सिर्फ़ मेरा ही नहीं, तुम्हारा भी इम्तिहान

  शालिनी ने भारी कदमों से चलकर पंखे का रेगुलेटर पांच पर घुमाया, मगर गर्म हवा की थपेड़ों ने माथे पर उभरे पसीने की बूंदों को और बिखेर दिया। उसका सातवां महीना चल रहा था। पैरों की सूजन इतनी बढ़ चुकी थी कि चप्पलें भी तंग लगने लगी थीं और सांस लेने के लिए भी उसे … Read more

धूप का एक टुकड़ा

 कबीर ने थाली को साइड टेबल पर रखा और बोला, “दादी, जब लड़की वाले हॉल में बैठे थे, तो उनके पिता जी बार-बार पूछ रहे थे कि शादी में ये इंतज़ाम कैसे होंगे, वो रस्में कैसे होंगी। पापा और मम्मी जवाब दे रहे थे, लेकिन जब उन्होंने पूछा कि कबीर की परवरिश में इतनी सादगी … Read more

दहलीज़ के फैसले

“मैं जानती हूं पापा,” अनन्या की आंखों में आंसू थे, पर आवाज बिल्कुल स्पष्ट थी, “और मैं आपसे कोई बगावत नहीं कर रही। मैं सिर्फ अपना वह अधिकार मांग रही हूं जो किसी भी इंसान का बुनियादी हक होता है। अगर एक बेटी आपके घर में बोझ है, तो यकीन मानिए, मैं कल ही अपना … Read more

अर्धांगिनी का मौन तप

“सुनो, आज शाम वाले समारोह में तुम्हें भी मेरे साथ चलना होगा। ज़रा सलीके से अपनी वो कांजीवरम वाली साड़ी पहन लेना, समय पर निकलना है।” कमरे की दहलीज़ पर खड़े होकर जब उन्होंने ये शब्द कहे, तो मेरे हाथ में पकड़ा चाय का कप तनिक कांप सा गया। पिछले पैंतीस वर्षों के वैवाहिक जीवन … Read more

उम्मीद का दीया

यह सुनते ही सुलोचना जी की चीख निकल गई और वे छाती पीटकर रोने लगीं। हरिशंकर जी का पूरा वजूद सुन्न पड़ गया। जिस बेटे को वे बरसों से पत्थरदिल और खुदगर्ज समझकर कोसते रहे थे, वह तो खुद जिंदगी और मौत की भयानक जंग लड़ रहा था। अपने बेटे के चले जाने का गम … Read more

छूटा हुआ साथ

 सत्यनारायण जी ने उनकी तरफ देखा और एक ठंडी आह भरी, “नहीं उर्मिला, अब कुछ कहने का कोई फायदा नहीं। अगर तुम बहू से कहोगी, तो उसे लगेगा कि सास-ससुर उनकी खुशियों के बीच में आ रहे हैं। घर में कलह होगी, खिंचाव बढ़ेगा। मैं नहीं चाहता कि मेरे एक छोटे से मंदिर जाने के … Read more

अपनो की चोट – बालेश्वर गुप्ता

तब का काला फोन सर्द ऋतु में सुबह सुबह टिन टिन करने लगा तो एक दम झुंझलाहट हुई।इतनी सुबह कैसे किसका फोन आ गया।फिर ख्याल आया कहीं किसी रिश्तेदार के यहां से कोई अनहोनी की सूचना न हो,यह सोचकर मैने फोन उठा ही लिया।उधर से कांति प्रसाद जी बोल रहे थे।मै उन्हें पिता तुल्य मानता … Read more

आत्मसम्मान – मधु वशिष्ठ

  चाचा जी के  बेटे की शादी में नीता सुंदर सी साड़ी पहने जब नई गाड़ी से उतरी, तो सब उसे देखते ही रह गए।  भावना जी को अपने पति के किए  फैसले पर आज बहुत गर्व हो रहा था। उनके ही कारण आज उनकी बेटी बहुत खुश भी थी और आत्मसम्मान के साथ जी रही … Read more

दिलों की डोर

  “दीदी, सच कहूँ तो इन दस दिनों में मुझे समझ आया कि घर में बड़ों का होना कितनी बड़ी दौलत है। जब से हम यहाँ आए हैं, माँ-बाबूजी के सामने होने से सारे काम कितने सलीके से हो गए। बच्चे भी अपनी मनमानियाँ छोड़कर बड़ों के पास बैठना सीख रहे हैं। उस पुराने मकान में … Read more

मूक प्रीत की धड़कन

दरवाजा खुलने की धीमी सी आवाज के साथ जब पिताजी भीतर आए, तो उनके कदम लड़खड़ा रहे थे। उनके चेहरे की रंगत पूरी तरह उड़ चुकी थी, जैसे किसी ने अंदर से उनका सारा जीवन खींच लिया हो। हम सब भाई-बहन सोफे पर बैठे थे, पर उनके सूखे चेहरे और बेजान आंखों को देखकर कमरे … Read more

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