सच्चा प्यार और साथ

दीपावली के दीयों की तरह ही उस दिन घर का कोना-कोना जगमगा रहा था, जब विशाखा पहली बार नई नवेली दुल्हन बनकर इस घर की दहलीज पार कर रही थी। विशाखा और सुशांत का विवाह दो परिवारों का ही नहीं, बल्कि दो जिम्मेदार और परिपक्व इंसानों का मिलन था। सुशांत का परिवार काफी बड़ा था। … Read more

खोई हुई ममता वापस मिल गई

रमा दरवाजे के पास खड़ी सब सुन रही थी। एक माँ के इस दर्द ने उसके दिल को चीर कर रख दिया। उसी पल रमा ने एक ऐसा फैसला लिया जो कोई सगा भी शायद ही लेता। उसने तय किया कि जब तक ‘माजी’ (सावित्री देवी) ठीक नहीं हो जातीं, वह उन्हें छोड़कर कहीं नहीं … Read more

अनकही शांति

रात के करीब दस बज रहे थे। नवंबर की हल्की ठंड ने दस्तक दे दी थी। समीर अपने ऑफिस का लैपटॉप बंद करके जब अपने बेडरूम में दाखिल हुआ, तो सामने का नज़ारा देखकर उसके कदम ठिठक गए। उसकी पत्नी, राधिका, उनके डबल बेड के ठीक बगल में ज़मीन पर एक मोटा गद्दा बिछा रही … Read more

अटूट प्रेम

सुमित्रा देवी दौड़कर कमरे में आईं और अपनी बहू के कदमों के पास बैठकर उसे गले से लगा लिया। “मुझे माफ़ कर दे मेरी बच्ची। तूने आज साबित कर दिया कि माँ की ममता और एक औरत का विश्वास किसी भी विज्ञान की मोहताज नहीं होती। अब से तू नहीं, मैं तेरा पूरा ध्यान रखूंगी।” … Read more

रिश्तों की खूबसूरत डोर

उस रात कांता देवी बहुत देर तक सो नहीं पाईं। वे करवटें बदलती रहीं और पिछले एक साल का हर वो पल याद करती रहीं जब उन्होंने मीरा को बेवजह टोका था और मीरा ने बदले में सिर्फ एक शांत मुस्कान देकर बात टाल दी थी। उन्हें अहसास हुआ कि अगर मीरा चाहती तो हर … Read more

गुरु दक्षिणा

लंदन के एक प्रतिष्ठित अस्पताल से कार्डियोलॉजी में अपनी मास्टर्स की डिग्री और गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद, जब डॉक्टर सुशांत पूरे छह साल बाद भारत लौट रहे थे, तो उनके घर में किसी बड़े त्योहार जैसा माहौल था। सुशांत की माँ, कावेरी देवी की छाती गर्व से चौड़ी हो गई थी। हो भी … Read more

रिश्तों की छांव  

“चुप कर मुर्ख!” दीदी ने माधव की बात बीच में ही काट दी। उन्होंने अपने पल्लू की गांठ खोली और उसमें से एक छोटी सी कपड़े की पोटली निकाली। वो पोटली उन्होंने माधव के हाथों में रख दी। “इसमें मेरी कुछ एफडी (Fixed Deposit) के कागज़ात हैं और मेरे कुछ पुराने गहने हैं जो मैंने … Read more

बेटियां सिर्फ़ मायके से लेने नहीं आती हैं

दोपहर के तीन बज चुके थे। रितिका ने अभी-अभी घर के सारे काम निपटाए थे और वह अपनी कमर सीधी करने के लिए बिस्तर पर लेटी ही थी कि दरवाजे की घंटी जोर से बज उठी। एक बार, दो बार और फिर लगातार बजती ही रही। ऐसा लग रहा था जैसे बाहर खड़े इंसान ने … Read more

अटूट धागा

अंजलि फूट-फूट कर रोने लगी। उसने स्नेहा को गले लगा लिया। रोहन की आँखों से भी अश्रुधारा बह निकली। स्नेहा ने रोहन का हाथ पकड़कर कहा, “भइया, दुनिया के लिए मैं कितनी भी बड़ी अफसर क्यों न बन जाऊं, लेकिन आपके बिना मेरी हर पहचान अधूरी है। मेरी शादी के मंडप में मेरा कन्यादान सिर्फ … Read more

 जीवनसाथी

कैलाश बाबू ने लैंडलाइन का रिसीवर जैसे ही क्रैडल पर रखा, उनके चेहरे पर एक पुरानी, जानी-पहचानी मुस्कान तैर गई। उनके मुंह से आदतन और बड़े ही उत्साह के साथ निकला, “अरे सावित्री, सुन रही हो? लखनऊ से अपने रमेश बाबू का फोन था, उनकी छोटी बेटी की शादी तय हो…” शब्द उनके होंठों पर … Read more

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