गुणों का रंग – गरिमा चौधरी
** “क्या एक सांवली लड़की की डिग्रियां उसके रंग के आगे फीकी पड़ जाती हैं? और क्या लाखों का पैकेज लेने वाला प्राइवेट नौकरी का बेटा सरकारी चपरासी से भी कमतर है? पढ़िए समाज के उस दोहरे मापदंड की कहानी जिसने दो होनहार दिलों को एक ऐसे कटघरे में खड़ा कर दिया जहाँ फैसला गुणों … Read more