फर्ज की कीमत
“रहने दे अनु! अपनी सफाई अपने पास रख!” नंदिनी की आवाज में क्रोध और घृणा का ज्वार था। “मैंने तो तुझे अपनी सगी बहन मानकर अपने कलेजे के टुकड़े को तेरे भरोसे छोड़ा था। मुझे क्या पता था कि शहर की हवा और चार पैसों की नौकरी ने तेरा दिमाग इतना खराब कर दिया है … Read more