स्वाभिमान मेरा भी है – आरती झा आद्या
रंगोली बचपन से ही थोड़ा ऊँचा सुनती थी, पर उसके भीतर जीवन के रंग बेहद गहरे थे। उसकी हँसी में उजास था, सपनों में खुला आसमान विस्तार ले रहा था। अभी वह इक्कीसवें वर्ष में कदम ही रख ही रही थी कि उसके पेट पर सफेद छोटे धब्बे उभर आए। जब डॉक्टर ने जाँच के … Read more