लहू के रंग

 इतना सुनते ही दीनदयाल का पत्थर सा दिखने वाला चेहरा पिघलने लगा। उसकी आँखों के किनारे भीग गए। उसने अपनी कांपती हुई उंगलियों से अपनी आँखें पोंछीं और रुंधे हुए गले से बोला, “आपने सब सच पता कर लिया वकील साहब। हाँ, मेरा भाई बहुत बड़ा आदमी है। उसके पास आज गाड़ियां हैं, नौकर-चाकर हैं, … Read more

आखिरी पड़ाव का दु:ख

पिछले कुछ दिनों से मुआं पेशाब बहुत आ रहा है। रात को दो-तीन बार मुझे उठना पड़ता है। घुटनों के दर्द के कारण जान निकल जाती है मेरी ! मन करता है, कमरे के बाहर वाली नाली पर ही बैठ जाऊँ, पर बहू की झिड़कों से डरती नहीं बैठती। एक बार बैठी थी तो अगली … Read more

अनुपमा का प्रेम

  ”चाहै जिसे हाथ पकड़ा देने का नाम ही विवाह नहीं है। मन का मिलन न होने पर विवाह करना भूल है !” बड़ी बहू चकित होकर अनुपमा के मुंह की ओर देखती हुई बोली, ” हाथ पकड़ा देना क्या बात होती है? पकड़ा नहीं देंगे तो क्या ल़ड़कियां स्वयं ही देख-सुनकर पसंद करने के बाद … Read more

एक कठोर हृदय का पश्चाताप

 कांता बुआ ने पल्लवी के सिर पर हाथ फेरा और गहरी सांस लेते हुए बोलीं, “पल्लवी बिटिया, मैं पिछले दस दिनों से इस घर का तमाशा देख रही हूँ। तू दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह जुटी रहती है। मेरी बहन सुमित्रा की हर जायज-नाजायज मांग पूरी करती है। फिर भी उसके मुंह से तेरे … Read more

अनकहा इश्क़

शादी के बाद सिद्धार्थ ने अपनी ज़िम्मेदारियाँ तो पूरी कीं, लेकिन वह अपना दिल अनुराधा को कभी नहीं दे पाया। उसने अनुराधा के साथ एक समझौता सा कर लिया था। उसे लगता था कि वह काव्या के सपनों को अनुराधा पर थोप कर अपनी कसक मिटा रहा है। काव्या का सपना था कि उसका पति … Read more

खामोश चीख

 “किस मिट्टी की बनी हुई हो तुम शिखा?” अविनाश की आवाज अब शांत थी, लेकिन यह उस तूफान के बाद की शांति थी जो सब कुछ तबाह कर चुकी थी। “इतने सालों से मैं तुम्हें बर्दाश्त कर रहा हूं। तुम्हारी हर महत्वाकांक्षा, तुम्हारी हर आज़ादी का मैंने जश्न मनाया है। मैंने तुम्हारी हर जिद, हर … Read more

इंतज़ार के वे खामोश पल

“साहब, बुढ़ापा बहुत अजीब होता है। इंसान का शरीर तो बूढ़ा हो जाता है, लेकिन उसका दिल बिल्कुल एक छोटे बच्चे जैसा हो जाता है। जैसे बच्चों को हर वक़्त प्यार, दुलार और अपनेपन की ज़रूरत होती है, वैसे ही इन बुजुर्गों को भी होती है। पैसे से आप इनके लिए अच्छा बिस्तर तो ला … Read more

सुहाग की निशानी: एक अनकहा बलिदान

मेरे बुटीक में पिछले पांच सालों से काम करने वाली रमा सिर्फ मेरी कर्मचारी नहीं, बल्कि मेरे परिवार के एक सदस्य जैसी हो गई थी। रमा के हाथों में जादू था। वह कपड़ों पर कढ़ाई का ऐसा बारीक और खूबसूरत काम करती थी कि बड़े-बड़े डिज़ाइनर भी उसकी कला के आगे फीके पड़ जाएं। वह … Read more

एकांत की पूर्णता

 शशांक क्यों आ रहा है? क्या वह सुजाता से प्रेम करता है? नहीं। वह अपनी सफलता के अहंकार में डूबा हुआ है। वह यह साबित करने आ रहा है कि उसका जाना सही था। वह सुजाता को अपनी उपलब्धियों के माध्यम से ‘उपकृत’ करने आ रहा है। शशांक यह सोच रहा है कि सुजाता आज … Read more

सात समंदर पार का सन्नाटा

 रोहन की बात सुनकर देवकी के पास कहने को कुछ नहीं बचा था। रोहन ने कुछ गलत नहीं कहा था। उसने वही किया जो उसकी माँ ने उसे सिखाया था। देवकी ने ही उनके कोमल मनों में यह बात डाली थी कि विदेशी सरजमीं ही सफलता का आखिरी मुकाम है। उसने बच्चों को उड़ना सिखाया, … Read more

error: Content is protected !!