रिश्ते कभी खून के मोहताज नहीं होते
उस दिन वंदना ने पूरे मोहल्ले में, हर एक घर में जाकर शुद्ध देसी घी के मोदक और मिठाइयां बांटीं। जब पड़ोसनों ने पूछा, “अरे वंदना, आज किस बात की इतनी खुशी है? सतीश भाई साहब के ठीक होने की या किसी और बात की?” तो वंदना ने गर्व से सिर उठाकर, नम आँखों से … Read more