अपनों का आईना
शैलजा जी अपनी लाडली बेटी नीति के ससुराल से लौटकर घर की दहलीज पर कदम रख रही थीं, तो उनके माथे की लकीरें और चेहरे की तमतमाहट साफ बता रही थी कि अंदर कोई बड़ा ज्वालामुखी फूटने को तैयार है। उन्होंने अपना हैंडबैग सोफे पर लगभग पटकते हुए रखा और पल्लू से माथे का पसीना … Read more