एक नया सवेरा

“मां जी, मेरी अपने घर पर तफ्सील से बात हो गई है। मेरे बाबूजी और परिवार वाले इस रिश्ते के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्हें कोई भी आपत्ति नहीं है। बस अब आप किसी तरह काव्या को समझा लीजिए…” अभिनव ने बहुत ही संकोच लेकिन एक गहरे विश्वास के साथ सुभद्रा जी से … Read more

डर – बालेश्वर गुप्ता

      पापा- पापा, अगले शुक्रवार को सुबह सुबह हम सब कश्मीर घूमने के लिए चल रहे हैं,आप वहां के हिसाब से कपड़े रख लेना।मैने वहां सब व्यवस्था कर दी है,यहां से फ्लाइट से श्रीनगर वहां कार बुक कर दी है,होटल बुक हो गये है।       एक सांस में मुन्ना ने बड़े ही उत्साहित रूप में सब कुछ … Read more

बेइंतहा दर्द – मंजू ओमर

मां आपका सूटकेस तैयार है और आपने अपनी दवाइयां रख ली, लेकिन बेटा हम जा कहां रहे हैं, इतना सामान की क्या जरूरत थी हम तो मंदिर में दर्शन करने को जा रहे थे ना, आज वह तेरे पिताजी की वरसी थी तो मैंने सोचा मंदिर में दर्शन कर ले और वहां गरीबों को कुछ … Read more

दो लिफाफे – लतिका श्रीवास्तव 

हॉस्पिटल से घर लौटने के बाद बड़े बेटे संजीव ने पिता श्रीकांत के हाथ में एक मोटा लिफाफा रख दिया। “पापा, इसमें पचास हजार रुपये हैं। आगे दवाइयों और ज़रूरतों में काम आएँगे।” उसी समय छोटे बेटे आशीष ने भी एक छोटा-सा लिफाफा पिता की ओर बढ़ाया। श्रीकांत दोनों लिफाफों को देर तक देखते रहे। … Read more

गलती या महापाप – रिंकी अग्रवाल ‘प्राची’

अम्मा मुझसे अब नहीं चला जाता हांडा लेकर। बारातों में बहुत-बहुत दूर चलना पड़ता है। नाचने गाने में ही लगे रहते हैं रिश्तेदार। आगे ही नहीं बढ़ने देते। पांचवा महीना चल रहा है मेरा। इतना तेज संगीत और कानफोडू डीजे। मुझे तो डर लगता है कही बच्चों को कुछ नुकसान ना हो जाए। गर्भवती पिंकी … Read more

 अतीत का कर्ज

शहर के सबसे प्रतिष्ठित और रसूखदार सेठ रघुनाथ दास की हवेली में आज सुबह से जो शहनाइयाँ गूँज रही थीं, वे अब हृदय विदारक चीखों में तब्दील हो चुकी थीं। पूरा घर सफेद चादरों से ढँक गया था और हवेली के विशाल प्रांगण में एक अजीब सा, डरावना सन्नाटा पसरा था, जिसे केवल औरतों के … Read more

प्यार की दीवार

अंजलि बिना झिझक के अपना क्रेडिट कार्ड निकाल कर राहुल की तरफ खिसका देती थी। पिछले छह महीनों में ऐसा कई बार हुआ था। कभी राहुल का रेंट, कभी उसकी बाइक की ईएमआई, तो कभी उसके दोस्तों के साथ पार्टी का बिल। अंजलि को लगता था कि प्यार में ये सब चलता है। आखिर राहुल … Read more

रिश्तों की जमापूंजी – खुशी

राधिका एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की थी जिसके पिताजी पुजारी थे।राधिका देखने में अच्छी या सुंदर नहीं थी।पहली शादी में दो महीने बाद ही तलाक हो कर वो अपने पिता के घर आ गई।बाकी भाई बहन वेल सेटल्ड थे और वो राधिका का ध्यान भी रखते थे। राधिका ने वापस आ कर कंप्यूटर कोर्स किया … Read more

“रिश्तों की जमा-पूंजी ” – कमलेश आहूजा

सरोज के लिए दिवाली की वह रात खुशियों की रात थी,जब उसका बेटा, बहू और पोती चार वर्ष बाद विदेश से लौटे थे।कब से बेचारी इस घड़ी का इंतजार कर रही थी। कहने को वह भरे-पूरे परिवार में रह रही थी, पर पिछले कई वर्षों से हर दिवाली पर खुद को बहुत अकेला महसूस कर … Read more

*रिश्तों की जमा – पूंजी* – तोषिका

“अब तो तू बड़ा हो गया है, तेरे लिए भी लड़की ढूंढना शुरू कर रहे है, तेरे मम्मी पापा।” सिर पर हाथ फेरती हुई विकास की दादी रजनी बोली। तभी पीछे से विकास के पिता जी आए और बोले “जी मां, ढूंढना तो शुरू कर दिया है। कुछ लड़कियां है जो मैने और विकास की … Read more

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