दो टूटे हुए दिल
अनन्या शीशे के सामने बैठी अपनी परछाई को एकटक निहार रही थी। आज वह फिर से लाल जोड़े में सजी थी। माथे पर सजी बिंदी, हाथों में रची मेहंदी और बालों में लगे मोगरे के फूलों की महक—सब कुछ वैसा ही था जैसा पाँच साल पहले था। लेकिन इस बार उसके मन का कोलाहल उस … Read more