वक्त की मार । – उमा वर्मा
साँझ का उजाला छिपने को है।अंधेरा अपने पैर पसारने के लिए तैयार है।खिड़की के पास खड़ी गायत्री अपने बीते दिनों को याद कर रही है ।वक्त की मार से वह भी कहाँ बच पायी है।बेटा अपने ससुराल गया है प्रिया को लिवाने।कई साल पीछे लौटी है गायत्री ।कितनी सुखी गृहस्थी थी उसकी । अच्छे पति … Read more