स्वाभिमान की दहलीज

 पति की यह प्रतिक्रिया अनघा के सीने में तीर की तरह चुभी। वह समझ गई कि पुरुष प्रधान व्यवस्था में अंधभक्ति की पट्टी इतनी मोटी होती है कि अपनों का दर्द भी दिखाई नहीं देता। अब वह बिल्कुल अकेली थी। एक तरफ उसका अपना स्वाभिमान था और दूसरी तरफ वह परिवार था जो एक पाखंडी … Read more

ममता की छाँव

 माँ ने एक गहरी सांस ली और आगे कहा, “प्रियल एक ऐसे घर से आई है जहाँ उसने कभी तवे को छुआ तक नहीं था। वह चाहती तो अपनी नौकरी और आधुनिकता का हवाला देकर कह सकती थी कि खाना बनाने के लिए कोई रसोइया रख लिया जाए। लेकिन उसने यह रास्ता नहीं चुना। वह … Read more

रंगों का पटाक्षेप

प्रतीक ने मेरा हाथ पकड़ लिया, “घबराओ मत… देखो सब ठीक ही होगा… वैसे जो होना होता है वो तो…” “चुप रहो तुम… जो होना होता है… जानती हूँ मैं भी कि जो होना होता है वही होता है। तुम्हारे साथ शादी होना थी हो गयी… घरवालों को हमारा बहिष्कार करना था, कर दिया… सोम … Read more

साँझ का सवेरा

 मयंक ने सीधे स्वाति की आँखों में देखते हुए कहा, “स्वाति, मुझे आज तुम दोनों की सोच पर बहुत तरस आ रहा है। तुम पूछ रही हो कि इसमें गलत क्या है? मैं तुमसे पूछता हूँ कि इसमें गलत क्या था? मम्मी और पापा केवल इस घर के बुजुर्ग नहीं हैं, वे पति-पत्नी हैं! क्या … Read more

शूल शैया

  पर मेरे पापा  हां मेरे पापा, अपने ऐसे कौन से कर्मों का फल भुगत रहे हैं, ये वो स्वयं तो क्या , उनसे जुड़ी हर जिंदगी इस बात से अन्जान है।  हर पल, हर घड़ी इंसानियत का मान रखता , ये देवता सा इंसान ,हर पल तैयार रहता, हर किसी के आंसू पोंछने,और उनका दर्द … Read more

अपना–पराया

इस खूबसूरत जिंदगी में हजारों मोड़ आते हैं, ना जाने किस मोड़ पर किस अजनबी से मुलाकात हो जाए। कभी-कभी इन अपने-पराया से इतना खुशी मिल जाती है कि संभाले नहीं संभलती और कभी कभी ऐसा गम जो सिर्फ दर्द का एक रिश्ता बन कर रह जाता है। ठेकेदार ने जोर जोर से शारदा को … Read more

पारखी का हस्ताक्षर

बगल के कमरे से पापा की भीगी किन्तु विचलित-सी आवाज सुनाई दी—”पारखी… पारखी! सुन रही है न तू?” पारखी आँखें बन्द किए निर्लिप्त भाव से लेटी हुई थी। उसने अपना एक हाथ अपने माथे पर रखा हुआ था, जैसे खुद को भी इस धोखे में रख सके कि अभी वह सोयी हुई है। पापा की … Read more

सेवा का प्रतिफल

“पापा, अब न ही कुछ बोलिए, जो भी गलती है, वह मेरी गलती है। सोफिया का हाथ पकड़ लेने के बाद मुझे लगा कि आप लोग मुझसे बहुत ही नाराज हैं। इसी डर के नाते मैं आ नहीं रहा था, जबकि सोफिया बार-बार आप लोगों से मिलने की जिद करती रहती थी। वही जिद करके … Read more

रिश्तों की दरार

वंदना जब घर लौटकर हेमंत से यह बात कहती, तो हेमंत आगबबूला हो जाता। वह वंदना को भड़काते हुए कहता, “देखा तुम्हारे भाई का असली चेहरा? वह तुम्हें अपने हिस्से से बेदखल करना चाहता है। वह नहीं चाहता कि तुम अपने हक का इस्तेमाल करो। यदि तुम आज पीछे हट गईं, तो कल वह पूरा … Read more

शक की दीवार

प्रभात जी ने अत्यंत गंभीर और भारी आवाज़ में कहा, “कल्याणी! दाल में कुछ काला नहीं है, बल्कि तुम्हारी सोच का चश्मा ही पूरी तरह काला हो चुका है। बहू में कोई खोट नहीं है, सारा खोट और गड़बड़ तुम्हारे अपने दिमाग में है। जानती हो क्यों? क्योंकि जब तुम इस घर में नई बहू … Read more

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