ममता का बँटवारा
मीरा के हाथों में मायके से आया वह लिफाफा किसी सूखे पत्ते की तरह कांप रहा था। खिड़की से छनकर आती दोपहर की उदास हवा उस पन्ने को फड़फड़ा रही थी, मानो वह कागज भी मीरा के सीने में उठते तूफान की गवाही दे रहा हो। उसकी आँखों से गिरती गर्म बूंदों ने खत की … Read more