आँगन की धड़कन – सावित्री मल्होत्रा
देवेन्द्र बाबू के घर में उस दिन दीवाली जैसा माहौल था, हालांकि त्योहारों का मौसम अभी मीलों दूर था। उनके दो बेटों, समर और संकल्प के जन्म के पूरे पांच साल बाद घर में एक नन्ही किलकारी गूंजी थी। अस्पताल के उस छोटे से कमरे में जब नर्स ने गुलाबी तौलिये में लिपटी एक नन्ही … Read more