फर्ज की कीमत

 “रहने दे अनु! अपनी सफाई अपने पास रख!” नंदिनी की आवाज में क्रोध और घृणा का ज्वार था। “मैंने तो तुझे अपनी सगी बहन मानकर अपने कलेजे के टुकड़े को तेरे भरोसे छोड़ा था। मुझे क्या पता था कि शहर की हवा और चार पैसों की नौकरी ने तेरा दिमाग इतना खराब कर दिया है … Read more

रिश्तों की गर्माहट

“अम्मा जी, जरा अपनी आँखें तो खोलिए… देखिए आज हमारे आंगन में कौन आया है,” मृदुला ने अपनी सासू माँ सावित्री देवी के कमरे का पर्दा हटाते हुए बेहद चहकते हुए स्वर में कहा। सावित्री देवी, जो अपनी आरामकुर्सी पर बैठी माला जप रही थीं, उन्होंने अपनी झुर्रियों भरी आँखों पर मोटे फ्रेम का चश्मा … Read more

बड़प्पन की सीख

वंदना जी ने तुरंत झुककर अपनी बहू को उठाया और अपने गले से लगा लिया। उन्होंने शिखा के आंसू पोंछते हुए कहा, “पगली, अगर मुझे निखिल या तुम्हारे पापा से कहकर घर में तमाशा खड़ा करना होता, तो मैं रात को ही कर देती। तुम इस घर की लक्ष्मी हो शिखा, तुम्हारा अपमान इस पूरे … Read more

इंसाफ़ की नई सुबह

 वंदना के गालों पर आंसू बह निकले। उसने रुंधे गले से कहा, “हां मेधा… कैसे भूल सकती हूं? पूरी कॉलोनी जानती थी कि ईशान एक पवित्र आत्मा है, पर कचहरी के कागज़ों में तो वह एक अपराधी बन चुका था। गोविंद ताऊ जी ने अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी, अपनी पेंशन, यहां तक कि शांति … Read more

अंजान राहों के हमसफ़र

शुरुआत में देवर और देवरानी ने भी इस पर सहज सहमति जताई थी, क्योंकि उनके पहले से ही एक बेटा था। लेकिन जब नौ महीने बाद देवरानी ने एक और स्वस्थ लड़के को जन्म दिया, तो ममता का आंचल बीच में आ गया। बच्चे का मासूम चेहरा देखकर माता-पिता का मन डोल गया। उन्होंने बच्चा … Read more

टांकों का दर्द

“आईने में अपनी सूरत देखी है पल्लवी? यह थुलथुल पेट, आंखों के नीचे काले घेरे और भद्दा सा शरीर… मेरे बेटे सौम्य के अब तुम किसी लायक नहीं रहीं। हमें तो बस हमारे वंश का वारिस मिल गया, अब सौम्य अगर बाहर किसी और औरत की तरफ आंख उठाकर देख भी ले, तो मैं उसे … Read more

धड़कते रिश्तों की हरी चुनरी

अनुज ने अपने जेब से वे चार सौ रुपये निकाले जो उसने सुबह अलका से मांगे थे, और उसमें अपनी तरफ से पांच हजार रुपये मिलाकर अम्मा के हाथों में रखते हुए कहा, “अम्मा, ये पैसे आपकी पेंशन के नहीं, आपके स्वाभिमान के हैं। और आज से इस घर का नियम बदलेगा। हर महीने हमारी … Read more

मिट्टी के रिश्ते

शारदा ने अपने पल्लू से विक्रांत के चेहरे को पोंछा, उसके उलझे हुए बालों में उंगलियाँ फेरीं और उसके माथे को चूमकर रोने लगी। “वीर, तू चिंता मत कर, तेरी दीदी आ गई है। तुझे कुछ नहीं होगा।” इस निस्वार्थ प्रेम के स्पर्श ने विक्रांत के भीतर जमे अहंकार के आखिरी पहाड़ को भी पिघला … Read more

कागज के टुकड़े

“मुझे माफ कर दो भैया,” कुणाल की आवाज में इतनी पीड़ा थी कि पत्थर का दिल भी पसीज जाए। “पैसे की चमक ने मेरी आंखों पर ऐसी पट्टी बांध दी थी कि मुझे आपके त्याग का अंधेरा दिखाई ही नहीं दिया। मैंने जिस दौलत के लिए अपने भगवान जैसे भाई का दिल तोड़ा, मां की … Read more

मिट्टी के घरौंदे

“कागज की नाव जब तक पानी के ऊपर तैरती है चित्रा, तब तक ही सबको सुंदर लगती है। जिस दिन वह पानी सोख कर भारी हो जाती है, बच्चे भी उसे किनारे छोड़ कर आगे बढ़ जाते हैं। औरत की ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही है, जब तक वह सबका बोझ उठाती है, वह ‘गृहलक्ष्मी’ … Read more

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