अपनो का साथ – मंजू ओमर

तुम रो क्यों रही हो मुक्ता क्या हुआ है ,और यह किससे बातें कर रही थी अभी फोन पर । वह पापा से बात कर रही थी मैं ,,तो क्या हुआ पापा से बात कर रही थी तो रोने की क्या बात है मयंक बोला । वह मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है यूटरस का कैंसर निकला है तुरंत ही ऑपरेशन करने को बोला है डॉक्टर ने, तो फिर करा ले ना ऑपरेशन यह सब तो आजकल बहुत कामन हो गया है। परेशान होने की जरूरत नहीं है । लेकिन ऑपरेशन दवाइयां कीमो वगैरा सब मिलाकर चार लाख रुपए का खर्चा आएगा। आजकल मेडिकल कितना महंगा है तुम्हें तो पता है ना। पापा के पास इतने पैसे नहीं है ,अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने मेरी शादी की है इतना खर्चा हुआ है। तुम्हें तो पता है हम दो बहने ही है मेरे कोई भाई नहीं है। दीदी भी की स्थिति ऐसी नहीं है कि कुछ मदद कर सके पापा की। 

                 अभी 6 महीने पहले ही पापा रिटायर हुए हैं। फिर मेरी शादी हो गई ।तुम्हारे यहां से अच्छी खासी मांग थी शादी मे,मेरी खातिर उसे भी पूरा किया पापा ने । पापा की नौकरी भी तो कोई बड़ी बहुत बड़ी नहीं थी बैंक में क्लर्क ही तो थे।वह सारी उम्र हम दोनों बहनों को अच्छा पढ़ाते लिखाते रहे । हम दोनों पर ही खर्च किया । और शादी करने के लिए ही पैसे जोड़ते  रहे । और अब हम दोनों बहनों की शादी भी हो गई तो पापा निश्चित थे की जिम्मेदारी से मुक्त हो गए। लेकिन अब यह मुसीबत आ गई । पापा का जो फंड मिला था उसमें से कुछ पैसे तो मेरी शादी पर खर्च हो गए और कुछ बचे थे तो पापा ने सोचा कि उन पैसों से एक छोटा सा दो कमरों का घर खरीद ले  क्योंकि अब तक किराए के मकान में ही रहते आए हैं

               क्योंकि मां की बहुत इच्छा थी कि अपना एक छोटा सा घर हो ,चाहे वह बस दो कमरों का ही हो ।क्या करना है बड़ा घर लेकर । तो उस पैसे से पापा ने एक छोटा सा फ्लैट बुक कर लिया है  फंड के पैसे बिल्रडर को दे दिए है।अब ये परेशानी आ गई । पापा बहुत परेशान थे क्या हम उनकी कुछ मदद नहीं कर सकते मंयक।अरे नहीं हम क्यों  मदद करें मेरे पास नहीं है मदद करने को । तुम्हारे पापा है तुम जानो और वह जाने। क्यों तुम्हारे कुछ नहीं लगते क्या, मैंने जब तुमसे शादी की है और मैं तुम्हारे घर वालों को अपनाया है तो तुम्हारे लिए भी तो मेरा घर और मेरे घर वाले अपने हुए ना । अपनों के साथ बड़ी-बड़ी मुश्किलों को छोटी कर देता है मयंक । लेकिन मैं कोई मदद नहीं कर सकता मुक्ता मुझसे कोई उम्मीद न रखो। 

