संस्कार कभी व्यर्थ नहीं जाते – निमिषा गोस्वामी
“सुहानी… ऐ सुहानी! अरे यार, जल्दी करो, देर हो रही है।” मनु अपनी पत्नी को तेज़ आवाज़ में बुला रहा था। “आ रही हूँ, बस दो मिनट और इंतज़ार करो।” सुहानी ने भी उसी अंदाज़ में जवाब दिया। “उफ़! ये महिलाएँ भी…” कहते हुए मनु पास पड़े सोफे पर धम्म से बैठ गया। वह आँखें … Read more