इंसानियत का स्पर्श
सुहासिनी देवी ने एक गहरी सांस ली और बहुत ही शांत लेकिन गंभीर स्वर में बोलीं, “राधिका, तुम्हें याद है सुबह तुमने शांति के साथ कैसा बर्ताव किया था? तुमने कहा था ना कि वह एक नौकरानी है, अनपढ़ है, उसे कोई तमीज नहीं है। उसने तुम्हारे बिखरे कमरे को समेटने की ही तो कोशिश … Read more