बेनाम रिश्तों की अनकही दास्तान – आर्या विनोद
श्रुति अपनी डेस्क पर रखा अपना सारा सामान समेट रही थी। पिछले दो सालों से जिस आर्किटेक्चरल प्रोजेक्ट पर वह और उसकी कंपनी काम कर रही थी, वह आज सफलतापूर्वक पूरा हो गया था। अब उसकी कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका था और कल से उसे इस ऑफिस में नहीं आना था। फाइलों को … Read more