ममता की बगावत

“अब यह मेरे साथ रहेगा!” मीरा ने कबीर को गोदी में उठाते हुए एक सख्त आवाज में कहा। “तू इसे कहीं नहीं ले जा सकती! मैं पुलिस बुला लूंगा! तुझे जेल भिजवा दूंगा, चरित्रहीन औरत!” राहुल ने चिल्लाते हुए मीरा का हाथ पकड़ने की कोशिश की। मीरा ने राहुल का हाथ झटक दिया और उसकी … Read more

रिश्तों का बाज़ार

आकाश और रिया के बीच दूरियां इतनी बढ़ गईं कि दोनों एक ही छत के नीचे अजनबियों की तरह रहने लगे। दोनों के बीच कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं था। एक दिन आकाश को रिया के फोन में उसके किसी पुराने दोस्त के साथ हुई कुछ ऐसी चैट्स मिल गईं जो उसे नागवार गुजरीं। उसने शराब … Read more

अनकहे रिश्ते

 जब वह लाल जोड़े में सजी, रोते हुए गाड़ी में बैठ रही थी, तो उसकी नज़रें भीड़ में मुझे ही तलाश रही थीं, लेकिन मैं एक खंभे के पीछे छिप गया था। मैं उसे अलविदा कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था। आज उसकी शादी को छः महीने बीत चुके हैं। कल ही वह पहली … Read more

अपनों के आँसू

सुमित के ये शब्द मेरे कानों में सीसे की तरह पिघल कर गिर रहे थे। मैं कुछ जवाब देने ही वाला था कि तभी फ्लैट की घंटी बजी। सुमित ने उठकर दरवाज़ा खोला। मैं भी उसके पीछे-पीछे हॉल में आ गया। शिखा भी किचन से बाहर आ गई थी। दरवाज़े पर जो शख्स खड़ा था, … Read more

एक अधूरी विदाई

यह सुनकर काव्या के आंसू छलक पड़े थे। यह खुशी के आंसू थे। बारह सालों की तपस्या पूरी होने वाली थी। कल रात भर वह सोई नहीं। उसने पूरा घर साफ किया, विवान की पसंद का गाजर का हलवा बनाया और अपनी उस लाल साड़ी को निकालकर इस्त्री किया जो विवान को बहुत पसंद थी। … Read more

दरकती दीवारें और मीठा ज़हर

इन तीखे शब्दों में सुभद्रा के चोटिल अहंकार और अपनी बात न रखे जाने का मलाल साफ झलकता था। नीता उनकी आँखों में हमेशा एक खटकने वाले कांटे की तरह रही। भले ही नीता कितनी भी समझदारी और सलीके से घर का काम कर ले, सुभद्रा के मुँह से उसके लिए कभी प्रशंसा का एक … Read more

एक माँ का इंतज़ार

देहरादून की शांत वादियों के बीच बसा वह बड़ा सा पुश्तैनी घर अब और भी ज्यादा खामोश लगने लगा था। साठ साल की शांति देवी रोज़ सुबह उठकर सबसे पहले उस पुरानी लकड़ी की आराम कुर्सी को साफ करती थीं, जिस पर बैठकर कभी उनके पति अखबार पढ़ा करते थे। घर के हर कोने में … Read more

कोख का नहीं, दिल का रिश्ता

 आज निशा  और समीर की शादी की पांचवीं सालगिरह थी। पूरा घर फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजा हुआ था। ड्रॉइंग रूम में रखी मेज पर एक शानदार केक रखा था, जिसके पास ही समीर की तरफ से लाया गया एक महंगा तोहफा भी था। सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी इस घर में। समीर … Read more

 दो आंगनों की दहलीज

शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की सीढ़ियां उतरते हुए अर्चना  के पैर मन से भी ज्यादा भारी हो रहे थे। उसके कपड़ों में अब भी अस्पताल की वो अजीब सी गंध बसी हुई थी—दवाइयों, स्पिरिट और फिनाइल की मिली-जुली गंध। ऑटो में बैठकर पूरे रास्ते वह शून्य में ताकती रही। उसकी आंखों के सामने … Read more

दिखावे की चाशनी – मीनाक्षी चौहान 

हमारी इस नई कॉलोनी में शिफ्ट हुए मुश्किल से एक महीना ही बीता था, लेकिन मेरी सास, सावित्री देवी जी, और सामने वाले फ्लैट की विमला आंटी के बीच जो दोस्ताना परवान चढ़ा था, उसे देखकर ऐसा लगता था मानो वो पिछले जन्म की सहेलियाँ हों। हमारे फ्लैट्स की बालकनी एक-दूसरे के बिल्कुल आमने-सामने थीं। … Read more

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