Emotional Kahaniya
संस्कार के बीज
रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे। पैंसठ वर्षीय सुमित्रा देवी अपनी पंसदीदा किताब के कुछ पन्ने पलट कर बस सोने की ही तैयारी कर रही थीं। उनका यह पच्चीस सौ स्क्वायर फुट का दो मंजिला घर, जिसे उन्होंने अपने पति के गुजर जाने के बाद अपनी पाई-पाई जोड़कर बनाया था, अब उनकी एकांत दुनिया … Read more
दिल के रिश्ते
“अनन्या, उठो। लगता है नीचे अंकल की तबीयत ज्यादा खराब है,” सिद्धार्थ ने अपनी पत्नी को जगाते हुए कहा। दोनों दौड़कर नीचे गए। देवकी जी ने रोते हुए दरवाजा खोला। अंदर रमाकांत जी सीने पर हाथ रखे सोफे पर गिरे हुए थे और उन्हें सांस लेने में भयंकर तकलीफ हो रही थी। उनका चेहरा पसीने … Read more
मेरी बेटियां बोझ नहीं है
“भाभी, मैं हाथ जोड़कर विनती करती हूँ कि मेरी बच्चियों को इस तरह मनहूस और बोझ कहना बंद कर दीजिए। जब मुझे और इनके पिता को इनका कोई भार नहीं लगता, तो आप लोग क्यों इनके भविष्य की चिंता में अपना खून जला रही हैं?” सुमेधा ने अपनी तीन छोटी-छोटी बेटियों को सीने से चिपकाते … Read more
गिरवी रखा हुआ मकान
“पापा कहाँ हैं माँ?” घर की दहलीज पर कदम रखते ही सुमित ने अपनी माँ, सुलोचना जी से पूछा। उसके चेहरे पर एक अजीब सी थकावट और आँखों में एक छिपी हुई उलझन थी। सुलोचना जी बरामदे में बैठी स्वेटर बुन रही थीं। उन्होंने सुमित की आवाज़ सुनकर एक बार नज़र उठाई, लेकिन अगले ही … Read more
दुख का भारी पत्थर
आज माधवी और राघव की शादी की पच्चीसवीं सालगिरह—सिल्वर जुबली—थी। पिछले एक हफ्ते से दोनों के बच्चे, आर्यन और शिखा, इस पार्टी की तैयारियों में दिन-रात एक किए हुए थे। शहर के सबसे बड़े बैंक्वेट हॉल से लेकर मेहमानों की लिस्ट तक, सब कुछ तय हो चुका था। माधवी अपने कमरे में आईने के सामने … Read more
सच्चा प्यार और साथ
दीपावली के दीयों की तरह ही उस दिन घर का कोना-कोना जगमगा रहा था, जब विशाखा पहली बार नई नवेली दुल्हन बनकर इस घर की दहलीज पार कर रही थी। विशाखा और सुशांत का विवाह दो परिवारों का ही नहीं, बल्कि दो जिम्मेदार और परिपक्व इंसानों का मिलन था। सुशांत का परिवार काफी बड़ा था। … Read more
खोई हुई ममता वापस मिल गई
रमा दरवाजे के पास खड़ी सब सुन रही थी। एक माँ के इस दर्द ने उसके दिल को चीर कर रख दिया। उसी पल रमा ने एक ऐसा फैसला लिया जो कोई सगा भी शायद ही लेता। उसने तय किया कि जब तक ‘माजी’ (सावित्री देवी) ठीक नहीं हो जातीं, वह उन्हें छोड़कर कहीं नहीं … Read more
अनकही शांति
रात के करीब दस बज रहे थे। नवंबर की हल्की ठंड ने दस्तक दे दी थी। समीर अपने ऑफिस का लैपटॉप बंद करके जब अपने बेडरूम में दाखिल हुआ, तो सामने का नज़ारा देखकर उसके कदम ठिठक गए। उसकी पत्नी, राधिका, उनके डबल बेड के ठीक बगल में ज़मीन पर एक मोटा गद्दा बिछा रही … Read more