रिश्ते पैसों से नहीं बनते – रानू जैन

मनीषा की शादी को अभी 6 महीने ही हुए थे। ससुराल में सास शांति देवी, पति अमन और देवर यकीन थे। शांति देवी मोहल्ले में मशहूर थीं – साफ दिल, थोड़ी कड़क और हिसाब की पक्की।  शादी के पहले ही दिन शांति देवी ने दहेज का सामान देखा – फ्रिज, टीवी, सोना। फिर मनीषा का … Read more

रिश्ते पैसों से नहीं संस्कार से निभते हैं | – सुदर्शन सचदेवा

बरसों पुराना वह घर आज भी वैसा ही था। आँगन के बीचों-बीच खड़ा नीम का पेड़, बरामदे में रखी लकड़ी की पुरानी कुर्सी, तुलसी के चौरे पर जलता दीपक… सब कुछ पहले जैसा। यदि कुछ बदल गया था, तो वह था घर का शोर। जहाँ कभी बच्चों की हँसी गूँजती थी, वहाँ अब सन्नाटा अपनी … Read more

 रिश्तों के बंद दरवाज़े 

सावित्री देवी के झुर्रियों वाले हाथों में एक अजीब सी फुर्ती थी। पिछले पंद्रह दिनों से उनके पैरों में जैसे पहिए लगे हुए थे। मौका ही कुछ ऐसा था—उनकी सगी छोटी बहन सुमित्रा के इकलौते पोते, रोहन की शादी थी। शादी जयपुर के एक बड़े और आलीशान रिसॉर्ट में तय हुई थी, जिसे आजकल के … Read more

अनकहे वात्सल्य

राधिका जब ब्याह कर ‘आनंद भवन’ में आई थी, तो उस घर की भव्यता से ज्यादा वहां के कड़े अनुशासन ने उसे डरा दिया था। शहर के नामी और प्रतिष्ठित ‘शर्मा परिवार’ की बहु होना कोई आसान बात नहीं थी। घर की हर चीज़ घड़ी की सुई के साथ चलती थी। और इस पूरे घर … Read more

वो अनकही लकीर

 उनके गालों पर एक आँसू लुढ़क आया था। यह आँसू इस बात का नहीं था कि उन्हें खाने के लिए फल नहीं मिले। दर्द की चुभन उन फलों की कमी की नहीं थी। पीड़ा तो इस बात की थी कि वह घर, जिसे उन्होंने अपनी जवानी के खून-पसीने से सींचा था, आज उसी घर में … Read more

रिश्तों की जमा पूंजी – सुदर्शन सचदेवा

शहर के एक छोटे से घर में रहने वाले किशन जी अक्सर कहा करते थे, “बैंक की जमा पूंजी कभी भी खत्म हो सकती है, लेकिन रिश्तों की जमा पूंजी जितनी बाँटो, उतनी ही बढ़ती जाती है।” उनका एक बेटा था  सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी। फिर भी  किशनजी की सबसे बड़ी खुशी धन-दौलत … Read more

रिश्ते पैसों से नहीं संस्कार से निभते है – ऋतु अग्रवाल

शहर के सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपति हरिनारायण अग्रवाल सेठ का नाम सम्मान से लिया जाता था। करोड़ों की संपत्ति, कई फैक्ट्रियाँ और आलीशान हवेली… किसी चीज़ की कमी नहीं थी। लेकिन किस्मत ने कई अनहोनी भी कर दी थी पत्नी की देहांत एक लंबी बीमारी के चलते हो गया  था | इकलौता बेटा धनंजय और उसकी … Read more

 रिश्तों की गर्माहट

  कल रात ही राधिका की ननद, काव्या, अपने पति और दो छोटे बच्चों के साथ मायके आई थी। घर में मेहमानों के आने से रौनक तो बहुत थी, लेकिन काम भी दोगुना हो गया था। रात को सबको खाना खिलाते, बच्चों को सुलाते और रसोई समेटते-समेटते राधिका को रात के दो बज गए थे। और … Read more

मायके की दौलत का गुरूर

शहर के जाने-माने उद्योगपति सेठ दीनदयाल के आलीशान ड्रॉइंग रूम में उनकी इकलौती बेटी काव्या के रिश्ते की बात चल रही थी। काव्या अपने कमरे के दरवाज़े के पास खड़ी होकर सब सुन रही थी। तभी उसके चाचा, कैलाश ने एक गहरी मुस्कान के साथ दीनदयाल जी से कहा, “हाँ भैया, लड़के के माता-पिता भी … Read more

पत्नी का सम्मान

काव्या इकलौती संतान थी। बचपन से ही उसे अपना कमरा, अपनी किताबें, अपने कपड़े और अपनी हर एक चीज़ को बेहद सहेज कर रखने की आदत थी। उसकी डिक्शनरी में ‘शेयरिंग’ यानी चीज़ें साझा करने का कोई खास महत्व नहीं था। उसकी शादी सुमित से हुई, जो एक बहुत बड़े और खुशहाल संयुक्त परिवार का … Read more

error: Content is protected !!