*”तुम्हारा मायका तुम्हारे ससुराल से बढ़कर है क्या?”* – रानू जैन

सपना की शादी को तीन साल हो चुके थे। ससुराल वाले अच्छे थे, पर कभी-कभी बातों के बीच ऐसा ताना छूट जाता कि दिल को चुभ जाता। “बहुएँ मायके जाकर ऐश करती हैं” – ये वाक्य सपना ने कई बार सुना था। इस बार दीवाली से एक हफ्ते पहले उसे मायके जाने का मौका मिला। … Read more

बिखरे धागों की डोर – कंचन श्रीवास्तव 

 “पापा, जिंदगी बहुत छोटी है। हम साल में एकाध बार तो घर आते हैं, उसमें भी अगर आप लोग इन्हीं पुरानी बातों और जायदाद के झगड़ों को लेकर बैठे रहेंगे, तो हम यहां वापस आना ही छोड़ देंगे। हम बड़े शहरों में अकेले रहते हैं, हमें परिवार की अहमियत पता है। आप लोग साथ रहते … Read more

रिश्तों की अटूट छाँव – रणजीत सिंह भाटिया

मुझे कभी एक पल के लिए भी यह महसूस नहीं हुआ कि मेरा कोई बेटा नहीं है। जिस दिन आरती का रिश्ता पक्का हुआ, अविनाश और कुणाल ने आकर मुझे सोफे पर बैठा दिया और कहा, “जीजा जी, आरती हमारी भी बेटी है। आप सिर्फ आशीर्वाद दीजिए, बाकी मंडप से लेकर विदाई तक की सारी … Read more

मायके की दहलीज और बंदिशें

विवेक आज सुबह से ही बेहद खुश था। उसके चेहरे की रौनक और पैरों की थिरकन साफ बता रही थी कि उसके मन की कोई मुराद पूरी होने वाली है। वजह सिर्फ इतनी थी कि थोड़ी देर पहले ही उसकी पत्नी, काव्या ने अपने मायके जाने की बात कही थी। जब भी काव्या अपने माता-पिता … Read more

बहू का मायका – अनामिका मिश्रा

 शादी के सात साल बीत चुके थे, लेकिन इन सात सालों में अंजलि ने कभी खुद को पहले स्थान पर नहीं रखा। वह उस मध्यमवर्गीय संस्कार की उपज थी जहाँ सिखाया जाता है कि ‘सबकी खुशी में ही तुम्हारी खुशी है’। पिछले तीन सालों से वह अपने पिता के घर, यानी अपने मायके नहीं जा … Read more

तीसरी दस्तक: किस्मत का फैसला – रीता मक्कड़

  सरिता रसोई में बड़े ही जतन से दही और चीनी मिला रही थी। बाहर हॉल में चहल-पहल थी। आज उनकी सबसे छोटी बेटी, ईशानी, अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि की ओर कदम बढ़ाने वाली थी। वह आज शहर के जिला अस्पताल में ‘चीफ मेडिकल ऑफिसर’ के रूप में अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने वाली थी। … Read more

परिवार को जोड़े रखने की इच्छा ही परिवार बनाती है। – अंजना ठाकुर

रागिनी एक मिलनसार लड़की थी जरूरत पर सबके काम आना और आगे बढ़कर मदद करना उसकी आदत मैं शामिल था उसकी सहेली कहती आजकल ज़माना नहीं है बिना मतलब मदद करने का तू क्यूँ लगी रहती अपने काम से काम रख, पर रागिनी पर कुछ असर नहीं होता। रागिनी के घर मैं बड़ा भाई और … Read more

“परिवार की गर्माहट ” – कमलेश आहूजा

“बेटा,ले थोड़ा थोड़ा सरसों का साग अपने दोनों भाई भाभी को भी देकर आ।उन लोगों को मेरे हाथ का सरसों का साग बहुत पसंद है।”माँ की बात सुनकर नेहा को गुस्सा आ गया।बोली-“अब जब दोनों बहु बेटों ने अपनी अलग रसोई बना ली है तो फिर आप उनकी पसंद न पसंद का क्यों ख्याल रखती … Read more

परिवार – डाॅ संजु झा

परिवार मनुष्य की जिंदगी का वह मजबूत छत है,जिसके नीचे वह सुकून से रहता है। जिसे परिवार का सहयोग मिलता है,वह जिंदगी में असंभव को भी संभव बना लेता है। भोली-भाली राम्या की जिंदगी परिवार के सहयोग  के कारण  दूसरों के लिए उदाहरण बन गई।  राम्या की नौंवी की परीक्षा खत्म हो चुकी है।शाम के … Read more

*परिवार* – तोषिका

“ये घर, घर नहीं जेल लगता है और अगर मैं इस घर में थोड़ी देर और रही तो पता नहीं क्या हो जाएगा।” गुस्से में बिलबिलाती रिया बोली। तभी उसके ये शब्द सुनकर उसका पति कृष बोला “ये तुम क्या कह रही हो, ये घर तुम्हे जेल कब से लगने लगा?” “जब से इस घर … Read more

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