अधूरी कोख, मुकम्मल ममता
नंदिनी की उम्र बत्तीस साल हो चुकी थी और उसने यह मान लिया था कि उसकी ज़िंदगी की किताब में ‘परिवार’ नाम का पन्ना कभी नहीं जुड़ेगा। पुणे शहर की एक पुरानी और शांत कॉलोनी में पली-बढ़ी नंदिनी हमेशा से एक भरा-पूरा परिवार चाहती थी। लेकिन ज़िंदगी हमेशा वैसी नहीं होती जैसी हम उसे ख्यालों … Read more