मृगतृष्णा

गुलमोहर अपार्टमेंट्स की ग्यारहवीं मंजिल पर रहने वाली सिम्मी , शहर की उन चुनिंदा महिलाओं में से एक थी जिन्हें देखकर किसी को भी ईर्ष्या हो जाए। वह और उसकी तीन अन्य सहेलियाँ—रोशनी, शिखा और तान्या—पूरी सोसाइटी में आकर्षण का केंद्र थीं। उनकी ज़िंदगी किसी हॉलीवुड फिल्म के सीन जैसी लगती थी। वे जब भी … Read more

इंतज़ार के वे खामोश पल

“साहब, बुढ़ापा बहुत अजीब होता है। इंसान का शरीर तो बूढ़ा हो जाता है, लेकिन उसका दिल बिल्कुल एक छोटे बच्चे जैसा हो जाता है। जैसे बच्चों को हर वक़्त प्यार, दुलार और अपनेपन की ज़रूरत होती है, वैसे ही इन बुजुर्गों को भी होती है। पैसे से आप इनके लिए अच्छा बिस्तर तो ला … Read more

अस्तित्व की धूप

छत पर पहुँचते ही शालिनी ने मीरा का हाथ पकड़ लिया और एक गहरी साँस लेते हुए बोली, “मीरा, मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि तू साबित क्या करना चाहती है? कल ही तो वकीलों से बात हुई थी। तूने खुद कहा था कि अब तू विकास के साथ एक पल भी नहीं … Read more

इंतज़ार के रंग

 मीरा का गला भर आया। उसके पास इस मासूम सवाल का कोई तार्किक जवाब नहीं था। उसने बस आरव को अपने सीने से लगा लिया और उसके बालों को सहलाते हुए कहा, “पापा के समय को खरीदने की जरूरत नहीं है मेरे बच्चे। तुम उनकी जान हो। वो तुमसे बहुत प्यार करते हैं, बस अपनी … Read more

रिश्तों की बदलती छाँव

 एक दिन शाम को जब स्नेहा ऑफिस में एक जरूरी मीटिंग के कारण लेट हो गई, तो घर पहुँचते ही उसे सावित्री जी के तीखे व्यंग्य सुनने पड़े। “नौकरी करने का यह मतलब थोड़ी है कि घर-परिवार को भूल जाओ। हम भी तो अपने ज़माने में काम करते थे, लेकिन घर के चूल्हे-चौके से कभी … Read more

सुहाग की निशानी: एक अनकहा बलिदान

मेरे बुटीक में पिछले पांच सालों से काम करने वाली रमा सिर्फ मेरी कर्मचारी नहीं, बल्कि मेरे परिवार के एक सदस्य जैसी हो गई थी। रमा के हाथों में जादू था। वह कपड़ों पर कढ़ाई का ऐसा बारीक और खूबसूरत काम करती थी कि बड़े-बड़े डिज़ाइनर भी उसकी कला के आगे फीके पड़ जाएं। वह … Read more

एकांत की पूर्णता

 शशांक क्यों आ रहा है? क्या वह सुजाता से प्रेम करता है? नहीं। वह अपनी सफलता के अहंकार में डूबा हुआ है। वह यह साबित करने आ रहा है कि उसका जाना सही था। वह सुजाता को अपनी उपलब्धियों के माध्यम से ‘उपकृत’ करने आ रहा है। शशांक यह सोच रहा है कि सुजाता आज … Read more

जिंदगी की लौ

 सुजाता की स्नेह भरी लेकिन सशक्त बातों ने सीमा  के अंदर सोई हुई उस चिंगारी को फिर से हवा दे दी, जो डर और शर्मिंदगी के कारण बुझ गई थी। उसे अपनी भूल का एहसास हो गया। उसे समझ आ गया कि भागना और हार मान लेना किसी समस्या का समाधान नहीं है। सीमा  ने … Read more

प्रायश्चित के आंसू

लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं था। जब स्वाति के पति नरेश और उसके ससुराल वालों को इस बात का पता चला, तो घर में तूफान आ गया। नरेश ने साफ शब्दों में कह दिया, “तुम पागल हो गई हो स्वाति? यह कोई खून देने जैसी छोटी बात नहीं है, यह एक बहुत बड़ा ऑपरेशन … Read more

उम्र का वनवास

 नेहा स्वभाव से बुरी नहीं थी, लेकिन वह बहुत ‘प्रोफेशनल’ थी। घर की हर चीज़ अपनी जगह पर होनी चाहिए, यह उसका सख्त नियम था। दीनानाथ जी अगर गलती से सोफे पर चाय का एक कतरा भी गिरा देते, तो नेहा के माथे पर सिलवटें पड़ जाती थीं। “पापा जी, आप डाइनिंग टेबल पर ही … Read more

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