीर और शिखा के कान तरस गए थे। आज उन्हें डॉ. भार्गव की बात का असली मतलब समझ में आ गया था। उन्होंने जान लिया था कि बुज़ुर्गों को सिर्फ आराम, दवा या नौकरों की जरूरत नहीं होती। उन्हें जरूरत होती है … Read more

समझौता नहीं,समन्वय – शुभ्रा बैनर्जी

शुचिता जब ब्याह कर ससुराल आई,तब उसे अपने आप को नए परिवेश में ढालने में समय लगा। मायके में सबसे बड़ी और लाड़ली बेटी।पढ़ने में सदा अव्वल,सुंदर और सुशील।दादी तो तब आशीर्वाद देतीं थीं जब शुचिता पांचवीं कक्षा में थी”महारानी बनकर राज करेगी मेरी मोना।” शुचिता ने रानी बनने के ख्वाब तो नहीं देखे थे, … Read more

घुटन भरे रिश्ते से आज़ादी – तन्वी

क्या कभी तुम्हें ऐसा लगा है कि तुम सांस ले रही हो पर जी नहीं रही हो? रिया के साथ हर दिन वही होता था। लोग कहते हैं लड़कियां पराया धन होती हैं पर रिया को लगता था कि वह धन नहीं, एक पिंजरा है जिसमें सिर्फ उसकी सांसें घुट रही थीं। रिया 20 साल … Read more

और कुछ बंधन तोड़ देना ही अच्छा है – मंजू ओमर

और कैसी है मेरी बेटी राजीव जी बेटी श्वेता की  अटैची उठाते हुए बोले, ठीक हूं पापा ।और मेरा आने वाला नवासा  कैसा है, और वह भी ठीक है। तू अकेले आई है दामाद जी नहीं आए।नहीं पापा अच्छा चल ऑटो में बैठ चल तेरी मां इंतजार कर रही होगी बड़ी बेसब्री  से। श्वेता घर … Read more

अरमान निकालना – रंजीता पाण्डेय

रुचि ने अपने पति रोहित से पूछा  ,रोहित  मां पापा  का बहुत मन है , कुंभ जाने का ,मै ले के चली जाऊ क्या? आप  दो दिन मम्मी जी और पापा जी ,ध्यान रख लेते तो ठीक था । रोहित ने बोला पागल तो नहीं हो गई? किसी और के साथ भेज दो , उनका … Read more

समझौता – खुशी

विकास और पूनम की शादी को पंद्रह साल हो चुके थे। पंद्रह साल… इतना लंबा समय कि इंसान किसी रिश्ते को निभाते-निभाते खुद को भूल जाए। पूनम ने भी खुद को भुला दिया था। शादी के शुरुआती दिनों में उसे लगता था कि विकास एक दिन समझ जाएगा। वह जिम्मेदार बनेगा, नौकरी करेगा, परिवार की … Read more

घुटन भरे रिश्ते से आजादी – डॉ आभा माहेश्वरी

शहर की भीड़ में रहने वाली मान्या बाहर से जितनी खुश दिखाई देती थी, भीतर से उतनी ही अकेली थी। उसका विवाह हुए आठ वर्ष हो चुके थे। घर सुंदर था, सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उस घर की दीवारों के भीतर उसका अपना कोई कोना नहीं था। उसकी हर पसंद पर सवाल … Read more

दिखावे की चाशनी – मीनाक्षी चौहान 

हमारी इस नई कॉलोनी में शिफ्ट हुए मुश्किल से एक महीना ही बीता था, लेकिन मेरी सास, सावित्री देवी जी, और सामने वाले फ्लैट की विमला आंटी के बीच जो दोस्ताना परवान चढ़ा था, उसे देखकर ऐसा लगता था मानो वो पिछले जन्म की सहेलियाँ हों। हमारे फ्लैट्स की बालकनी एक-दूसरे के बिल्कुल आमने-सामने थीं। … Read more

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