गलती या महापाप – रिंकी अग्रवाल ‘प्राची’

अम्मा मुझसे अब नहीं चला जाता हांडा लेकर। बारातों में बहुत-बहुत दूर चलना पड़ता है। नाचने गाने में ही लगे रहते हैं रिश्तेदार। आगे ही नहीं बढ़ने देते। पांचवा महीना चल रहा है मेरा। इतना तेज संगीत और कानफोडू डीजे। मुझे तो डर लगता है कही बच्चों को कुछ नुकसान ना हो जाए। गर्भवती पिंकी … Read more

 अतीत का कर्ज

शहर के सबसे प्रतिष्ठित और रसूखदार सेठ रघुनाथ दास की हवेली में आज सुबह से जो शहनाइयाँ गूँज रही थीं, वे अब हृदय विदारक चीखों में तब्दील हो चुकी थीं। पूरा घर सफेद चादरों से ढँक गया था और हवेली के विशाल प्रांगण में एक अजीब सा, डरावना सन्नाटा पसरा था, जिसे केवल औरतों के … Read more

प्यार की दीवार

अंजलि बिना झिझक के अपना क्रेडिट कार्ड निकाल कर राहुल की तरफ खिसका देती थी। पिछले छह महीनों में ऐसा कई बार हुआ था। कभी राहुल का रेंट, कभी उसकी बाइक की ईएमआई, तो कभी उसके दोस्तों के साथ पार्टी का बिल। अंजलि को लगता था कि प्यार में ये सब चलता है। आखिर राहुल … Read more

रिश्तों की जमापूंजी – खुशी

राधिका एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की थी जिसके पिताजी पुजारी थे।राधिका देखने में अच्छी या सुंदर नहीं थी।पहली शादी में दो महीने बाद ही तलाक हो कर वो अपने पिता के घर आ गई।बाकी भाई बहन वेल सेटल्ड थे और वो राधिका का ध्यान भी रखते थे। राधिका ने वापस आ कर कंप्यूटर कोर्स किया … Read more

“रिश्तों की जमा-पूंजी ” – कमलेश आहूजा

सरोज के लिए दिवाली की वह रात खुशियों की रात थी,जब उसका बेटा, बहू और पोती चार वर्ष बाद विदेश से लौटे थे।कब से बेचारी इस घड़ी का इंतजार कर रही थी। कहने को वह भरे-पूरे परिवार में रह रही थी, पर पिछले कई वर्षों से हर दिवाली पर खुद को बहुत अकेला महसूस कर … Read more

*रिश्तों की जमा – पूंजी* – तोषिका

“अब तो तू बड़ा हो गया है, तेरे लिए भी लड़की ढूंढना शुरू कर रहे है, तेरे मम्मी पापा।” सिर पर हाथ फेरती हुई विकास की दादी रजनी बोली। तभी पीछे से विकास के पिता जी आए और बोले “जी मां, ढूंढना तो शुरू कर दिया है। कुछ लड़कियां है जो मैने और विकास की … Read more

रिश्ते पैसों से नहीं बनते – रानू जैन

मनीषा की शादी को अभी 6 महीने ही हुए थे। ससुराल में सास शांति देवी, पति अमन और देवर यकीन थे। शांति देवी मोहल्ले में मशहूर थीं – साफ दिल, थोड़ी कड़क और हिसाब की पक्की।  शादी के पहले ही दिन शांति देवी ने दहेज का सामान देखा – फ्रिज, टीवी, सोना। फिर मनीषा का … Read more

रिश्ते पैसों से नहीं संस्कार से निभते हैं | – सुदर्शन सचदेवा

बरसों पुराना वह घर आज भी वैसा ही था। आँगन के बीचों-बीच खड़ा नीम का पेड़, बरामदे में रखी लकड़ी की पुरानी कुर्सी, तुलसी के चौरे पर जलता दीपक… सब कुछ पहले जैसा। यदि कुछ बदल गया था, तो वह था घर का शोर। जहाँ कभी बच्चों की हँसी गूँजती थी, वहाँ अब सन्नाटा अपनी … Read more

 रिश्तों के बंद दरवाज़े 

सावित्री देवी के झुर्रियों वाले हाथों में एक अजीब सी फुर्ती थी। पिछले पंद्रह दिनों से उनके पैरों में जैसे पहिए लगे हुए थे। मौका ही कुछ ऐसा था—उनकी सगी छोटी बहन सुमित्रा के इकलौते पोते, रोहन की शादी थी। शादी जयपुर के एक बड़े और आलीशान रिसॉर्ट में तय हुई थी, जिसे आजकल के … Read more

अनकहे वात्सल्य

राधिका जब ब्याह कर ‘आनंद भवन’ में आई थी, तो उस घर की भव्यता से ज्यादा वहां के कड़े अनुशासन ने उसे डरा दिया था। शहर के नामी और प्रतिष्ठित ‘शर्मा परिवार’ की बहु होना कोई आसान बात नहीं थी। घर की हर चीज़ घड़ी की सुई के साथ चलती थी। और इस पूरे घर … Read more

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