रिश्ते कभी खून के मोहताज नहीं होते

 उस दिन वंदना ने पूरे मोहल्ले में, हर एक घर में जाकर शुद्ध देसी घी के मोदक और मिठाइयां बांटीं। जब पड़ोसनों ने पूछा, “अरे वंदना, आज किस बात की इतनी खुशी है? सतीश भाई साहब के ठीक होने की या किसी और बात की?” तो वंदना ने गर्व से सिर उठाकर, नम आँखों से … Read more

पंखों को जब आसमान मिला

सावित्री की आंखों से बरसों का दर्द आंसुओं के रूप में बह निकला। उस दिन आंगन में केवल एक बेटी के भविष्य का फैसला नहीं हुआ था, बल्कि एक टूटे हुए रिश्ते में समझ, सम्मान और नए विश्वास की कोंपलें फूटी थीं। देवकी देवी ने भी जब बेटे और बहू की आंखों में एक नई … Read more

जड़ों की महक

शालिनी ने दोनों के पैर नहीं छोड़े। उसने रोते हुए कहा, “मुझे माफ कर दीजिए अम्मा जी, मुझे माफ कर दीजिए बाबूजी। आज मेरे गुस्से और मेरी नासमझी ने मुझे इतना अंधा कर दिया था कि मैं अपने ही परिवार की जड़ों को कबाड़ समझ बैठी। मुझे चोट सामान के कोने से नहीं लगी थी, … Read more

संस्कारों की बेड़ियां

 “अम्मा जी, हम आपका अनादर नहीं कर रहे हैं। आप हमारे घर का वटवृक्ष हैं, आपकी छाया में ही हम सब पले-बढ़े हैं। लेकिन वटवृक्ष वही अच्छा होता है जो नई कोपलों को पनपने की जगह दे, न कि उन्हें अपनी भारी छांव तले कुचल दे। पुराने ज़माने के वो नियम जो किसी की जान … Read more

संस्कार की छांव

अन्नपूर्णा जी ने अपने पल्लू के छोर से आंख का एक आंसू पोंछा। यह दुख का आंसू नहीं था, बल्कि तृप्ति और कृतज्ञता का मोती था। उन्होंने हाथ जोड़कर मन ही मन ठाकुर जी को नमन किया और बोलीं, “आप बिल्कुल सच कह रहे हैं। जब हम दूसरों को वही मान-सम्मान देते हैं जिसके हम … Read more

आत्मसम्मान की आवाज़

“बाबूजी… प्लीज, मेरी बात मान लीजिए। मत जाइए अंदर। आप प्रिंसिपल सर के सामने कुछ मत बोलना। आप सीधे-साधे हैं, आपको उनके कायदे-कानून नहीं पता। वो बहुत बड़े आदमी हैं। अंग्रेजी में बात करते हैं। मैं प्री-बोर्ड के दो विषयों में फेल हो गया हूँ, वो पहले ही बहुत नाराज हैं। अगर आपने कुछ उल्टा-सीधा … Read more

संस्कारों की बेड़ियां

“जीती रह बहू…” यशोदा जी की आवाज़ में पहली बार वो कठोरता नहीं, बल्कि एक बुज़ुर्ग का सच्चा आशीष था। उन्होंने शारदा की तरफ देखा और बोलीं, “शारदा, आज तूने मेरी आंखें खोल दीं। मैं सोचती थी कि नियमों को पकड़कर रखना ही घर को जोड़े रखना होता है, लेकिन आज समझ आया कि घर … Read more

संतान सुख 

एक छोटे से शहर में राजेश और मीरा नाम का दंपति रहता था। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। उनके घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी। अच्छा घर, अच्छी नौकरी और सुख-सुविधाओं के सभी साधन थे। लेकिन उनके जीवन में एक कमी थी, जो हर खुशी के बीच उन्हें अधूरा महसूस कराती … Read more

कोख की देवी

“मेरी बच्ची… मेरी लाडो… मुझे माफ कर दे बेटा…” देवकी अम्मा ने बच्ची को अपने सीने से चिपका लिया और फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने बच्ची के कोमल माथे को चूमा और सरला से बोलीं, “बहू, मुझे माफ कर दे। मेरी अक्ल पर पत्थर पड़ गए थे। तूने तो हमारे घर में साक्षात जगदम्बा को जन्म … Read more

मर्यादा एक बेटी का

 घर का मुख्य दरवाजा धीरे से खुला और भीतर दाखिल होते ही अलका के पैरों तले की जमीन खिसक गई। सामने फर्श पर उसकी सत्रह बरस की इकलौती बेटी तनीषा बेसुध पड़ी थी। बिखरे हुए सुनहरे रंगे बाल, चेहरे पर अस्त-व्यस्त हुआ गहरा मेकअप, एक हाथ में महंगी चमकती घड़ी और बदन पर पश्चिमी फैशन … Read more

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