           तभी मयंक की  मां की तेज आवाज  अरे बहू नास्ता नहीं  बनाओगी क्या कमरे से बाहर नहीं निकलती ।।आ रही हूं मम्मी जी मुक्ता  बाहर आई  तो रो रही थी । और यह रो क्यों रही हो तुम क्या हुआ सास कमुद  ने बहू से पूछा। वो मम्मी मेरी मम्मी को पीछे से मयंक आ गया ,    और वह बात को पूरी करते हुए बोला और मम्मी मुक्ता की मम्मी का यूटेस का कैंसर निकला है उसका ऑपरेशन करना है । पैसे की जरूरत है । अच्छा तो क्या बेटा तुमसे पैसा मांगा है। नहीं मुझसे कहा तो नहीं है लेकिन मुक्ता कह  रही है कुछ मदद करने को, अरे नहीं नहीं हम क्यों करें मदद करें अपना इंतजाम। क्यों मेरी मम्मी पापा क्या मयंक के मम्मी पापा नहीं है क्या मुक्ता बोलीं । जब मैं आप लोगों को अपना सकती हूं और अपने मम्मी पापा का दर्जा दे सकती हूं तो क्या मयंक क्यों नहीं । यह नई नई बातें मुझे मत सिखा बहू।ससुराल को अपना समझना तो तुम्हारा फर्ज है, लेकिन दामाद जी भी अपनी सास ससुर की प्रति अपना फर्ज निभाया यह कहां लिखा है । और कोई दामाद से लेता है क्या लड़की के यहां से पैसे लिए नहीं जाते  दिए जाते हैं । ठीक है मां आज समझ आ गया ससुराल की जिम्मेदारी उठाने सिर्फ बहू का काम होता है दामाद का नहीं। 

              पापा की कोई मदद ना कर पाने  पाने से मुक्ता बहुत अपने को असहाय समझ रही थी।।कैसा दोगला समाज है बेटियों को तो सारी जिम्मेदारी बताता है लेकिन बेटों को नहीं । उसने अपने मन को समझाया चलो कुछ नहीं देखते हैं आगे क्या होता है पापा जी तो उधर हाथ पैर मार रहे थे पैसे के लिए लेकिन पूरे पैसे इकट्ठे नहीं हो पा रहे थे । उन्होंने पत्नी का ऑपरेशन उसे बड़े अस्पताल में ना करा कर दूसरे छोटे अस्पताल में करने की सोची जो उनके पहुंच के अंदर हो। और जो पैसे इकट्ठे हो पाए इस में पूरा हो जाए। ताकि जिसे पैसे उधार लेंगे उनको वापस भी तो करना होगा पेंशन से ही बचा कर वापस करना पड़ेगा। 

         आज मुक्ता ने पापा को फोन किया हलो पापा, पापा मै पैसे का इंतजाम नहीं कर पा रही हूँ। कोई बात नहीं बेटा। मै कोशिश कर रहा हूँ इधर उधर हाथ पैर मार रहा हूँ कुछ न कुछ तो इंतजाम हो ही जायेगा। कुछ दोस्तों से उधार ले रहा हूँ और यदि पूरा न हो पाया तो तेरे माँ की सोने की चूडियां बेच दूँगा, उसी से हो जाएगा। अब उस मंहगे अस्पताल मे  आपरेशन न कराकर वो जो घर से थोड़ी दूर पर एक अस्पताल है न वही करा लूगां, वहाँ कम खर्चे मे हो जाएगा। पर पापा क्या वहाँ मम्मी का इलाज ठीक से हो पाएगा, अरे हां बहुत से लोग कराते है क्यों नहीं हो पायेगा। अब बडे अस्पतालों मे तो कमरे का हीरोज का चार पांच हजार रूपये लग जाते है, तो मैने सोचं लिया कि अब यही पर माँ का आपरेशन करवा लूगां। वैसे बेटा मै तुम दोनों से तो वैसे भी पैसा नहीं लेना चाहता था। बड़ी बेटी श्रद्धा तो वैसे ही नहीं मदद कर सकती बच्चों की पढ़ाई का बोझ है उसपर। पर तुमने बेटा कहा था कि मयंक से कुछ पैसे लेकर दे दोगी, तो मैन सोचा था चलो इस समय तो मदद हो जाएगी बाद मे मयंक के पैसे वापस कर दूंगा। लेकिन कोई बात नहीं है बेटा परेशान मत हो तुम मै देख लूगां। तू अपने ससुराल वालों का ध्यान रख बस। हां पापा चलो फोन रखती हूँ। 

