अपनों का आईना

 शैलजा जी  अपनी लाडली बेटी नीति के ससुराल से लौटकर घर की दहलीज पर कदम रख रही थीं, तो उनके माथे की लकीरें और चेहरे की तमतमाहट साफ बता रही थी कि अंदर कोई बड़ा ज्वालामुखी फूटने को तैयार है। उन्होंने अपना हैंडबैग सोफे पर लगभग पटकते हुए रखा और पल्लू से माथे का पसीना … Read more

एक नई सुबह

 प्रतीक और मानसी के कदम ठिठक गए। राजेंद्र जी ने अपने कुर्ते की जेब से एक बड़ा सा खाकी रंग का लिफाफा निकाला और प्रतीक के हाथों में थमाते हुए बिल्कुल शांत स्वर में कहा, “बेटियां जब ससुराल जाती हैं तो उन्हें विदाई दी जाती है, आज हमारा बेटा अपनी नई दुनिया बसाने जा रहा … Read more

बदलते रिश्ते

“बहू, आज खाने में क्या बना रही हो?” रसोई के दरवाजे पर खड़ी निर्मला जी ने अपनी साड़ी का पल्लू कमर में खोंसते हुए अपनी नई-नवेली बहू नंदिनी से पूछा। उनकी आवाज में अधिकार की कड़क भी थी और गृहस्थी के पुराने अनुभवों की ठसक भी। रसोई के स्लैब पर बिखरी सब्जियों के बीच खड़ी … Read more

स्नेह की उड़ान”

अन्विता कुछ बोलने ही वाली थी कि चहक ने उसके होंठों पर उंगली रख दी और बोली, “आज आप कुछ नहीं बोलेंगी दीदी। आज तक आपने माँ और पापा बनकर मेरा भविष्य संवारा है, अब आपकी इस छोटी बहन की बारी है। अब मैं कमाऊंगी और आप सिर्फ अपने कैनवास पर अपने सपनों के रंग … Read more

अपनापन या सिर्फ़ ज़रूरत का हिसाब?

 “अरे रहने दे बहू!” निर्मला देवी ने हाथ झटकते हुए बात काट दी, “अपनी दीदी की इतनी ही सगी बन रही है तो साफ-साफ कह दे उनसे कि या तो इंटरनेट से मंगवा लें, या फिर जब खुद कभी यहां आएं तो अपनी पसंद से खरीद लें। दूसरों की फरमाइशें पूरी करने के लिए मैं … Read more

बेटियों के हिस्से का आसमान

कमला ताई की इस तीखी और कड़कड़ाती आवाज़ ने आँगन में खिलखिलाती हुई शाम को जैसे एक पल में बर्फ की तरह जमा दिया। सुरेश बाबू के हाथ में पकड़ा चाय का प्याला काँप उठा, और उनके घुटनों के पास बैठी उनकी लाडली बेटी अवनि के चेहरे की सारी चमक अचानक कहीं गायब हो गई। … Read more

दोहरे चेहरे

समीर ने हाथ उठाकर उन्हें बीच में ही रोक दिया। उसकी आंखों में आज गुस्सा नहीं, बल्कि गहरा दुख और पश्चाताप था। “बस कीजिए मां! भगवान के लिए अब यह अभिनय बंद कीजिए,” समीर की आवाज कांप रही थी। “मैं पिछले दस मिनट से बाहर खड़ा सब सुन रहा हूं। किस तरह आप लोग तन्वी … Read more

अपनत्व का आईना

 आर्यन ने अपने आंसू पोंछते हुए कहा, “चाची, हमें माफ कर दीजिए। हम बहुत गंदे हैं। हमने हमेशा आपकी डांट और रोक-टोक को आपकी नफरत समझा। हमने कभी यह देखने की कोशिश ही नहीं की कि उस सख्ती के पीछे एक मां का दिल छिपा है। आज अगर आप न होतीं, तो हम दोनों हार … Read more

शेरनी बेटी का प्रहार

 तेजस्विनी ने तुरंत अपने चेहरे पर घबराहट और रोने का नाटक किया। वह सिर झुकाए, अपने दुपट्टे के पल्लू को दोनों हाथों में समेटे, कांपते हुए कदमों से रसोई के दरवाजे से बाहर निकली। उसे देखकर नीलिमा जी का कलेजा मुंह को आ गया, वे मन ही मन भगवान से अपनी बेटी की रक्षा की … Read more

ममता का सौदा

“अरे, वो तो मेरी जान हैं जी! आरव और पलक तो मेरी दोनों आंखें हैं,” अनुराधा ने घबराकर स्पष्ट किया। “पर एक औरत होने के नाते अपनी कोख से संतान को जन्म देने का जो सुख होता है, मेरा मन भी उस सुख को पाने के लिए तड़पता है। हमारा एक और बच्चा आ जाएगा, … Read more

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