ममता का बँटवारा

मीरा के हाथों में मायके से आया वह लिफाफा किसी सूखे पत्ते की तरह कांप रहा था। खिड़की से छनकर आती दोपहर की उदास हवा उस पन्ने को फड़फड़ा रही थी, मानो वह कागज भी मीरा के सीने में उठते तूफान की गवाही दे रहा हो। उसकी आँखों से गिरती गर्म बूंदों ने खत की … Read more

स्वाभिमान की छत

रात के खाने का समय हो चुका था, लेकिन घर में पसरा सन्नाटा किसी तूफान के आने का संकेत दे रहा था। डाइनिंग टेबल पर रखे खाने से उठती भाप धीरे-धीरे ठंडी हो रही थी। तभी बेडरूम से एक ज़ोरदार आवाज़ आई। कांच का एक गिलास ज़मीन पर गिरकर चकनाचूर हो गया था। “तुम्हें मेरी … Read more

समर्पण के अनकहे रंग: एक कामकाजी माँ की खामोश तपस्या

“कभी खुद को आईने में देखा है तुमने, मीरा? क्या हाल बना लिया है अपना। न बालों में कंघी करने का होश है, न ढंग के कपड़े पहनने का। आंखों के नीचे काले घेरे पड़ गए हैं और वजन तो जैसे बढ़ता ही जा रहा है। घर का हाल देखो, ऐसा लगता है जैसे कोई … Read more

सूने आँगन की छाँव

“समीर ने लंदन में खुद ही कोर्ट मैरिज कर ली है, रघुनाथ जी। ना हमसे कुछ पूछा, ना कोई बात की। बस एक मैसेज और दो तस्वीरें भेज दीं। क्या हम उसके जीवन में इतने गैर हो गए थे?” सुमित्रा जी की आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उनके हाथों में … Read more

सात समंदर पार का स्वार्थ

“राधिका, बाबूजी का फोन आया था। वो और माँ अगले महीने से हमारे पास मुंबई ही आ रहे हैं, हमेशा के लिए।” निखिल ने अपने लैपटॉप से नज़रें हटाते हुए, बहुत ही सामान्य स्वर में यह बात कही, मानो यह कोई रोज़मर्रा की बात हो। “हमारे पास? मतलब वो लोग हमेशा के लिए इसी फ्लैट … Read more

कुछ बन्धन तोड़ देना ही अच्छा होता है – डॉ बीना कुण्डलिया 

अमिता की शादी को अभी दो माह ही व्यतीत हुए थे । अमिता को अभी से अपनी जिंदगी पहाड़ सी लगने लगी । उसके ससुराल में सास ससुर, ननद, देवर देवरानी अच्छा खासा परिवार मिला उसको कोई कमी नहीं । देवर अपनी पसन्द से पहले ही विवाह कर दुल्हन घर ले आया था । देवरानी … Read more

पत्थर की छाँव में

बचपन से ही काव्या के लिए उसकी माँ, सुमित्रा, किसी तानाशाह से कम नहीं थीं। जहाँ दूसरी लड़कियाँ अपनी माँ के आँचल में छिपकर लाड़ लड़ाती थीं, उनके साथ सहेलियों की तरह बातें करती थीं, वहीं काव्या के हिस्से में सिर्फ नियम, अनुशासन और सख्त हिदायतें आई थीं। काव्या जब भी कोई नई फरमाइश करती, … Read more

रिश्तों की नई बुनियाद: एक पिता का सर्वोच्च धर्म

  शिखा , जो दरवाजे के पास खड़ी सब सुन रही थी, धीरे से कमरे में आई। उसकी आंखों में एक अजीब सी दृढ़ता थी। उसने अपने माता-पिता के हाथ पकड़े और आंसुओं को रोकते हुए कहा, “नहीं पिताजी, मैं आपके साथ वापस नहीं जा सकती। जिस दिन मेरा कन्यादान हुआ था, उसी दिन से यह … Read more

फ़र्ज़ की बेड़ियाँ

शाम के धुंधलके ने अभी घर के आँगन में कदम ही रखा था कि तभी अंदर के कमरे से एक ज़ोरदार आवाज़ आई। मीरा दौड़कर अपनी सास, शांति देवी के कमरे में पहुँची। शांति देवी ज़मीन पर बेसुध पड़ी थीं। उनके हाथ से पानी का गिलास छूटकर टूट चुका था। मीरा की साँसें जैसे गले … Read more

कच्चे धागे और अहंकार की दीवार

रिया के इन कड़वे और जहरीले शब्दों ने डाइनिंग टेबल पर एक गहरा सन्नाटा बिखेर दिया। हर कोई सन्न रह गया। मीरा, जिसने हमेशा अमन को अपने छोटे भाई या यूं कहें कि अपने बेटे की तरह माना था, उसके लिए यह आरोप किसी खंजर के घोंपे जाने से कम नहीं था। उसकी आँखों से … Read more

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