Emotional Kahaniya
संस्कारों की कद्र
“सुषमा जी, देखिए हमारे पंडित जी ने कहा है कि अगले महीने की पंद्रह तारीख का मुहूर्त सबसे उत्तम है। इसके बाद तो सीधा छह महीने तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। हम चाहते हैं कि शादी इसी मुहूर्त में हो जाए। आखिर हमें भी तो अपने रिश्तेदारों को जवाब देना होता है।” फोन के … Read more
दूसरा पिता – मुकेश पटेल
“बाबूजी! बाबूजी! बाहर बड़ी सी गाड़ी आकर रुकी है, शायद दीदी के होने वाले ससुर जी आए हैं!” बारह साल के रोहन ने हांफते हुए घर के छोटे से आंगन में आकर आवाज़ लगाई। आंगन में खटिया पर बैठे रमाकांत जी के हाथ से अख़बार छूट कर नीचे गिर गया। उनकी पत्नी सुशीला, जो रसोई … Read more
प्यार भरे झूठ का सहारा
“आरव, बेटा वो आखिरी गुलाब जामुन नानी का है। तुमने पहले ही दो खा लिए हैं, अब और नहीं।” मैंने अपने सात साल के बेटे को प्यार से डांटते हुए कहा। हम सब डाइनिंग टेबल पर बैठे थे और रात के खाने के बाद मीठे का आनंद ले रहे थे। लेकिन मेरे टोकने का कोई … Read more
एक बेटी के आत्मसम्मान की जीत
“मीरा, कल तू बैंक से छुट्टी ले लेना। कल शाम को वर्मा जी के बेटे वाले तुझे देखने आ रहे हैं। लड़का सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, पैकेज भी बहुत अच्छा है।” डाइनिंग टेबल पर खाना परोसते हुए सुशीला जी ने अपनी तीस वर्षीय बेटी से कहा। लैपटॉप पर अपनी कल की अहम मीटिंग की प्रेजेंटेशन तैयार … Read more
खोया हुआ सम्मान
मीरा का विवाह हुए चार वर्ष बीत चुके थे। इन चार सालों में उसने अपने ससुराल को इस कदर अपना लिया था कि मायके की यादों को उसने दिल के एक कोने में कहीं बहुत गहरे समेट कर रख दिया था। दिल्ली के इस बड़े से घर में हर कोई मीरा के काम और उसके … Read more
सम्मान और परवाह
शांति देवी के पैरों में पिछले पंद्रह दिनों से भयंकर सूजन थी। उम्र पचपन के पार हो चुकी थी और शरीर अब पहले की तरह फुर्तीला नहीं रहा था। लेकिन इकलौते बेटे रोहन की शादी थी, तो घर में बैठकर आराम करना भी मुमकिन नहीं था। हलवाई को राशन देने से लेकर रिश्तेदारों के सोने-बैठने … Read more
आदर्शों का मुखौटा
मेरी शादी को मुश्किल से एक साल हुआ था, जब मैं अपने पति रोहन के साथ इस नई कॉलोनी में रहने आई थी। नया शहर, नए लोग और एक बिल्कुल नया माहौल। शुरुआत में मुझे बहुत अकेलापन महसूस होता था। दिन भर घर के काम करने के बाद जब मैं शाम को बालकनी में बैठती, … Read more
खूबसूरत रिश्तें
सुलोचना जी आज सुबह से ही थोड़ी परेशान और घबराई हुई थीं। घर में सब कुछ सामान्य था, लेकिन उनका मन एक अजीब सी उलझन में फंसा था। उन्होंने अपने पति रमेश जी को आवाज़ दी, “सुनिए जी, कल छोटी बहू अंजलि के मम्मी-पापा आ रहे हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि नाश्ते और … Read more