अपनी तरह मुझे भी “सहारा” बना लीजिए !! – मीनू झा 

आज भी काफी मन लगाकर काम कर रही है देखना शाम तक जरूर फिर पांच सौ रूपये की डिमांड आ जाएगी। मैं तो तंग आ गई इनको काम के लिए रखकर दिमाग खराब कर देती है हर आठवें दिन–पति मोहन के लिए ब्रेकफास्ट प्लेट में लगाते लगाते मीरा बड़बड़ाए जा रही थी। अच्छा.. लगता है … Read more

“एक दूजे के सहारे रिश्ते प्यार भरे” – कविता भड़ाना

“प्रिया”, “प्रिया”…. बेटा कहां हो? पुकारती हुई सुलभा जी ने देखा की उनकी नई नवेली बहुरानी ड्राइंग रूम में बैठी ऊंघ रही है….. दिसंबर महीने की कड़कड़ाती ठंड में 5बजे उठ कर नहा धोकर तैयार बैठी अपनी बहु को देख सुलभा जी को बड़ा प्यार आ रहा था, उन्होंने धीरे से जाकर प्रिया को जगाया … Read more

बहुत कर लिया बर्दाश्त  –  ज्योति आहूजा

आज सुधा अपनी जिंदगी का वह हिस्सा फिर से याद कर बैठी जिसमें  वह इतनी कमजोर और लाचार थी कि आज भी वह समा उसके जहन में कड़वी याद के रूप में उभर कर सामने अा गया। “बात उन दिनों की है जब सुधा जीवन के उस मोड़ पर थी जब वह ना तो बच्ची … Read more

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