सूने आंगन की गूंज

सर्दियों की एक धुंधली और सर्द सुबह थी। लखनऊ के गोमती नगर इलाके में स्थित ‘आनंद कुंज’ नाम की एक विशाल और खूबसूरत हवेली, जो कभी बच्चों की किलकारियों और मेहमानों के ठहाकों से गूंजा करती थी, आज एक अजीब से सन्नाटे में डूबी हुई थी। उस सन्नाटे को चीरती हुई सिर्फ एक ही आवाज़ … Read more

फासलों के पार का अपनापन

लखनऊ की सर्द और कोहरे में लिपटी हुई नवंबर की वह सुबह देवकी जी के लिए किसी उत्सव से कम नहीं थी। साठ पार कर चुकीं देवकी जी पिछले कई सालों से इस विशाल और पुराने पुश्तैनी मकान में नितांत अकेली रह रही थीं। उनके इकलौते बेटे सिद्धार्थ की नौकरी मर्चेंट नेवी में थी, जिसके … Read more

घुटन भरे रिश्ते – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका’

नंदिनी को अब याद भी नहीं था कि वह आखिरी बार बिना किसी डर के कब जोर से हंसी थी। कभी उसकी हँसी पूरे घर में गूँजती थी। छोटी-सी बात पर खिलखिला उठना, बारिश की बूँदों को हथेली पर रोकना, माँ से घंटों बतियाना और अपनी पसंद के गीत गुनगुनाना—ये सब उसके जीवन का हिस्सा … Read more

ममता अनमोल है

आज शारदा जी  बहुत गमगीन होकर विचारों में डूबी हुई थी। सिंगापुर में रहने वाली उनकी बेटी संजना की तबियत बहुत खराब थी। पिछले माह ही उसके सिज़ेरियन सैक्शन से बेटा हुआ था पर उन्हें कोई खुशी नहीं हुई थी। एकदम निर्विकार भाव से सब देखती सुनती रही थी।  सच तो ये था कि वो … Read more

 दो आंगनों की दहलीज

शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की सीढ़ियां उतरते हुए अर्चना  के पैर मन से भी ज्यादा भारी हो रहे थे। उसके कपड़ों में अब भी अस्पताल की वो अजीब सी गंध बसी हुई थी—दवाइयों, स्पिरिट और फिनाइल की मिली-जुली गंध। ऑटो में बैठकर पूरे रास्ते वह शून्य में ताकती रही। उसकी आंखों के सामने … Read more

स्वाभिमान की उड़ान: एक बेटी का फर्ज

रात के करीब दो बज रहे थे। पूरा घर गहरी नींद में डूबा था, लेकिन स्वाति की आँखों से नींद कोसों दूर थी। तभी उसके फोन की स्क्रीन रोशन हुई। स्क्रीन पर ‘माँ’ का नाम झिलमिला रहा था। इतनी रात गए माँ का फोन आना किसी अनहोनी का संकेत था। कांपते हाथों से स्वाति ने … Read more

नई सुबह की देहरी

 “मुझे माफ़ कर दीजियेगा बाबूजी,” राधिका का गला बुरी तरह रुंध चुका था। “मुझे पता है, मेरा चेहरा देखकर हर कोई ऐसे ही डर जाता है। मैं यहां से चली जाती हूँ।” वह पीछे मुड़ने लगी, लेकिन उसका दर्द आंसुओं और शब्दों के रूप में बह निकला। वह बिना उनकी तरफ देखे, रुंधे हुए गले … Read more

कागज़ के रिश्ते

सुधीर अकेला पड़ गया। उसे अपने माता-पिता को जेल जाने से बचाना था। उसने राधिका के वकील से मिन्नतें कीं। सौदा तीस लाख में तय हुआ। सुधीर ने अपनी ज़िंदगी भर की सारी बचत तोड़ दी। अपने प्रोविडेंट फंड के पैसे निकाले। जब उससे भी काम नहीं चला, तो उसने अपने गाँव की वो पुश्तैनी … Read more

विदाई की वह रात: माँ के तीन अनोखे उपहार

अनन्या ने वह डिब्बी अपने सीने से लगा ली और माँ के गले लगकर बोली, “माँ, मुझे अब कोई डर नहीं लग रहा। आपने मुझे गृहस्थी को जोड़ने और खुद को न टूटने देने का जो अचूक मंत्र दिया है, मैं उसे अपनी सांसों में बसा कर रखूंगी। मैं पहले सबको समझूंगी, बिना वजह न … Read more

स्वाभिमान की कीमत

 राधिका बुरी तरह चौंक गई, “क्या बकवास कर रहे हो तुम? तुम क्यों उनके साथ जाओगे? तुम अपना घर छोड़कर उन.. उन बाहरी लोगों के साथ रहोगे?” “बाहरी लोग? राधिका, जब मेरे पास सिर छिपाने को पक्की छत नहीं थी, तब इन्हीं बाहरी लोगों ने मुझे अपना घर दिया था। जब मेरे घर में अंधेरा … Read more

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