रिश्तों का तराजू – गरिमा चौधरी
*जब समर्पण का मूल्य केवल एक तरफ से चुकाया जाए, तो वह रिश्ता नहीं, सौदा बन जाता है। क्या एक पत्नी का धर्म सिर्फ पति के माता-पिता की सेवा करना है, जबकि पति उसके माता-पिता का हाल तक न पूछे?* — “मैं तुलना नहीं कर रही समीर, मैं समानता मांग रही हूँ,” रागिनी ने कहा। … Read more