           ‌ मुक्ता की मम्मी का ऑपरेशन हो गया।।दोनों बहनों की थोड़ी-थोड़ी देखरेख से अब हम मम्मी ठीक होने लगी थी। अब दोनों बहने अपने-अपने ससुराल आ गई थी। पापा की मदद ना कर पाने का मलाल तो मन में था ही मुक्ता केe फिर भी घर गृहस्ती सब चलती रही।ऐसे ही एक दिन मुक्ता मोबाइल चला रही थी। मयंक आज अभी तक आया नहीं था । आज लेट क्यों हो गया या फोन करूं क्या, तभी मयंक का फोन आ गया। हेलो मयंक अभी तक आए नहीं तुम। अरे मुक्ता पापा का एक्सीडेंट हो गया सिर में चोट आई है अस्पताल लेकर आया हूं । ऑपरेशन करना पड़ेगा डॉक्टर कह रहे हैं । अच्छा, अरे मुक्ता अस्पताल में तीन लाख जमा करने हैं अब अभी तो मेरे पास अभी इतने पैसे हैं नहीं। मै तो कुछ पैसे बचाकर सारे पैसे फिक्स कर देता हूँ।अभी निकाल नहीं सकता । और पापा से भी नहीं मिल सकता क्योंकि पापा बेहोश है।कुछ हो सकता है क्या देखती हूं। 

              इधर मयंक ने अपने दोस्तों को फोन कर करके कुछ पैसे इकट्ठे कर लिए थे। लेकिन 50000 अभी काम पढ़ रहे थे ।मयंक  मुक्ता को अस्पताल बुला  रहा था और बोला हो सकता है तो कुछ पैसे भी ले आना । मुक्ता ने अलमारी खंगाली तो सब मिलकर ₹7000 में निकले। मुक्ता ने सोचा क्यों करूं उसे सहेली पूजा का ख्याल आया।उसी से मांगती हूं एक हफ्ते में तो पैसे वापस कर दूंगी। पूजा को फोन लगाया हेलो पूजा  15000 चाहिए एक हफ्ते 10 दिन को जरूरी है यार अच्छा दे देती है । उसने मुक्ता को ट्रांसफर कर दिए कुछ पैसे सासू मां के पास से मिले  सब लेकर कुल मिलाकर 28000 रुपए लेकर मुक्ता अस्पताल पहुंची । मयंक इतने हो पाए हैं हां ठीक है ठीक है 20000 का मैं और इंतजाम कर देता हूं इसलिए मयंक के पापा का आपरेशन हो गया।

                   मयंक के पापा ऑपरेशन के बाद एक हफ्ते बाद ठीक होकर घर आ गए। लेकिन पापा को अभी देख रखी काफी जरूरत थी । तो मयंक ने पापा को तकलीफ ना देकर अपने बैंक से फिक्स पैसे तुडवाएं और जिसके लिए थे उसके पास वापस कर दिए। ₹15000 मुक्ता को दिए कि  अपनी सहेली को वापस कर दो। बहुत-बहुत धन्यवाद मुक्ता तुमने मुश्किल समय में ज्यादा नहीं तो थोड़ी सी मदद तो कि, मेरा काम रुका हुआ था। मैं तुम्हारा एहसान  मंद हूँ। अहसान किस बात का, मुक्ता बोली यह तो अपने है और अपनों को जो साथ होना तो हर मुश्किल आसान हो जाती है । इसी प्यार और अपने पन से परिवार चलता है। मयंक हां मुक्ता मैं समझने में गलती की तुम्हें ,जब तुम्हे जरूरत थी पैसे की मम्मी की ऑपरेशन के लिए तो मैं पीछे हट गया मुझे माफ कर देना मुक्ता। 

             देखो मयंक हमारा घर और तुम्हारा घर हम दोनों एक दूसरे का परिवार है ।।सुख दुख के साथी हैं। एक दूसरे के अपने हैं इसी तरह तो परिवार चलते हैं। और रिश्ते निभाते हैं। परिवार को आगे बढ़ाने में अपनों के साथ की बहुत जरूरत होती है। कोई बात नहीं कोई बात नहीं मयंक तुम्हें एहसास हुआ कि समय पर तुमने मेरी मदद नहीं की यही बहुत है। चलो पापा की दवाई देने का वक्त हो गया है। आगे से मै और तुम हमेशा एक दूसरे की मदद करने की कोशिश करेगें मुक्ता। हाँ मयंक और दोनों ने अपने मन से एक दूसरे के प्रति जो भी शिकायतें थी उसे दूर कर दिया। 

मंजू ओमर

झांसी उत्तर प्रदेश

4 अगस्त

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