रिश्तों की कीमत – तृप्ति देव
कहते हैं कि घर तब तक घर नहीं बनता जब तक उसमें निस्वार्थ प्रेम की सांसें न गूंजें। गाँव के आखिरी छोर पर बनी एक जर्जर मिट्टी की झोपड़ी सिर्फ एक ढहती हुई छत नहीं, बल्कि एक अटूट रिश्ते की गवाह थी। उस आंगन में नीम के पेड़ के नीचे बंधी रहती थी— “गौरी”। सफेद … Read more